गुल प्लाजा शॉपिंग सेंटर में लगी भीषण आग के लगभग एक सप्ताह बाद, लापता लोगों के परिवारों का गुस्सा और निराशा खुले विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गई, जिससे रिश्तेदारों के अनुसार अधिकारियों की ओर से तत्परता की कमी उजागर हुई, जैसा कि एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया है। खबर के अनुसार, बेटों, पतियों और भाइयों की तस्वीरें लिए महिलाएं जले हुए स्थल के पास जमा हुईं और अधिकारियों और बचाव दल पर अपने प्रियजनों के लापता होने के बावजूद बेहद धीमी गति से काम करने का आरोप लगाया। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कराची शहर में 17 जनवरी को शॉपिंग सेंटर में लगी आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 67 हो गई है, और बचाव दल दर्जनों लापता लोगों का पता लगाने में जुटे हैं। आग सौंदर्य प्रसाधन, कपड़े और प्लास्टिक के घरेलू सामानों जैसी वस्तुओं के कारण तेजी से शॉपिंग सेंटर में फैल गई थी।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आग लगने के बाद से वे एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें ठोस जानकारी के बजाय अस्पष्ट आश्वासन ही मिल रहे हैं। इमारत के कुछ हिस्से अभी भी मलबे में दबे हुए हैं, और परिवारों ने सवाल उठाया कि आपदा के छह दिन बाद भी मलबा हटाने का काम पूरा क्यों नहीं हुआ है। कई महिलाओं ने इस इंतजार को "मानसिक रूप से असहनीय" बताया और कहा कि जवाब न मिलने के साथ बीतता हर घंटा उनके सदमे को और बढ़ा रहा है। शहर की एक प्रमुख सड़क, एमए जिन्ना रोड पर प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने से तनाव बढ़ गया। अपनी हताशा में, कुछ लोगों ने क्षतिग्रस्त इमारत तक पहुंचने के लिए सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, उन्हें विश्वास था कि त्वरित कार्रवाई से अभी भी जानें बचाई जा सकती हैं।
पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया और भीड़ को रोकने के लिए घेरा बना लिया। शहर के सबसे व्यस्त वाणिज्यिक केंद्रों में से एक में लगी इस आग में दर्जनों लोगों के मारे जाने की आशंका है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, लापता लोगों की संख्या के बारे में आधिकारिक और व्यापक जानकारी न होने से अविश्वास और बढ़ गया है।
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जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 8 फरवरी को होने वाले अचानक चुनाव से पहले संसद भंग कर दी है। जापान की संसद के अध्यक्ष ने एक पत्र पढ़कर निचले सदन को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया। इस दौरान सांसदों ने पारंपरिक नारा "बंजई" लगाया। 465 सदस्यीय निचले सदन के भंग होने से अब 12 दिवसीय चुनाव अभियान का रास्ता खुल गया है, जो आधिकारिक तौर पर मंगलवार से शुरू होगा। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ताकाइची ने सोमवार को चुनाव कराने की अपनी मंशा की घोषणा की थी। अक्टूबर में जापान की पहली महिला नेता चुनी गईं ताकाइची को पद संभाले हुए केवल तीन महीने हुए हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वह अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता का लाभ उठाकर सत्तारूढ़ पार्टी को हाल के वर्षों में जनता के समर्थन में आई भारी गिरावट से उबरने में मदद करने की उम्मीद कर रही हैं।
ताकाइची को प्रधानमंत्री बने मात्र तीन महीने हुए हैं लेकिन उन्हें करीब 70 प्रतिशत की मजबूत स्वीकृति रेटिंग मिली है। ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को अब भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वह भ्रष्टाचार से जुड़े कई घोटालों और यूनिफिकेशन चर्च से पार्टी के पुराने संबंधों को लेकर विवादों से जूझ रही हैं। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि नया विपक्षी दल सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस मध्यमार्गी मतदाताओं को आकर्षित कर पाएगा या नहीं जबकि विपक्षी दल अब भी बिखरे हुए हैं। ताकाइची की ताइवान समर्थक टिप्पणियों के बाद चीन के साथ तनाव बढ़ रहा है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ताकाइची हथियारों पर अधिक खर्च करें। वाशिंगटन और बीजिंग इस क्षेत्र में सैन्य प्रभुत्व हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। जापान के 465 सदस्यीय निचले सदन के भंग होने से 12-दिवसीय चुनाव अभियान का रास्ता साफ हो गया है जो आधिकारिक रूप से मंगलवार से शुरू होगा। बहुमत की उम्मीदें ताकाइची की शीघ्र चुनाव कराने की योजना का उद्देश्य उनकी लोकप्रियता का लाभ उठाकर सत्तारूढ़ ‘लिबरल डेमोक्रेट पार्टी’ (एलडीपी) के बहुमत को निचले सदन में बढ़ाना है। निचला सदन जापान की द्विसदनीय संसद में अधिक शक्तिशाली सदन है। घोटालों से घिरी एलडीपी और उसके गठबंधन के पास 2024 के चुनाव में हार के बाद निचले सदन में मामूली बहुमत था।
गठबंधन के पास ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है और वह अपने एजेंडे को पारित करने के लिए विपक्षी सदस्यों के वोट पर निर्भर है। विपक्षी नेताओं ने प्रमुख आर्थिक उपायों के लिए आवश्यक बजट को पारित करने में देरी को लेकर ताकाइची की आलोचना की। सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में चुनाव की योजनाओं की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि एकमात्र विकल्प जनता के पास है जो संप्रभु नागरिक के रूप में यह तय करे कि साने ताकाइची को प्रधानमंत्री बनना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा, मैं इस पर अपना प्रधानमंत्री पद का करियर दांव पर लगा रही हूं। चीन, ट्रंप और भ्रष्टाचार के मामले इस बीच ताकाइची द्वारा दिए गए उन बयानों के बाद जापान और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिनमें उन्होंने संकेत दिया है कि चीन अगर ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान भी इसमें शामिल हो सकता है जिससे नाराज चीन ने आर्थिक और राजनयिक प्रतिशोध को और तेज कर दिया है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है जिस पर बीजिंग अपना दावा करता है। ताकाइची सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने तथा रक्षा खर्च बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाना चाहती हैं।
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