सिल्वर-ETF में 24% की गिरावट, लेकिन चांदी सिर्फ 4% गिरी:बजट से पहले बढ़ी सट्टेबाजी बनी वजह; जानें अब निवेश करना कितना सही
भारतीय शेयर बाजार में 22 जनवरी को सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली। टाटा सिल्वर ईटीएफ (Tata Silver ETF) जैसे फंड्स करीब 24 प्रतिशत तक टूट गए, जबकि इसी दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के भाव में केवल 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि जब चांदी की असली कीमत केवल 4% गिरी, तो उसे ट्रैक करने वाले ETF 24% कैसे गिर गए? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह गिरावट चांदी के कमजोर होने की वजह से नहीं, बल्कि बजट से पहले भारतीय बाजार में स्पेकुलेटिव प्रीमियम अनवाइंडिंग के कारण हुई है। स्पेकुलेटिव प्रीमियम अनवाइंडिंग क्या है? स्पेकुलेटिव प्रीमियम अनवाइंडिंग का मतलब है कि बाजार में किसी चीज (जैसे शेयर, कमोडिटी या ETF) की कीमत सिर्फ सट्टेबाजी या अफवाहों से ज्यादा बढ़ गई होती है। यह एक्स्ट्रा बढ़ी हुई कीमत (प्रीमियम) उम्मीदों पर टिकी होती है, जैसे कोई पॉलिसी बदलाव या अच्छी खबर। लेकिन जब वो उम्मीदें गलत साबित होती हैं या कोई बदलाव नहीं आता, तो वो एक्स्ट्रा कीमत तेजी से कम हो जाती है। टाटा सिल्वर ETF में सबसे ज्यादा 17% की गिरावट 3 वजहों से गिरे सिल्वर ETF? सट्टेबाजी वाला प्रीमियम:1 फरवरी के यूनियन बजट को देखते हुए भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में भारी सट्टेबाजी हो रही थी। निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार बजट में चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में बदलाव कर सकती है। इस उम्मीद में भारतीय चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से बहुत ऊपर निकल गई थीं। भारत में चांदी करीब $107 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमत $94 के आसपास थी। यह $13 का अंतर बहुत ज्यादा था। बदलाव की उम्मीदें टूटी: जैसे ही यह संकेत मिले कि बजट में ड्यूटी को लेकर कोई तत्काल राहत नहीं मिलने वाली है, वह 'एक्स्ट्रा प्रीमियम' खत्म होने लगा। इन्वेस्ट PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के मुताबिक, यह चांदी के फंडामेंटल में कोई गिरावट नहीं है, बल्कि भारत-विशिष्ट कीमतों में आई विकृति का ठीक होना है। ETF में बिकवाली का दबाव: सिल्वर ETF घरेलू कीमतों पर आधारित होते हैं। जब बड़े और छोटे निवेशकों ने मुनाफा वसूली के लिए एक साथ ETF यूनिट्स बेचना शुरू किया, तो इनके दाम MCX फ्यूचर के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से गिर गए। यह बाजार में कीमतों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू फिजिकल कीमतों के बराबर लाने की एक प्रक्रिया थी। अब निवेशकों को क्या करना चाहिए? भले ही कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है, लेकिन चांदी की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की तन्वी कंचन ने निवेशकों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं: इंडस्ट्रियल डिमांड है मजबूत: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी की रिकॉर्ड मांग बनी हुई है। यह गिरावट निवेश का एक मौका हो सकती है। एकमुश्त पैसा न लगाएं: चांदी में आई इस भारी तेजी के बाद एक साथ सारा पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। 'बाय ऑन डिप' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनाएं। अगले कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे खरीदें: अपने निवेश को अगले कुछ हफ्तों या महीनों में फैला दें। इससे आप और गिरावट की स्थिति में सुरक्षित रहेंगे। अब सिल्वर ETF के बारे में जानिए सिल्वर ETF क्या है? सिल्वर ETF यानी सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड। इसे समझने के लिए बस इतना जान लो कि ये एक ऐसा फंड है, जो चांदी की कीमतों पर आधारित है। आप इसमें पैसा लगाते हैं, और ये पैसा चांदी की कीमत के हिसाब से बढ़ता-घटता है। लेकिन इसमें आपको असली चांदी खरीदने की जरूरत नहीं। ना तिजोरी चाहिए, ना लॉकर। ये सब काम फंड हाउस करता है, और आप बस स्टॉक एक्सचेंज (जैसे NSE या BSE) पर इसे डीमेट अकाउंट के जरिए खरीद-बेच सकते हैं, जैसे कोई शेयर। ये काम कैसे करता है? सिल्वर ETF का फंड हाउस असली चांदी को खरीदता है, जो 99.9% शुद्ध होती है। अब तुम जो ETF खरीदते हो, उसकी कीमत चांदी के बाजार भाव पर चलती है। अगर चांदी की कीमत बढ़ी, तो आपका ETF भी चमक उठता है। और इसे बेचना भी आसान, बस स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग टाइम में बेच दो। सिल्वर ETF में निवेश करने के हैं कई फायदे कम मात्रा में भी खरीद सकते हैं चांदी: ETF के जरिए सिल्वर यूनिट्स में खरीदते हैं। इससे कम मात्रा में चांदी खरीदना आसान हो जाता है। सिल्वर ETF की 1 यूनिट की कीमत अभी 150 रुपए के करीब है। यानी आप 150 रुपए में इसमें निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। चांदी रहती है सुरक्षित: इलेक्ट्रॉनिक चांदी डीमैट अकाउंट में होती है जिसमें सिर्फ सालाना डीमैट चार्ज देना होता है। साथ ही चोरी होने का डर नहीं होता। वहीं फिजिकल चांदी में चोरी के खतरे के अलावा उसकी सुरक्षा पर भी खर्च करना होता है। व्यापार की आसानी: सिल्वर ETF को बिना किसी परेशानी के तुरंत खरीदा और बेचा जा सकता है। यानी पैसों की जरूरत पड़ने पर आप जब चाहे इसे बेच सकते हैं। इसमें कुछ जोखिम भी हैं कीमत का उतार-चढ़ाव: चांदी की कीमतें कभी-कभी बहुत तेजी से बदलती हैं। अगर बाजार में गिरावट आई, तो ETF का मूल्य भी गिरेगा। औद्योगिक मांग पर निर्भर: चांदी का इस्तेमाल गहनों के अलावा सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मेडिकल उपकरणों में होता है। अगर इन इंडस्ट्रीज में मांग घटी, तो चांदी की कीमत भी प्रभावित हो सकती है।
फिर टूटा भारत का सपना, Oscars 2026 की रेस से बाहर हुई ईशान खट्टर की Homebound, इस फिल्म ने रचा इतिहास
Homebound: भारतीयों की उम्मीदों को फिर झटका लगा। नीरज घायवान की फिल्म 'होमबाउंड' ऑस्कर 2026 की रेस से बाहर हो गई है। बेस्ट इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के नॉमिनेशन में यह फिल्म जगह नहीं बना पाई।
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