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पितृपक्ष में गया का सफर होगा आसान, MP से चलेगी ये स्पेशल ट्रेन, देखें रूट

पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है। यह वो समय होता है, जब लोग अपने पितरों का पिंडदान और तर्पण करते हैं। इस समय कई लोग श्राद्ध कर्म के लिए गया भी जाते हैं। अब आने जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए रेलवे की ओर से पितृ पक्ष स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया गया है।

इस स्पेशल ट्रेन का फायदा मध्य प्रदेश के यात्रियों को भी होने वाला है। दरअसल रेलवे प्रशासन ने जबलपुर से लेकर गया के बीच ये खास ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। जबलपुर से गया और गया से जबलपुर तक ये ट्रेन 3-3 फेरे में चलेगी।

जबलपुर से गया तक पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन

इस स्पेशल ट्रेन के बारे में रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक ट्रेन संख्या 01701, 29 सितंबर, 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर को रात 9:25 पर जबलपुर से निकलेगी। अगले दिन दोपहर 2:30 पर यह गया जंक्शन पहुंचेगी। इसी तरह से ट्रेन नंबर 01702 गया से 28 सितंबर, 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से निकलेगी। ये अगले दिन सुबह 8.10 पर जबलपुर स्टेशन पहुंचेगी।

यहां रहेगा ठहराव

आते और जाते समय यह ट्रेन कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, प दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम जंक्शन, डेहरी रेलवे स्टेशन पर रुकेगी। दोनों ही फेरे में इन स्टेशनों पर ठहराव रहने वाला है।

 

रानी कमलापति से भी होगा संचालन

बता दें कि मध्य प्रदेश में ये ट्रेन की जबलपुर से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से भी चलाई जा रही है। 27 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को ट्रेन नंबर 01661 रानी कमलापति गया पितृपक्ष स्पेशल दोपहर 3:20 पर जाने कमलापति करवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2:30 पर गया पहुंचेगी। इसी तरह से वापसी में ट्रेन नंबर 01662 गया रानी कमलापति पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन दोपहर 3:30 पर गया से रवाना होगी और अगले दिन 4 बजकर 15 मिनट पर रानी कमलापति पहुंचेगी।

कहां रुकेगी ट्रेन

रानी कमलापति से गया के बीच चलने वाली ये ट्रेन नर्मदा पुरम, इटारसी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, प दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम जंक्शन, डेहरी, अनुग्रह नारायण रोड, पर रुकेगी।

 

मिलेगी ये सुविधा

इस पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन में सेकंड एसी के 2, थर्ड एसी के 4, स्लीपर के 12 और 4 जनरल कोच लगाए जाएंगे। इसमें 2 एलएलआरडी कोच भी लगाए जाने वाले हैं। इस ट्रेन में कुल 24 कोच रहने वाले हैं। इससे जुड़ी सभी जानकारी भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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‘हमारी रातों की नींद उड़ गई’, इंदौर में भूमिगत मेट्रो रूट के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, 50 साल पुराने मकानों पर खतरा!

इंदौर में मेट्रो नेटवर्क विस्तार के तहत प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रविवार रात तिलक नगर, गोयल नगर और साईंनाथ कॉलोनी के सैकड़ों रहवासी बंगाली चौराहे पर जमा हुए।

लोगों ने ‘एक दिया उम्मीद का’ जलाकर कैंडल मार्च निकाला और टेंडर की कॉपी फाड़कर जमकर नारेबाजी की। रहवासियों का कहना है कि वे मेट्रो के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घनी आबादी और पुराने मकानों के नीचे से टनल बनाने के बजाय दूसरे विकल्पों का तकनीकी अध्ययन होना चाहिए।

बोरिंग और पुराने मकानों पर मंडराया खतरा

प्रदर्शनकारियों ने अपनी बड़ी चिंताओं को सामने रखते हुए कहा कि अंडरग्राउंड मेट्रो की खबर के बाद से उनकी रातों की नींद उड़ गई है। इलाके में 50 से 60 साल पुराने ढेरों मकान हैं, जो टनल खुदाई के दौरान होने वाले कंपन से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र के अधिकांश परिवार घरेलू पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर हैं। टनल बोरिंग मशीन चलने से जलस्रोत बंद होने और भविष्य में भीषण जलसंकट खड़ा होने का डर बना हुआ है।

घर-घर जाकर चलाया जागरूकता अभियान

आंदोलन की अगुवाई कर रहे स्थानीय नागरिकों ने बताया कि शुरू में कई लोगों को इस प्रस्तावित भूमिगत रूट के गंभीर परिणामों की सही जानकारी नहीं थी। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर क्षेत्रवासियों को रूट मैप और उससे होने वाले नुकसानों के बारे में समझाया गया। इसके बाद सभी से आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराए गए। प्रदर्शन में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

लिखित आश्वासन तक जारी रहेगा आंदोलन

रहवासियों का साफ कहना है कि जब तक शासन, प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन लिखित में सुरक्षा और रूट बदलाव का आश्वासन नहीं देता, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। मामले को लेकर कोर्ट में याचिका भी दायर कर दी गई है। आरोप है कि बिना कोई जानकारी दिए चुपके से टेंडर बदला गया। अब इस लड़ाई में युवा यानी ‘जेन जी’ भी शामिल होने जा रहे हैं, जो जल्द ही बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

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