सीरिया से इराक लाए गए 150 आईएस कैदी
बगदाद, 22 जनवरी (आईएएनएस)। इराक ने पहली बार सीरिया की जेलों में बंद इस्लामिक स्टेट (आईएस) के 150 कैदियों को अपने देश में स्वीकार किया है। इराकी अधिकारियों ने बुधवार (स्थानीय समय) को इसकी पुष्टि की।
इन कैदियों में इराकी नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिन पर इराकी आम लोगों की हत्या में गहरी भूमिका निभाने के आरोप हैं।
इराकी सेना के कमांडर-इन-चीफ के प्रवक्ता सबाह अल-नुमान के बयान के मुताबिक ये कैदी पहले सीरिया के हसाका क्षेत्र में उन जेलों में बंद थे, जो सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के नियंत्रण में हैं। अंतरराष्ट्रीय गठबंधन (जो आईएस के खिलाफ लड़ाई में जुटा है) के साथ समन्वय के बाद इन कैदियों को इराक को सौंपा गया।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी कैदियों को इराक के आधिकारिक सरकारी सुधार गृहों (करैक्शनल इंस्टीट्यूशंस) में भेजा जाएगा। साथ ही यह भी साफ किया गया कि आगे कितने और कैदियों को कब लाया जाएगा, यह सुरक्षा हालात और आकलन पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन कैदियों को सीरिया के हसाका स्थित एक हिरासत केंद्र से इराक के एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। यह प्रक्रिया एक व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत भविष्य में करीब 7,000 आईएस कैदियों को इराक के नियंत्रण वाली जेलों में लाया जा सकता है।
सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि इस तरह का सुरक्षित और व्यवस्थित स्थानांतरण बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह की जेल से भागने की घटना को रोका जा सके, जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन सकती है।
पिछले एक साल में अमेरिका और उसके साझेदार बलों ने सीरिया में 300 से ज्यादा आईएस सदस्यों को गिरफ्तार किया है और 20 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर काउंटर-टेररिज्म थिंक टैंक के एसोसिएट फेलो एड्रियन श्टुनी के अनुसार, 2025 तक, यानी आईएस की स्थापना के करीब 21 साल बाद, इराक और सीरिया में संगठन की क्षेत्रीय पकड़ काफी कमजोर हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि अपने चरम पर आईएस के पास करीब 80,000 लड़ाके थे, जिनमें 120 से ज्यादा देशों के 42,000 से अधिक विदेशी आतंकवादी शामिल थे। इसके मुकाबले, 2025 के मध्य तक सीरिया और इराक में सक्रिय लड़ाकों की संख्या सिर्फ 1,500 से 3,000 के बीच आंकी जा रही है। हालांकि, यह भी चेताया गया है कि वैश्विक स्तर पर आईएस का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
--आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की होगी विशेष पूजा, साधना से मिलती है सिद्धि, जानें देवी के बारे में
Gupt Navratri 2026: आज गुरुवार के दिन 22 जनवरी, 2026 को गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है. आज के दिन पर दस महाविद्याओं की चौथी देवी, मां भुवनेश्वरी की पूजा का विधान है. बता दें कि माघ महीने की गुप्त नवरात्रि साल की प्रथम नवरात्रि होती है, जिसका महत्व कहीं अधिक होता है. चलिए जानते हैं आज के दिन और आज की देवी के बारे में विस्तार से.
गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन का महत्व
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए होता है. इस दिन ध्यान और मंत्र साधना के माध्यम से हृदय चक्र को सक्रिय किया जाता है. माता भुवनेश्वरी की कृपा से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है.
कौन हैं देवी भुवनेश्वरी?
देवी भुवनेश्वरी 10 महाविद्याओं के चौथे स्थान पर विराजमान हैं. इन्हें ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी कहते हैं, जो पराशक्ति का दिव्य स्वरूप है. ये संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति और संचालन की शक्ति मानी जाती हैं. इन्हें सभी लोकों और ऐश्वर्य पर नियंत्रण रखना होता है.
मां भुवनेश्वरी की उपासना से साधक को मानसिक शांति, वैभव और आत्मिक चेतना मिलती है. इनका स्वरूप आकाश जैसा विशाल और दिव्य प्रकाश से युक्त माना जाता है. भुवनेश्वरी देवी अपने हाथों में चंद्रमा, पाश और अंकुश धारण करती हैं. माता अभय और वरद मुद्रा से जनमानस को संरक्षण और आशीर्वाद देती हैं.
देवी भुवनेश्वरी की साधना करने के फल
अगर हम माता भुवनेश्वरी की पूजा करते हैं तो आपकी मानसिक स्थिति में सुधार होता है. जातक में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है. ऐश्वर्य और सम्मान प्राप्त होता है. साधक को भय, भ्रम और अस्थिरता से मुक्ति मिलती है. ये लोग अपने जीवन में संतुलन पाते हैं और स्पष्टता लाने में सहायता करते हैं.
दुर्गमासुर का वध
पौराणिक कथाओं की मानें तो दुर्गम नामक राक्षस का संहार किया था. इस राक्षस के अत्याचारों ने पृथ्वी पर हाहाकार मचा दिया था. इसके बाद देवता और पंडित काफी चिंतित हो गए और उन्होंने हिमालय में कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां प्रकट हुई और उनके नेत्रों से निकली जलधाराओं से पृथ्वी पर भी जल का संचार हुआ. उन्होंने औषधियों का भी विकास किया. इसके बाद माता ने दुर्गमासुर का वध किया. इन्हें शताक्षी और शाकंभरी भी कहते हैं.
मां भुवनेश्वरी के विशेष मंत्र
मूल मंत्र- ऊं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नम:.
पंचाक्षर मंत्र- ऊं श्रीं ऐं क्लीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः.
दरिद्रता नाशक मंत्र- हूं हूं ह्रीं ह्रीं दारिद्रय नाशिनी भुवनेश्वरी ह्रीं ह्रीं हूं हूं फट्.
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