Responsive Scrollable Menu

Mumbai में 21 घंटे की विसर्जन यात्रा के बाद समुद्र तट पहुंचे Lalbaugcha Raja

 विश्व प्रसिद्ध गणेशोत्सव के बाद लोगों ने अपने आराध्य देवता गणपति को विदाई दी और चिंचपोकलीचा चिंतामणि और लालबागचा राजा की प्रतिमाएं करीब 21 घंटे लंबी विसर्जन यात्रा के बाद शनिवार तड़के समुद्र तट पर पहुंचती दिखीं। शहरभर में गणपति विसर्जन यात्राएं शुक्रवार सुबह अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुरू हुई। 12 दिवसीय गणेश उत्सव के अंतिम दिन शुरू हुई ये यात्राएं पूरी रात जारी रहीं और इस दौरान हजारों श्रद्धालु गणपति की प्रतिमाओं के साथ नजर आए।

 बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, शनिवार सुबह छह बजे तक मुंबई में कुल 34,403 गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था। इनमें सार्वजनिक मंडलों में स्थापित की गईं 6,235 प्रतिमाएं, घरों में स्थापित की गईं 27,615 प्रतिमाएं और 553 गौरी प्रतिमाएं शामिल थीं। नगर निकाय के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘विसर्जन प्रक्रिया के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।’’ प्रसिद्ध चिंचपोकलीचा चिंतामणि प्रतिमा सुबह करीब साढ़े सात बजे गिरगांव चौपाटी पहुंची, जो मुंबई के प्रमुख विसर्जन स्थलों में से एक है। 

वहीं, लालबागचा राजा की प्रतिमा भीड़ से खचाखच भरी सड़कों से होते हुए समुद्र तट की ओर बढ़ रही थी। गणेशोत्सव इस वर्ष 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ था। प्रतिमाओं के सुरक्षित विसर्जन के लिए मुंबई पुलिस और बीएमसी ने व्यापक तैयारियां की हैं। 

अधिकारियों के अनुसार, शहर की सड़कों पर 24,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए, जबकि बीएमसी ने 25,000 कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया था। नगर निकाय ने 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों और 383 कृत्रिम तालाबों पर लाइफगार्ड, एंबुलेंस, मेडिकल टीम और क्रेन भी तैनात कीं, ताकि विसर्जन प्रक्रिया सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।

Continue reading on the app

बदरीनाथ धाम में लाउड म्यूजिक वाले कार्यक्रम पर Murli Manohar Joshi ने जताई आपत्ति

बदरीनाथ धाम में हाल ही में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान शोर-शराबे वाले संगीत और नाच-गाने के कार्यक्रम को लेकर उठ रहे विरोध के स्वरों को अब वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी का समर्थन भी मिल गया है। डॉ. जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बदरीनाथ धाम में शोर-शराबे वाले संगीत समारोह के आयोजन को अनुमति प्रदान करने को न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया बल्कि कहा कि यह धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी।

अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए भाजपा नेता ने कहा, ‘‘उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में परिणीत किया जा रहा है।’’ उन्होंने शंकराचार्यों तथा महात्माओं से संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी रूप से आवाज उठाने का अनुरोध किया तथा कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार से भी उनका आग्रह है कि वे ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाकर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें। उन्होंने कहा, हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास और मां गंगा का उद्गम है, इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।

पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के ताजा बयान के बाद इस महोत्सव को लेकर हो रहा विरोध फिर चर्चा में आ गया है। भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में बदरीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया था जिसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सीमांत क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यमिता और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।

हालांकि, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बताए गए उद्देश्यों की बजाय धाम की धार्मिक परपंराओं और मान्यताओं के विपरीत नाच गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम किए। धाम में स्थित अराइवल प्लाजा में हुए कार्यक्रमों की निंदा करते हुए महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा, ‘‘हमारा विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर नहीं बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। यहां बदरीनाथ की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्यक्रम होने चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम में शंख की ध्वनि की भी मनाही है, वहां तेज ध्वनि और संगीत का शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है।

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ ने भी इस आयोजन को परंपरा-विरुद्ध, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जतायी। शंकराचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य और मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहां ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम के नियम तय किये है। उन्होंने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में शंख बजाना तक वर्जित है, ताकि तपस्यारत भगवान नर-नारायण एवं साधकों की एकाग्रता में कोई विघ्न न पड़े।

लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से यहां का धार्मिक वातावरण बिगाड़ा जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि जहां ब्रह्मकमल जैसे अति संवेदनशील पुष्प को भी विशेष नियमों, पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रभु चरणों में अर्पित किया जाता है, वहां संगीत की तेज ध्वनि में नाच-गाने और फूहड़ता का सांस्कृतिक प्रदूषण कहां तक उचित है ? स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बदरीनाथ धाम एवं अन्य तीर्थ क्षेत्रों में संगीत कार्यक्रम, फूहड़ प्रदर्शन और शोर-शराबे वाले आयोजनों पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने और किसी बड़े आयोजन से पूर्व शंकराचार्य जी से परामर्श एवं मार्गदर्शन लेने की अनिवार्य व्यवस्था बनाए जाने का अनुरोध किया।

इस बीच, बढ़ते विवाद के बीच चमोली के जिला प्रशासन ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उसने सेना के स्थानीय अधिकारियों को बदरीनाथ धाम की धार्मिक आस्था, परंपराओं और पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए ही कार्यक्रम करने की सलाह दी थी। यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जिला प्रशासन ने कहा, ‘‘भारतीय सेना द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बदरीनाथ धाम स्थित ‘टूरिस्ट अराइवल प्लाजा’ में ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया। आयोजन के दौरान प्रस्तुत किए गए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों तथा उनके स्वरूप का चयन एवं निर्धारण सेना द्वारा किया गया था।

Continue reading on the app

  Sports

11 महीने पहले दो 0 ने विराट को झकझोर दिया, फिर 2 घंटे का सफर और शुरु हुआ 11 मैचों में गदर, सुल्तान का नया फरमान सुनो

two 0 changed virat: 11 महीने पहले की बात है जब विराट ऑट्रेलिया वनडे सीरीज खेलने पहुंचे और पहली दो पारियों को देखकर फैंस ने उम्मीद का दामन छोड़ दिया पर वो विराट ही थे जिसने वहां से एक ऐसा अध्याय लिखना शुरु किया जिसके हर पन्ने में अब इतिहास लिखा जा रहा है.  Mon, 28 Sep 2026 14:37:24 +0530

  Videos
See all

Breaking News: Mathura में BJP का चुनावी मंथन, Nitin Nabin चुनावी तैयारियों का लेंगे फीडबैक| CM Yogi #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-28T09:15:29+00:00

Punjab LPU Violence | Punjab से LPU में छात्रों के साथ मारपीट #ytshorts #shorts #hindinews #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-28T09:15:13+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers