दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का नया केंद्र बन गई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए एक के बाद एक दुनिया के प्रमुख नेता भारत पहुंच रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातों का लंबा सिलसिला यह बताने के लिए काफी है कि भारत की वैश्विक भूमिका अब कितनी तेजी से बढ़ रही है। रूस से लेकर चीन, ईरान से लेकर खाड़ी देशों और अफ्रीका से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक, इन मुलाकातों के जरिए भारत एक साथ कई मोर्चों पर अपने रिश्तों को मजबूत कर रहा है। यह केवल नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती ताकत, उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और अपनी शर्तों पर सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने की रणनीति का स्पष्ट संकेत है।
इन मुलाकातों की शुरुआत 11 सितंबर यानि आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होगी। रूस भारत का पुराना और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। ऐसे समय में जब रूस और पश्चिम के बीच तनाव बना हुआ है, पुतिन के साथ मोदी की बातचीत का महत्व और बढ़ जाता है। रक्षा सहयोग, ऊर्जा, परमाणु क्षेत्र, अंतरिक्ष और यूरेशियाई भू-राजनीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के रिश्ते भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का महत्वपूर्ण आधार हैं।
इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकातें होंगी। ईरान के साथ संवाद पश्चिम एशिया में भारत के हितों, ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसे संपर्क-साधनों के लिहाज से अहम है। वहीं गुटेरेस के साथ बातचीत यह संकेत देती है कि भारत वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के सवाल पर अपनी भूमिका को और मुखर करना चाहता है।
12 सितंबर का कार्यक्रम भारत की ‘एक साथ कई मोर्चों पर साझेदारी’ वाली रणनीति को स्पष्ट करता है। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठकें भारत के लिए अफ्रीका, आसियान, खाड़ी और हिंद-प्रशांत, चारों दिशाओं में अपनी पहुंच मजबूत करने का अवसर हैं। खासकर वियतनाम और मलेशिया के साथ संबंध हिंद-प्रशांत में भारत की सक्रियता तथा समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। इसी दिन राष्ट्रपति पेजेशकियन की राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात भी भारत-ईरान संबंधों की व्यापकता को रेखांकित करती है। लेकिन सबसे अधिक निगाहें शाम को होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक पर रहेंगी। भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच शीर्ष स्तर की बातचीत यह संदेश देती है कि भारत प्रतिस्पर्धा के बावजूद संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता। यह ‘प्रतिस्पर्धा के साथ सह-अस्तित्व और संवाद’ वाली व्यावहारिक कूटनीति का संकेत है।
13 सितंबर को कजाखस्तान, फिलीपींस, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ बातचीत इस रणनीति को और व्यापक बनाती है। कजाखस्तान भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार है, फिलीपींस हिंद-प्रशांत में समुद्री साझेदारी की दृष्टि से अहम है, जबकि मिस्र स्वेज नहर और पश्चिम एशिया-अफ्रीका के बीच भारत की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ संवाद भारत-अफ्रीका साझेदारी और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।
बुरुंडी, नाइजीरिया और युगांडा के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातें भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। ये बैठकें बताती हैं कि भारत अफ्रीका को केवल व्यापारिक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है।
देखा जाये तो इन द्विपक्षीय बैठकों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत किसी एक शक्ति-गुट के साथ खड़े होने के बजाय सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंधों को संतुलित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। रूस से रक्षा और ऊर्जा, ईरान से कनेक्टिविटी, खाड़ी से निवेश और ऊर्जा, चीन से संवाद, आसियान से हिंद-प्रशांत सहयोग और अफ्रीका से ग्लोबल साउथ की साझेदारी, इन सभी को एक साथ साधने की कोशिश दिखाई देती है।
यही भारत की सामरिक स्वायत्तता का नया रूप है। दिल्ली में होने वाली ये मुलाकातें दुनिया को यह संदेश देंगी कि भारत अब केवल वैश्विक व्यवस्था का सहभागी नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और दिशा को प्रभावित करने वाली एक निर्णायक शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है।
