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छत्तीसगढ़ की स्टील फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 6 मजदूरों की मौत की आशंका, 10 से अधिक घायल

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से एक भीषण औद्योगिक हादसे की खबर सामने आई है। यहाँ एक स्टील फैक्ट्री की चालू यूनिट में हुए जोरदार धमाके में कम से कम 6 श्रमिकों की मौत की आशंका है, जबकि 10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और राज्य में औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 

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कोयला भट्टी में अचानक धमाका हुआ

यह धमाका बकुलाही स्थित रियल इस्पात स्टील प्लांट में हुआ, जब एक कोयला भट्टी में अचानक धमाका हो गया और घटना के समय मजदूरों का एक ग्रुप भट्टी के आसपास सफाई का काम कर रहा था।

घायल मजदूरों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया

मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाके के बाद गर्म कोयले और आग की लपटों के सीधे संपर्क में आने से पीड़ितों को जानलेवा जलने की चोटें आईं। धमाके के तुरंत बाद घायल मजदूरों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया, हालांकि घायलों की सही संख्या की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
 

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प्लांट मैनेजमेंट ने अभी तक धमाके के कारण या घायल मजदूरों की हालत के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। इसके अलावा, अधिकारी प्लांट में सेफ्टी प्रोटोकॉल और उन परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं जिनके कारण भट्टी में धमाका हुआ।

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मध्यप्रदेश भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बसंत पंचमी पर हिंदू करेंगे पूजा, मुस्लिम पढ़ेंगे नमाज

मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी का स्मारक 'भोजशाला' एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और अदालती कार्यवाहियों ने इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़े विवाद को देश के सबसे चर्चित धार्मिक विवादों में से एक बना दिया है सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर में हिंदुओं और मुसलमानों को प्रार्थना करने की इजाज़त दे दी है।
 

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हिंदू समुदाय के सदस्यों को हिंदू त्योहार बसंत पंचमी पर, जो इस साल शुक्रवार को पड़ रहा है, सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की इजाज़त दी गई है, जबकि मुसलमान दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक अपनी शुक्रवार की नमाज़ पढ़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नमाज़ के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या ज़िला प्रशासन को बतानी होगी। कोर्ट ने ज़िला प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के इंतज़ाम करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट हिंदू संगठन, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा करने का विशेष अधिकार देने की मांग की गई थी।
 

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HFJ की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने 2 जनवरी को यह अर्जी दाखिल की थी और इसे कोर्ट के सामने अर्जेंट तौर पर पेश किया गया था। अर्जी में कहा गया है कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के 2003 के आदेश में ऐसी स्थितियों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है जब बसंत पंचमी शुक्रवार की नमाज़ के दिन पड़ती है। उन्होंने 23 जनवरी को पूरे दिन हिंदुओं के लिए खास, बिना किसी रुकावट के पूजा के अधिकार की मांग की।

2003 के ASI के आदेश के अनुसार, मुसलमानों को उस जगह पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है, जबकि हिंदुओं को बसंत पंचमी पर पारंपरिक पूजा करने की इजाज़त है और हर मंगलवार को उन्हें खास एक्सेस दिया जाता है। हालांकि, इसमें उन सालों के लिए कोई व्यवस्था नहीं बताई गई है जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है।

क्यों अहम है यह विवाद?

भोजशाला का मामला अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद की तरह ही धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा है। हिंदू पक्ष की मांग है कि उन्हें यहाँ प्रतिदिन पूजा का अधिकार मिले और सरस्वती प्रतिमा (जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है) को वापस लाया जाए। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि 1991 के 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट' के तहत इस स्थल की यथास्थिति नहीं बदली जा सकती।


राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

मध्यप्रदेश की राजनीति में भोजशाला हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। बसंत पंचमी के अवसर पर, जब यह शुक्रवार को पड़ती है, तो यहाँ स्थिति और भी तनावपूर्ण हो जाती है क्योंकि दोनों समुदायों के धार्मिक समय आपस में टकराते हैं।


क्या है भोजशाला का इतिहास?

हिंदू पक्ष के अनुसार, यह राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है, जो शिक्षा और कला का एक बड़ा केंद्र था। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है। उनका दावा है कि यहाँ सदियों से नमाज अदा की जा रही है और यह एक प्राचीन इस्लामी स्थल है।

विवाद का मुख्य कारण और वर्तमान व्यवस्था

इस स्थल के स्वामित्व को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एएसआई (ASI) ने 2003 में एक विशेष व्यवस्था लागू की थी, जो आज भी प्रभावी है:

मंगलवार: हिंदू समुदाय को पूरे दिन पूजा करने की अनुमति है।
शुक्रवार: मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति है।

अन्य दिन: यह स्मारक पर्यटकों के लिए खुला रहता है और इसके लिए प्रवेश शुल्क देना होता है।

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