जमुई कांडः 'बेटी लेट आई,खुद को कमरे बंद कर लिया':मां बोली- उसकी आंखों में अभी भी इतनी दहशत, बाहर निकलने से डरती है
जमुई में सरेआम 10वीं छात्रा से हुई बदसलूकी और छेड़खानी के बाद पीड़िता की मां ने कहा- दोषियों को ऐसी सजा होनी चाहिए, जिससे दूसरे लोग ऐसा कुछ भी करने से डरें। पीड़िता के माता-पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। जिसमें 19 सितंबर की शाम हुई घटना को लेकर उन्होंने कई खुलासे किए। मां ने बताया कि बेटी घर आई और सो गई। सुबह देर से उठी, रात तक कुछ नहीं बोला। सुबह इलाके में चर्चा थी, लेकिन उस वक्त तक हमें कोई जानकारी नहीं थी। घटना को लेकर मां-पिता ने क्या-क्या बताया, कैसे घटी पूरी घटना पढ़िए… मां बोली- बेटी देर से आई, गुमसुम थी मां ने भास्कर को बताया, 'बेटी रात 9 बजे घर आई थी। रोजाना से थोड़ी लेट थी, लेकिन उसे परेशान और थका हुआ देखकर मैंने उस वक्त कोई सवाल नहीं किया। वह सीधे कमरे में गई, रूम बंद किया, चेंज करके लेट गई। मैंने थोड़ी देर बाद उसे खाना खाने के लिए बुलाया, तो वो आई। बेमन से थोड़ा सा खाना खाया। खाते वक्त भी उसने कुछ नहीं कहा। मैंने पूछा कि कोई बात है क्या? इस पर उसने नॉर्मल जवाब दिया और कहा- सब ठीक है। खाना खाने के बाद वह कमरे में जाकर सो गई। अगले दिन देर तक सोती रही। रविवार का दिन था, इसलिए मैंने उसे नहीं उठाया। आखिर में जब ज्यादा देर हुई तो मैंने उसे 10 बजे नाश्ते के लिए उठाया। उठने के बाद वह नाश्ता करके वापस कमरे में चली गई। कोई बातचीत नहीं की।' ‘उसे परेशान देखकर ज्यादा सवाल नहीं किया’ 'अक्सर पहले भी वह शांत-शांत सी रही है, तो मैंने ज्यादा सवाल नहीं किया। मैं उसे परेशान नहीं करना चाहती थी। थोड़ी देर बाद यानी दोपहर में जब देखा तो वह कॉपी पर कुछ लिख रही थी। मैंने सोचा कि पढ़ाई कर रही है। यह सोचकर वापस चली आई। शाम तक ऐसा ही रहा। ‘20 सितंबर की शाम मुझे घटना की जानकारी मिली’ 'मैंने सीधे कुछ नहीं पूछा। मैंने सोचा कि पहले उसके पिता को बताऊं, इसके बाद दोनों मिलकर बेटी से बात करेंगे। पिता जब घर आए, तो मैंने उन्हें वायरल वीडियो के बारे में बताया। अब तक यह वीडियो सिर्फ जमुई जिले और आसपास में ही था। पिता के घर आने के बाद मैंने बेटी को बुलाया। हम दोनों साथ में बैठे और उसे अपने पास बुलाया। हमारे पास आते ही वह रोने लगी। घबरा रही थी। मैंने कहा- क्या हुआ? क्यों डर रही हो? कुछ बात है क्या? अगर बात है भी तो डरो मत, हम हैं न साथ। बताओ क्या हुआ। हम दोनों ने उसे काफी भरोसे में लिया। फिर उसने पूरी घटना सुनाई। 20 सितंबर की शाम मुझे आसपास के लोगों से पहले ही घटना की जानकारी मिल गई थी।' अब पढ़िए, बेटी ने मां को क्या बताया हम वहां गलती से पहुंचे थे। रास्ते से गुजरते समय लोकेशन हमें अच्छी लगी, इसलिए हमलोग वहां थोड़ी देर टाइम स्पेंड करने लगे। हमें नहीं पता था कि जगह इतनी खराब होगी। गांव के लोग थे। महिलाएं भी आसपास थीं, काम कर रही थीं, ज्यादा डरने जैसी कोई बात नहीं थी। हम दोनों पहाड़ पर जाकर बैठे ही थे कि तभी कुछ लड़के वहां आ गए। वे लोग हमें देखकर हंस रहे थे। हमने ज्यादा कुछ नहीं सोचा। हम अपनी बातों में लग गए। थोड़ी देर बाद हमारी नजर उन लड़कों पर गई तो वहां अब ज्यादा संख्या में थे। महिलाएं जो काम कर रही थीं, वो उस जगह से जा चुकी थीं। शाम ढल रहा था, सन्नाटा होने जैसा था। मैंने कहा, चलना चाहिए। फिर हमने सनसेट के फोटो लेने की कोशिश की, लेकिन माहौल खराब होता देख हमने सब कैंसिल कर दिया। इतने में कुछ बड़े लड़के वहां पहुंच गए थे। वो सीधे पहाड़ी की तरफ आ रहे थे। आते ही हमसे नाम पूछा, कहां के रहने वाले? सब कुछ पूछा। हमने उनको बताया भी। इसके बाद वो पहाड़ी से खींचकर नीचे ले जाने लगे। हमारी स्कूटी सड़क किनारे खड़ी