ग्रीनलैंड में तनाव कम होने से बाजार को राहत, रुपए में सुधार की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड से जुड़े वैश्विक तनाव में कमी आने के संकेतों से बाजार की भावना को राहत मिली है। गुरुवार को जारी डीबीएस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे बाजार की धारणा बेहतर होगी और रुपए में उतार-चढ़ाव तो बना रहेगा, लेकिन उसकी गिरावट अब पहले की तरह तेज नहीं होगी।
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से संभलता दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 91.50 पर पहुंच गया।
डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, पिछले साल से चले आ रहे नकारात्मक रुझान को वैश्विक और घरेलू कारणों ने बढ़ा दिया था।
उन्होंने कहा, वैश्विक वीआईएक्स में तीव्र वृद्धि बाजार के सभी संकेतकों की कमजोरी को दर्शाती है, जिसे प्रतिकूल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल से और भी बल मिला है। ऐसे में ग्रीनलैंड से जुड़े तनाव में कमी आने के संकेत बाजार के लिए राहत लेकर आए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता जल्द पूरा हो सकता है, जिसकी घोषणा अगले हफ्ते होने की उम्मीद है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिससे बाजार में दोबारा उम्मीद जगी है।
देश के अंदर की स्थिति की बात करें तो रुपए पर दबाव ऐसे समय में आया है, जब आर्थिक विकास मजबूत दिखाई दे रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में औसत आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत रही है और आने वाले वित्त वर्ष के लिए इसके 7.5 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
कमजोर रुपया जहां ऊंचे आयात शुल्क से प्रभावित निर्यातकों को कुछ राहत देता है, वहीं दूसरी ओर इससे अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में असंतुलन भी पैदा हुआ है।
डीबीएस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देश का चालू खाता घाटा अभी काबू में है और यह जीडीपी के करीब 1.0 से 1.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। लेकिन, असली चिंता विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर है।
बैंक ने बताया कि वर्ष 2025 में शुद्ध पूंजी निकासी के बाद इस साल इक्विटी बाजारों से करीब 3 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जबकि बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि कमजोर बनी हुई है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति पिछले साल से बेहतर जरूर है, लेकिन विदेशी कंपनियों द्वारा मुनाफा वापस ले जाने के कारण कुल निवेश के मुकाबले इसमें अभी भी अंतर बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आने वाले केंद्रीय बजट में सरकारी खर्च का असर साफ दिखाई देगा, क्योंकि वित्त वर्ष 2027 में केंद्र और राज्यों का कुल उधार बढ़ने की संभावना है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'एआई नहीं छीनेगा नौकरियां, इंसानों की करेगा मदद', डब्ल्यूईएफ 2026 में एक्सपर्ट्स का दावा
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 में शामिल तकनीकी कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंसानों की नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा। एआई कई कामों को अपने आप कर सकता है, लेकिन यह पूरी नौकरी की जगह नहीं ले सकता।
वर्करा के संस्थापक और सीईओ कियान कटानफोरूश ने कहा कि एआई को लेकर भाषा का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। वे एआई को सहकर्मी कहने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि एआई कुछ खास काम तो अच्छी तरह कर सकती है, लेकिन इंसानों की तरह पूरी नौकरी नहीं कर सकती।
उन्होंने बताया कि इंसान एक साथ सैकड़ों तरह के काम करते हैं, जबकि एआई केवल तय किए गए काम ही कर पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक यह अनुमान गलत साबित हुआ है कि एआई बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां खत्म कर देगा।
हिप्पोक्रेटिक एआई के सह-संस्थापक और सीईओ मुंजाल शाह ने भी कहा कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि बड़े स्तर पर कर्मचारियों की मदद करेगा। उन्होंने भविष्य की कल्पना करते हुए कहा कि दुनिया में 8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम होंगे, जो नए कामों को आसान बनाएंगे।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक एआई सिस्टम ने गर्मी की लहर के दौरान हजारों लोगों को फोन करके उन्हें ठंडी जगहों पर जाने की सलाह दी और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सिस्टम को सही ढंग से लागू करने के लिए कड़े परीक्षण की आवश्यकता होती है। हमारे पास ऐसे मॉडल हैं जो अन्य मॉडल्स की जांच करते हैं और फिर वे मॉडल भी उन्हीं मॉडल्स की जांच करते हैं।
अमिनी की संस्थापक और सीईओ केट कैलॉट ने कहा कि एआई अभी भी सिर्फ एक उपकरण है। यह अपने आप सही और गलत का फैसला नहीं कर सकता, क्योंकि इसमें इंसानों जैसी सोच और मूल्य समझने की क्षमता नहीं है।
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के सीईओ क्रिस्टोफ श्वाइजर ने कहा कि एआई के साथ काम करने का अनुभव कभी-कभी किसी सहकर्मी के साथ काम करने जैसा लगता है। किसी कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने काम करने के तरीके को कितना बदलती है, न कि सिर्फ नई तकनीक अपनाने पर।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई को एक बड़ी प्रबंधन जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे सिर्फ तकनीकी टीम पर नहीं छोड़ा जा सकता।
एचपी कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ एनरिक लोरस ने कहा कि एआई का इस्तेमाल संतुलन के साथ होना चाहिए। एचपी के कॉल सेंटरों में कभी-कभी एआई गलत जवाब देता है, लेकिन कुल मिलाकर इसकी सटीकता पहले से बेहतर हुई है और ग्राहकों की संतुष्टि भी बढ़ी है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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