इस बार की गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ कदमताल बैंड और झांकियों का आयोजन नहीं होगी बल्कि यह कर्तव्य पथ को प्रतीकात्मक युद्ध भूमि में बदल देने वाला अनुभव बनेगी। दर्शकों को ऐसा अहसास होगा मानो वह किसी सैन्य अभ्यास या वास्तविक संघर्ष की झलक देख रहे हों जहां आकाश में लड़ाकू विमान युद्ध क्रम में होंगे और जमीन पर सेना उसी क्रम में आगे बढ़ेगी जैसे दुश्मन से सामना करते समय बढ़ती है। इस बार की परेड परंपरा और प्रतीक से आगे जाकर शक्ति, संकल्प और तैयारी का जीवंत प्रदर्शन होगी जो साफ बताएगी कि भारत अब अपने गणतंत्र का उत्सव सिर्फ फूलों से नहीं बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और युद्ध तत्परता के साथ मनाता है।
हम आपको बता दें कि 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड भारत की सैन्य चेतना, आत्मविश्वास और आक्रामक संकल्प का सार्वजनिक उद्घोष भी बनेगी। भारत के सफल ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला गणतंत्र दिवस है जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और पराक्रम पर विशेष जोर होगा। हम आपको बता दें कि 26 जनवरी को एक शानदार हवाई प्रदर्शन होगा, जिसमें 29 विमान भाग लेंगे। यह नया फ्लाईपास्ट भारतीय वायु सेना की युद्ध क्षमता और परिचालन तत्परता को दर्शाएगा। इस वर्ष का मुख्य आकर्षण 'सिंदूर' नामक एक नया लड़ाकू विमान फॉर्मेशन है, जो पिछले वर्ष के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किए गए सटीक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' में वायु सेना की भूमिका को दर्शाएगा। इस फॉर्मेशन में दो राफेल लड़ाकू विमान, दो Su-30 विमान, दो MiG-29 और एक जगुआर शामिल हैं जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में भाग लिया था।
हम आपको बता दें कि पहली बार फ्लाइपास्ट को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इनमें 16 फाइटर जेट, चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलिकॉप्टर शामिल हैं। वज्रांग, वरुण, अर्जन, गरुड, प्रहार और ध्वज जैसे नामों वाले गठन वायु सेना की मारक क्षमता, समुद्री निगरानी, त्वरित परिवहन और आक्रमण क्षमता को प्रदर्शित करेंगे। फ्लाइपास्ट में पी 8 आई समुद्री निगरानी विमान, सी 130 जे और सी 295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, अपाचे और लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर भी शामिल होंगे। यह पूरा हवाई प्रदर्शन जमीन पर दिखाए जा रहे फेज्ड बैटल एरे प्रारूप से जुड़ा होगा।
साथ ही इस बार परेड में थल सेना भी पहली बार फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेशन में कर्तव्य पथ पर उतरेगी। इसका अर्थ है कि सेना की टुकड़ियां और स्वदेशी प्लेटफार्म उसी क्रम में आगे बढ़ेंगे जैसे वह वास्तविक युद्ध में तैनात होते हैं। सबसे आगे टोही, उसके बाद लॉजिस्टिक्स और फिर अग्रिम मोर्चे की इकाइयां रहेंगी। सभी सैनिक युद्धक पोशाक और साजो सामान के साथ नजर आएंगे। इसी क्रम में नई भैरव लाइट कमांडो बटालियन का भी गणतंत्र दिवस परेड में पदार्पण होगा। हम आपको बता दें कि यह बटालियन पिछले वर्ष अक्टूबर में गठित की गई थी और इसका उद्देश्य पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की खाई को पाटना है। परेड में कुल 18 मार्चिंग कंटिंजेंट, 13 बैंड और 30 झांकियां होंगी। वायु सेना के बैंड में पहली बार नौ महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी जो लैंगिक समानता की दिशा में एक ठोस संदेश है।
इस वर्ष परेड की प्रमुख थीम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने की होगी। कर्तव्य पथ पर बने एन्क्लोजर में इसके शुरुआती पदों पर आधारित चित्र और पुष्प सज्जा होगी तथा इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दी जाएगी। हम आपको बता दें कि इस बार गणतंत्र दिवस पर मुख्य तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष Antonio Costa उपस्थित रहेंगे। इस बार एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि वीवीआईपी जैसे लेबल समाप्त कर दिए गए हैं। सभी एन्क्लोजर भारतीय नदियों के नाम पर होंगे जबकि बीटिंग रिट्रीट समारोह में भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर एन्क्लोजर के नाम रखे जाएंगे।
देखा जाये तो गणतंत्र दिवस की परेड में ऑपरेशन सिंदूर को केंद्र में लाकर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत पर हमला अब सैन्य प्रतिक्रिया को जन्म देता है। फेज्ड बैटल एरे का प्रयोग यह बताता है कि भारत अब परेड को खिलौना प्रदर्शन नहीं बल्कि युद्ध के अभ्यास जैसा मंच बना रहा है। यह सेना की मानसिकता में आए बदलाव का संकेत है जहां दिखावा नहीं तैयारी प्राथमिकता है। भैरव कमांडो बटालियन का पदार्पण भविष्य के युद्धों की झलक देता है। तेज हल्की और घातक इकाइयां आने वाले संघर्षों की जरूरत हैं। कुल मिलाकर गणतंत्र दिवस 2026 ऐलान है कि सिंदूर आसमान में है और उसका संदेश साफ है। जो आंख उठाएगा उसे जवाब मिलेगा और वह भी पूरी तैयारी के साथ।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल की सत्तारूढ़ वाम-लोकतांत्रिक गठबंधन (एलडीएफ) सरकार पर सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के सत्ता में आने पर सोने की चोरी के मामले की पूरी जांच का वादा किया। तिरुवनंतपुरम में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पूरा देश, हम सभी, भगवान अय्यप्पा में अटूट आस्था रखते हैं। हालांकि, एलडीएफ सरकार ने सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यहां से सोने की चोरी की खबरें आ रही हैं। मंदिर से, भगवान के ठीक बगल से सोना चोरी होने की खबरें आ रही हैं। मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं: जैसे ही यहां भाजपा की सरकार बनेगी, इन आरोपों की पूरी जांच होगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। यह मोदी का आश्वासन है।
सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में मंदिर के पवित्र अवशेषों, जिनमें श्रीकोविल (गर्भगृह) के द्वार के फ्रेम और द्वारपाल की मूर्तियाँ शामिल हैं, से लगभग 4.54 किलोग्राम सोने की हेराफेरी का आरोप है। यह चोरी कथित तौर पर 2019 में मंदिर की संरचनाओं की मरम्मत और स्वर्ण-चढ़ाई के बहाने की गई थी। इस विवाद की जड़ें 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा किए गए दान में निहित हैं, जिन्होंने सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में सोने की परत चढ़ाने और आवरण कार्य के लिए 30.3 किलोग्राम सोना और 1,900 किलोग्राम तांबा दान किया था। बाद में हुई जांच और अदालत की निगरानी में हुई पूछताछ में दान किए गए सोने और कथित तौर पर इस्तेमाल की गई मात्रा में विसंगतियां पाई गईं।
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एलडीएफ सरकार के शासनकाल में भ्रष्टाचार ने केरल के विकास को नुकसान पहुंचाया है और बैंक बचत को प्रभावित किया है। उन्होंने वादा किया कि भाजपा सरकार सहकारी बैंक घोटाले जैसे घोटालों में लूटे गए धन की वसूली करेगी। पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार ने केरल के विकास को बुरी तरह प्रभावित किया है। एलडीएफ के शासनकाल में बैंकों में जमा बचत भी प्रभावित हुई है। सहकारी बैंक घोटाले के कारण गरीब और मध्यम वर्ग की मेहनत की कमाई लूट ली गई है... भाजपा को मौका दीजिए, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लुटेरों से एक-एक रुपया वापस लिया जाए।
उन्होंने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की हालिया जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केरल में पार्टी की नींव है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीत का प्रतीक है, साथ ही सुशासन और विकास का वादा भी करती है। उन्होंने कहा, “तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत साधारण नहीं है। यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है। तिरुवनंतपुरम ने केरल में भाजपा सरकार की नींव रखी है। आपने भाजपा को तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सेवा करने का अवसर दिया। इसकी गूंज न केवल केरल में बल्कि पूरे देश में सुनाई देती है। यह सुशासन के लिए काम करने वाली पार्टी की जीत है। यह जीत 'विकसित केरल' के निर्माण के लिए है। यह जीत एलडीएफ और यूडीएफ के भ्रष्टाचार से केरल को मुक्त करने की प्रतिबद्धता की जीत है।”
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