IND vs NZ: न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 फॉर्मेट में 2 भारतीय बल्लेबाजों ने लगाए हैं शतक, क्या उनके नाम जानते हैं आप?
IND vs NZ: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 5 मैचों की टी-20 सीरीज खेली जाने वाली है. सीरीज का पहला मैच 21 जनवरी, बुधवार को नागपुर में खेला जाने वाला है. ये सीरीज अपकमिंग टी-20 वर्ल्ड कप के लिहाज से काफी अहम होने वाली है, इसलिए सभी खिलाड़ी अपने बेस्ट फॉर्म को हासिल करना चाहेंगे. इस बीच क्रिकेट के गलियारों में इस वक्त भारत-न्यूजीलैंड टी-20 सीरीज की चर्चा हो रही है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको उन 2 बल्लेबाजों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने इस फॉर्मेट में कीवी टीम के खिलाफ शतक लगाने का कारनामा किया है.
NZ के खिलाफ शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज कौन से हैं?
21 जनवरी, बुधवार को भारत-न्यूजीलैंड के बीच खेली जाने वाली टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा. इस मैच से पहले उन 2 बल्लेबाजों के बारे में जान लेते हैं, जिन्होंने कीवी टीम के खिलाफ इस फॉर्मेट में सेंचुरी बनाई हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 फॉर्मेट में शतक लगाने वाले बल्लेबाज कोई और नहीं बल्कि कप्तान सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल हैं.
????️????️ Ishan Kishan will play at no.3
— BCCI (@BCCI) January 20, 2026
Captain @surya_14kumar on the inclusion of @ishankishan51 in #TeamIndia's Playing XI in the 1⃣st T20I against New Zealand. #INDvNZ | @IDFCFIRSTBank pic.twitter.com/sZ3AB7RKVH
जी हां, सूर्या का ये शतक 2022 में न्यूजीलैंड दौरे पर ही आया था. तब उन्होंने 111 रनों की नाबाद पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. शुभमन गिल ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 फॉर्मेट में शतक लगाया था. गिल ने उस मैच में 126 रनों की नाबाद मैच जिताऊ पारी खेली थी.
न्यूजीलैंड के खिलाफ सूर्या और गिल के आंकड़े हैं ऐसे
इस लिस्ट में चौथे नंबर पर सूर्यकुमार यादव का नाम आता है. सूर्या ने 2021 से 2023 तक कीवी टीम के खिलाफ 8 मुकाबले खेले, जिसकी 8 पारियों में उन्होंने 47.33 के औसत और 153.51 की स्ट्राइक रेट से 284 रन बनाए. वहीं, शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 टी-20 मैच खेले हैं, जिसमें 144 रन बनाए हैं.
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केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ी, सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी मदद
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई सेक्टर को लेकर दो अहम फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट ने एक तरफ अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, वहीं दूसरी ओर सिडबी यानी स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (एसआईडीबीआई) को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने का भी फैसला किया है। इन दोनों कदमों का मकसद देश के कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा देना और छोटे उद्योगों तक सस्ता लोन पहुंचाना है।
कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने के साथ-साथ इसके प्रचार, जागरूकता और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग सपोर्ट बढ़ाने को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए जरूरी गैप फंडिंग जारी रखने का भी निर्णय लिया गया है। इससे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कम आय वाले लोगों तक योजना की पहुंच और बढ़ेगी।
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 1,000 से 5,000 रुपए तक की गारंटीड पेंशन मिलती है, जो व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है। 19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है।
सरकार का मानना है कि योजना को आगे बढ़ाने से भारत को एक पेंशन आधारित समाज बनाने में मदद मिलेगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के जरिए तीन चरणों में दी जाएगी- वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपए, जबकि 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपए। इस पूंजी से सिडबी अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकेगा और एमएसएमई को ज्यादा मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा पाएगा।
सरकार के मुताबिक, इस इक्विटी निवेश के बाद सिडबी की मदद से वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। यानी करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई को सीधा फायदा मिलेगा। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इससे करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई करीब 4 लोगों को रोजगार देता है।
सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में सिडबी की बैलेंस शीट पर जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ने वाली हैं, क्योंकि बैंक डिजिटल और बिना गारंटी वाले कर्ज, स्टार्टअप्स को वेंचर डेट और एमएसएमई को ज्यादा फाइनेंस उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार जरूरी है, ताकि सिडबी की कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेश्यो (सीआरएआर) मजबूत बनी रहे और उसकी क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित रहे।
अटल पेंशन योजना के विस्तार से करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, तो वहीं सिडबी को दी गई इक्विटी मदद से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज, ज्यादा रोजगार और मजबूत विकास का रास्ता मिलेगा। यह दोनों फैसले देश की अर्थव्यवस्था को समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएस
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