थी। हम वहां तक पहुंच नहीं पा रहे थे, सब हमें घेरकर रखे थे। वो सभी पहले-पहले मेरे दोस्त से बात कर रहे थे। इतने में एक मेरे पास आ गया। मैं डर गई और उसे दूर हटने को कहा। इसके बाद तो और माहौल बिगड़ गया। मेरे दोस्त को लड़कों ने मारा। मैं कुछ बोलती थी तो मेरे ऊपर भी हाथ चला रहे थे। एक से बात करती, तो दूसरा पीछे से हाथ टच करता। पीछे से मुड़ती तो आगे वाले टच शुरू कर देते। मैं अपने दोस्त को लड़कों से छुड़ाकर भाग ही रही थी, इतने में एक व्यक्ति आया और मुझे घसीटते हुए उठा लिया। कौन वीडियो बना रहा था, कौन क्या-क्या कह रहा था, मुझे कुछ नहीं पता। बस इतना पता था, वे लोग हमारी शादी कराना चाहते थे और मैं उनसे इतना ही कह रही थी, हमें जाने दीजिए। हम लगातार उनसे गुहार लगाते रहे, भैया हम यहां फिर कभी नहीं आएंगे, हमें जाने दीजिए। हमने उनको कहा भी, हम दोस्त हैं, साथ में पढ़ते हैं। हम यहां से जा रहे थे, जगह अच्छी लगी तो थोड़ी देर रुक गए। आपलोगों को अच्छा नहीं लगा तो हम चले जाते हैं। प्लीज हमें जाने दीजिए… जो वायरल वीडियो था, उसमें क्या क्या दिखा.. पढ़िए... “शादी कराओ, शादी कराओ, इसको मंदिर लेकर चलो।” चारों ओर भीड़ थी। टॉर्च लाइटें जल रही थीं, जिसमें सबके चेहरे सिर्फ दिख रहे थे। कोई भी व्यक्ति पूरे कपड़े में नहीं था। कोई लूंगी तो कोई हाफ ड्रेस में था। मिट्टी से सने, हट्ठे-कट्ठे युवक थे। आसपास अंधेरा था। शाम ढलने के कारण पूरा इलाका सुनसान था। चारों से से शादी कराओ, शादी कराओ, आवाज आ रही थी। इसी दौरान लड़की कहती है- "सॉरी भैया, प्लीज-प्लीज। हमलोग ऐसा नहीं हैं। हम एक ही स्कूल के, एक ही क्लास में पढ़ते हैं। हम यहां घूमने आए थे। हम बेस्ट फ्रेंड हैं इसके। बेस्ट फ्रेंड मतलब शादी नहीं होता है।" लड़की कहती है- "आज के बाद से कभी नहीं आएंगे। प्लीज भैया, जाने दीजिए... प्लीज-प्लीज..." लड़की तेज आवाज में "प्लीज" कहती है। इसके बाद भीड़ में से आवाज आती है- "चिल्लेवही गे... चिल्लेवही..." यानी, "चिल्लाएगी तुम।" इसके बाद लड़की के प्राइवेट पार्ट पर थप्पड़ मारा जाता है। उधर से दो लड़के कहते हैं- "आईडी दिखाओ।" लड़का पूछता है- "आईडी कहां?" इसके बाद लड़का अपनी आईडी दिखाता है। मां ने आगे और क्या बताया “घटना के समय मेरी बेटी के साथ जो लड़का था, वह बहुत अच्छा लड़का है। उसने मेरी बेटी का साथ नहीं छोड़ा। उसके सामने इतने लड़के आकर खड़े हो गए थे, फिर भी उसने इस परिस्थिति में मेरी बेटी का साथ छोड़कर भागने की कोशिश नहीं की। इसके लिए मैं बहुत खुश हूं। इतना ही नहीं, मेरी बेटी ने भी उसका बहुत अच्छे से साथ निभाया। दोनों बच्चे बहुत समझदार हैं।” ‘अभी भी बाहर जाने से डरती है’ 'मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जब हमारी मुलाकात हुई तो उन्होंने हमसे एक बच्ची के माता-पिता की तरह मुलाकात की। उन्होंने मेरी बेटी से कहा कि वह बहुत बहादुर बच्ची है। उन्होंने भरोसा दिया कि पढ़ाई या सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की जरूरत हो तो वह बेहिचक उनसे मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जब भी जरूरत होगी, वह मेरी बेटी की मदद के लिए तैयार रहेंगे। जमुई पुलिस और प्रशासन ने हमारा पूरा साथ दिया। पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई की। प्रशासन की तरफ से भी मुझे किसी तरह की कमी महसूस नहीं हुई। पुलिस लगातार सक्रिय रही और हमारा साथ दिया। वो अभी भी इतनी डरी हुई है कि ज्यादा बात नहीं करती, ठीक से खाती नहीं है। कहीं बाहर जाने के नाम से घबराने लगती है।' पिता बोले- सीएम ने बेटी को हिम्मत दी छात्रा के पिता ने कहा, 'सम्राट चौधरी ने मेरी बच्ची से कहा कि अभी तक तुम जिस तरह से खुलकर जीती आ रही हो, वैसे ही आगे भी जीना। किसी से डरने की