-नीरज कुमार दुबे
Continue reading on the app
न्यूजीलैंड को भारत के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के प्रमुख खिलाड़ी रचिन रवींद्र कंधे की चोट के कारण इस पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। रवींद्र को पिछले सप्ताह एक प्रचार कार्यक्रम के दौरान चोट लगी थी। उनकी चोट को ठीक होने में करीब छह सप्ताह लगने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने रवींद्र के बाहर होने पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि टीम के लिए रवींद्र की भूमिका आने वाले घरेलू सीजन में काफी अहम है। इसलिए उनके साथ जल्दबाजी नहीं की जाएगी। टीम को उम्मीद है कि वह चार नवंबर से शुरू होने वाली भारत के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज तक पूरी तरह फिट हो जाएंगे।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज की शुरुआत 22 अक्टूबर से क्राइस्टचर्च में होगी। इसके बाद दोनों टीमें पांच एकदिवसीय मैच और दो टेस्ट मैच भी खेलेंगी। यानी न्यूजीलैंड के लिए भारत का यह दौरा लंबे क्रिकेट कार्यक्रम की शुरुआत करने वाला है।
रवींद्र की जगह मध्य क्रम के बल्लेबाज बेवन जैकब्स को टीम में शामिल किया गया है। जैकब्स अब तक न्यूजीलैंड के लिए 11 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं। बांग्लादेश के खिलाफ अपने पिछले टी20 मुकाबले में उन्होंने नाबाद 62 रन बनाए थे। ऐसे में टीम प्रबंधन को उम्मीद होगी कि वह रवींद्र की गैरमौजूदगी में बल्लेबाजी क्रम को मजबूती दे सकें।
तेज गेंदबाजी विभाग में भी न्यूजीलैंड ने कई विकल्प रखे हैं। एडम मिल्न लंबे समय के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक साल से ज्यादा समय से इस प्रारूप में न्यूजीलैंड के लिए मुकाबला नहीं खेला है। उनके साथ लॉकी फर्ग्यूसन, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, जैकब डफी, जैक फाउल्क्स और नाथन स्मिथ तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगे।
गौरतलब है कि बेन सियर्स को चोट के कारण टीम में जगह नहीं मिली है। वह टखने की चोट से उबर रहे हैं। न्यूजीलैंड के पास तेज गेंदबाजों का बड़ा समूह होने के कारण टीम प्रबंधन अलग-अलग खिलाड़ियों को मौका देकर उनके काम के बोझ को संभालने की तैयारी में है।
रॉब वाल्टर ने कहा है कि टीम की पहली प्राथमिकता मुकाबले जीतना और मैदान पर सबसे मजबूत संयोजन उतारना है, लेकिन आने वाले महीनों में क्रिकेट की व्यस्तता को भी ध्यान में रखना होगा। भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद न्यूजीलैंड को ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है, जहां टीम चार टेस्ट मैच खेलेगी। इसके बाद अगले साल की शुरुआत में श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मुकाबले होने हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, न्यूजीलैंड इस पूरी टी20 सीरीज में अपने सभी 16 खिलाड़ियों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। इसका मकसद खिलाड़ियों को लगातार मुकाबलों के दबाव से बचाना और लंबे सत्र के लिए उन्हें फिट रखना है।
बल्लेबाजी क्रम में फिन एलन और टिम सीफर्ट एक बार फिर पारी की शुरुआत करते नजर आ सकते हैं। दोनों खिलाड़ी टी20 विश्व कप के बाद पहली बार शीर्ष क्रम में साथ दिखाई देंगे। दोनों के पास न्यूजीलैंड क्रिकेट के साथ सीमित करार हैं और वे इस साल के अंत में बिग बैश लीग में भी खेलेंगे। इन दोनों की वापसी के कारण टिम रॉबिन्सन को टीम में जगह नहीं मिली है।
रॉब वाल्टर ने भारत के न्यूजीलैंड दौरे पर आने को लेकर भी उत्साह जताया है। उन्होंने भारत को मजबूत टीम बताते हुए कहा कि घरेलू परिस्थितियों में मौजूदा टी20 विश्व चैंपियन के खिलाफ खेलना न्यूजीलैंड के लिए बड़ी चुनौती होगी। उन्हें उम्मीद है कि मुकाबलों में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे और सीरीज यादगार बनेगी।
बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 22 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा। इसके बाद पांच एकदिवसीय और दो टेस्ट मैच होंगे। न्यूजीलैंड की टी20 टीम की कमान मिशेल सैंटनर संभालेंगे और टीम में फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे, जैकब डफी, लॉकी फर्ग्यूसन, जैक फाउल्क्स, मैट हेनरी, बेवन जैकब्स, काइल जैमीसन, एडम मिल्न, डेरिल मिशेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम सीफर्ट और नाथन स्मिथ शामिल हैं।
Continue reading on the app