रेस्क्यू से रिस्पॉन्स तक और मजबूत होगी SDRF उत्तराखंड, ISO 9001 Certification की प्रक्रिया पूरी
देहरादून: बाढ़, भूस्खलन या फिर पहाड़ों में मुश्किल रेस्क्यू… आपदा के वक्त मोर्चा संभालने वाली SDRF उत्तराखंड ने ISO 9001 Certification की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके लिए जौलीग्रांट स्थित SDRF मुख्यालय में कामकाज से लेकर ट्रेनिंग, संसाधनों के इस्तेमाल और रेस्क्यू के तौर-तरीकों तक को तय मानकों पर परखा गया।
SDRF के मुताबिक, इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान काम करने का तरीका और व्यवस्थित होगा। ट्रेनिंग, रिकॉर्ड रखने, संसाधनों के इस्तेमाल और SOP को लेकर भी एक तय व्यवस्था पर काम किया जा सकेगा। SDRF उत्तराखंड आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ISO 9001 Certification हासिल करने वाली पहली एजेंसी बनने की ओर है।
14 जुलाई को BIS ने किया था ऑडिट
Certification की प्रक्रिया के तहत 14 जुलाई 2026 को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की टीम जौलीग्रांट स्थित SDRF मुख्यालय पहुंची थी। पूर्व वैज्ञानिक ‘G’ एवं BIS के पूर्व उप महानिदेशक विष्णु गुप्ता ने सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी की मौजूदगी में अलग-अलग शाखाओं का निरीक्षण किया।
टीम ने देखा कि SDRF में ट्रेनिंग कैसे होती है, रेस्क्यू के लिए SOP क्या हैं और संसाधनों का इस्तेमाल व रिकॉर्ड किस तरह संभाला जाता है। प्रशासनिक व्यवस्था और Quality Management को भी ऑडिट में शामिल किया गया। इसके बाद ISO 9001 Certification के लिए तय प्रक्रिया पूरी की गई।
रेस्क्यू के दौरान क्या बदलेगा?
ISO 9001 का असर SDRF के रोजमर्रा के काम से लेकर आपदा के दौरान होने वाले Rescue Operation तक दिखाई देगा। मकसद है कि अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली टीमों के पास स्पष्ट प्रक्रिया हो और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।
इसके साथ ट्रेनिंग और रेस्क्यू के दौरान सामने आने वाली कमियों को पहचानकर उनमें लगातार सुधार किया जा सकेगा। रिकॉर्ड और जिम्मेदारियां स्पष्ट होने से पूरी व्यवस्था को ट्रैक करना भी आसान होगा।
आधुनिक तकनीक और ट्रेनिंग पर भी फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू सेवाओं में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ ट्रेनिंग को बढ़ाया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के मार्गदर्शन में SDRF ने भी अपनी ट्रेनिंग और रेस्क्यू प्रक्रिया में बदलाव किए हैं।
SDRF सेनानायक अर्पण यदुवंशी के मुताबिक, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ ट्रेनिंग और तय प्रक्रियाओं के जरिए SDRF की आपदा से निपटने की क्षमता को लगातार बेहतर किया जा रहा है। ISO 9001 Certification की प्रक्रिया पूरी होना इसी काम का हिस्सा है।
उत्तराखंड के 1,860 गांवों तक पहुंची सड़क, अब 309 और गांव जुड़ेंगे, पहाड़ों में 21,915 KM का नेटवर्क तैयार
देहरादून। उत्तराखंड के दूरदराज पहाड़ी इलाकों में सड़क का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब तक 21,915 किलोमीटर लंबी 2,826 सड़कें बन चुकी हैं, जिनसे 1,860 गांव जुड़े हैं। अब 309 और गांवों तक सड़क पहुंचाने का काम शुरू हो गया है।
पहले तीन चरणों में बनी इन सड़कों पर 11,595 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अब चौथे चरण में उन गांवों को सड़क से जोड़ने की तैयारी है, जहां आज भी लोगों को आवाजाही में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
309 गांवों के लिए बन रहीं 184 सड़कें
PMGSY-4 के पहले चक्र में 1,228.20 किलोमीटर लंबी 184 सड़कें बनाई जा रही हैं। इन पर करीब 1,707 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन सड़कों से सबसे ज्यादा पौड़ी गढ़वाल के 68 गांव जुड़ेंगे। अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47, बागेश्वर के 35 और पिथौरागढ़ के 25 गांव भी इसमें शामिल हैं। नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24, चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 और हरिद्वार के 2 गांवों तक भी सड़क पहुंचेगी।
आगे सभी 13 जिलों तक बढ़ेगा नेटवर्क
पहले चक्र के 309 गांवों के बाद PMGSY-4 का काम प्रदेश के सभी 13 जिलों में आगे बढ़ेगा। चौथे चरण में कुल 9,344 किलोमीटर सड़कें बनाने की योजना है। सबसे ज्यादा 1,819.6 किलोमीटर सड़क पिथौरागढ़ में प्रस्तावित है। अल्मोड़ा में 1,395.5 किलोमीटर और पौड़ी में 1,227.8 किलोमीटर सड़कें बननी हैं। चमोली में 996.15 किलोमीटर और टिहरी में 941.5 किलोमीटर सड़क का प्लान है।
उत्तरकाशी में 721.99 किलोमीटर, बागेश्वर में 569.82 किलोमीटर, रुद्रप्रयाग में 469.2 किलोमीटर, नैनीताल में 399.55 किलोमीटर, देहरादून में 390 किलोमीटर और चंपावत में 387.3 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है। ऊधमसिंह नगर में 22.3 किलोमीटर और हरिद्वार में 3.1 किलोमीटर सड़क बनाई जानी है।
सड़क से आसान होगा गांव से शहर तक का सफर
नई सड़कों का सबसे सीधा असर दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों पर होगा। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों से लेकर इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों तक के लिए सफर आसान होगा। किसानों के लिए अपनी उपज बाजार तक पहुंचाना भी आसान होगा। वहीं सड़क पहुंचने से पहाड़ी इलाकों में पर्यटन, होमस्टे और स्थानीय कारोबार के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।
CM धामी ने केंद्र के सामने रखा उत्तराखंड का मामला
राज्य सरकार के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने PMGSY के चौथे चरण में उत्तराखंड के ज्यादा गांवों और सड़कों को शामिल करने का मामला केंद्र सरकार के सामने लगातार रखा। इसके बाद चौथे चरण के पहले चक्र में 309 गांवों के लिए सड़कों को मंजूरी मिली है।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि सड़क पहुंचने से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का सफर आसान हुआ है। इसके साथ खेती, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी इसका फायदा मिल रहा है।
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