जरूरत नहीं है। इसी हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहना है। सीएम ने हमें भी आश्वासन दिया कि राज्य में उनकी बेटी को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर सरकार उनकी मदद करेगी। जमुई पुलिस और प्रशासन ने मामले में अच्छा काम किया है। डीएम समेत पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से मैं संतुष्ट हूं। ‘समाज को जागरूक और एकजुट होना होगा’ सिर्फ पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से ही ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी, बल्कि समाज के लोगों को भी जागरूक होना होगा। किसी बेटी के साथ ऐसी घटना होने पर लोगों को चुप रहने के बजाय एकजुट होकर उसका साथ देना चाहिए।” अब जानिए क्या है जमुई बैड टच कांड 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। पुलिस के मुताबिक दोनों नदी किनारे झाड़ियों में छिपे मिले; हरेराम को पकड़ने के दौरान वह घायल हुआ, जबकि नंदन के पुलिस पर गोली चलाने के बाद जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हुआ। फिलहाल, नंदन का अस्पताल में इलाज चल रही है। वहीं, हरेराम को पुलिस ने 23 सितंबर को कोट में पेश कर 14 दिन के न्यायिक हिरासत के लिए भेज दिया है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, जिनमें एक बालिग को जेल और नाबालिगों को बाल न्याय बोर्ड के समक्ष भेजा गया है। वहीं, वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी साइबर कार्रवाई की जा रही है। ------ इसे भी पढ़िए.. बेटे की गलती पर सजा दें,जान न लें-नंदन की मां:जमुई कांड के बाद नंदन-हरेराम के गांव पहुंची भास्कर; भाभी का सवाल- पकड़कर गोली क्यों मारी? “मेरे बेटे ने गलती की है तो कानून के मुताबिक सजा दें, मुझे मंजूर है। उसे जेल में रखें, लेकिन उसकी जान नहीं जानी चाहिए। ” ये कहना है जमुई छेड़खानी के मुख्य आरोपी नंदन यादव की मां का। वो अपने बेटे से एक बार मिलना चाह रही है, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपने बेटे से न मिलने दे रही है, न ही उसकी तस्वीर दिखा रही है। पूरी खबर पढ़ें।
प्रेमानंदजी का शिष्य चौथी मंजिल से कूदा, मौत:2 साल पहले दीक्षा ली थी, परिवार का आरोप- मिलने नहीं दिया जाता था
मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के 25 साल के शिष्य ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी। शुरुआती जांच में पता चला है कि गुरुवार सुबह रसिक दुलारी शरण चौथी मंजिल पर गए। कुछ देर वहां बैठे और फिर छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। कमरे से ग्राइंडर मिला है। उस पर खून के निशान लगे हैं। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था। आशंका है कि रसिक दुलारी ने खुद को इससे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। सीओ संदीप सिंह ने कहा- जांच में एक CCTV मिला है, इसमें रसिक दुलारी शरण बिल्डिंग से कूदते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने सुसाइड क्यों किया। इसकी जांच की जा रही है। मामला वाराह घाट इलाके की 4 मंजिला गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग का है। यह बिल्डिंग प्रेमानंद महाराज के ट्रस्ट केली कुंज की है। इसमें प्रेमानंदजी के आश्रम से जुड़े 50 से ज्यादा शिष्य और सेवादार रहते हैं। यह बिल्डिंग प्रेमानंद के पुराने केली गुंज आश्रम से 500 मीटर दूर है। घटना शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे हुई। पुलिस का कहना है कि आधे घंटे तक वह वहीं पड़े रहे। बाद में नजर पड़ी तो प्रेमानंद के शिष्य उन्हें अस्पताल ले गए। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पुलिस को सूचना दी गई। SP सिटी राजीव कुमार ने बताया- परिवार ने थाने में शिकायत दी है। आरोप लगाया है कि उन्हें रसिक से मिलने नहीं दिया जाता था। हालांकि, उनके आरोपों की जांच की जा रही है। 2 तस्वीरें देखिए… मां-बहन फूट-फूटकर रोईं, बहनोई बोला- मिलने नहीं दिया जाता था पोस्टमॉर्टम हाउस में शव देखकर रसिक की मां लौंग बाई और बहन फूट-फूटकर रोईं। परिवार वालों ने उन्हें संभाला। रसिक के बहनोई सोनू पटेल ने दैनिक भास्कर को बताया- हादसे के बाद मेरे पास आश्रम से फोन आया। बताया गया कि रसिक छत से गिर गए हैं। डॉक्टर ऑपरेशन के लिए बोल रहे थे। इसके बाद हम रात में ट्रेन से आए और फोन किया। तब हमसे कहा गया कि अस्पताल नहीं जाना है, सीधे आश्रम आ जाओ। हम लोग शाम 5 बजे आश्रम पहुंचे। हमें बैठाकर रखा गया। रात 9 बज गए, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं कराई गई। क्या लगता है कि वह खुद गिरे हैं या किसी ने मारा है? इस सवाल पर सोनू ने कहा- इस बारे में हम कुछ नहीं बोल सकते। अभी हमें भी ठीक से कुछ पता नहीं है। जब आप लोग यहां आते थे, तब मुलाकात होती थी? जवाब में सोनू ने कहा- नहीं होती थी। जब से उन्होंने दीक्षा ली, तब से मिलने नहीं देते थे। कहते थे कि एक-दो घंटे रुको। दिनभर बैठाकर रखते थे। मुलाकात नहीं होती थी। 2 साल पहले प्रेमानंदजी से दीक्षा ली, नाम बदल लिया रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। वह 2 साल पहले वृंदावन आए और प्रेमानंदजी से दीक्षा ली। इसके बाद अपना नाम दीपक लोधी से बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया। दीपक 2 भाई और एक बहन है। सबसे बड़ी बहन और फिर दीपक थे। सबसे छोटे भाई मनीष हैं। उनकी मां लौंग बाई एक साल पहले वृंदावन आई थीं। वह दूसरी जगह 5 दिन रहीं, इस दौरान दीपक उनसे मिलते रहते थे। बताया जा रहा है कि वह 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके थे। बिजली का काम करते थे, 3 महीने पहले बिल्डिंग में कमरा मिला था रसिक दुलारी बिजली का काम जानते थे, इसलिए आश्रम में उन्हें इसी सेवा से जोड़ा गया था। 3 महीने पहले रसिक दुलारी को गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल पर रहने के लिए कमरा दिया गया था। मोबाइल की जांच कर रही पुलिस सीओ संदीप सिंह ने बताया- अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। कमरे से कुछ संदिग्ध सामान मिला है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले रसिक दुलारी की किससे बातचीत हुई थी और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। इसके लिए मोबाइल डेटा की जांच की जा रही है। अनसुलझे सवाल, आखिर क्यों सुसाइड किया? 18 मई से नए आश्रम में रह रहे प्रेमानंदजी संत प्रेमानंद महाराज पहले केली कुंज आश्रम में रहते थे, लेकिन 18 मई को केली कुंज छोड़ दिया। तब से यमुना विहार कुंज आश्रम में रहते हैं। यह आश्रम केली कुंज से यमुना के रास्ते 3 किलोमीटर और सड़क मार्ग से 18 किलोमीटर दूर है। महाराजजी राधा अष्टमी पर केली कुंज आश्रम आए थे। उन्होंने राधा रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया और दोपहर तक रहे। इसके बाद नए आश्रम चले गए। तब से वह केली कुंज नहीं आए। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- कानपुर कारोबारी हत्याकांड, मां ने कहा था- इनका कुछ करो:अय्याशी से परेशान बेटे ने हत्या कराई; अब करोड़ों का व्यापार कौन संभालेगा? करोड़पति परिवार। परिवार में कलह और अविश्वास। पिता-बेटे के बीच बढ़ती दूरी। यह कहानी कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड से जुड़ी है। पुलिस की जांच में परिवार के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान की कई परतें सामने आई हैं। पढ़ें पूरी खबर
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