ठंड में घर पर बनाकर खाएं ये देसी लड्डू, आस-पास भी नहीं फटकेंगी बीमारियां, आसान है बनाने का तरीका
अलसी लड्डू रेसिपी (Alsi Laddu Recipe): सर्दियों का मौसम आते ही शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा, पोषण और गर्माहट की जरूरत होती है. सर्दी के मौसम में अगर खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल किया जाए, तो न सिर्फ ठंड से बचाव होता है, बल्कि इम्युनिटी भी मजबूत रहती है. ऐसी ही एक पारंपरिक और सेहतमंद अलसी के लड्डू, जो स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी खजाना माने जाते हैं. रसोईया प्रियंका सिंह के मुताबिक अलसी के लड्डू बनाना बेहद आसान है और इन्हें घर पर ही तैयार किया जा सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा ने बताया कि अलसी यानी फ्लैक्ससीड ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है. यह पाचन को बेहतर बनाने, इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर में अंदरूनी गर्माहट बनाए रखने में मददगार मानी जाती है. सर्दियों में अलसी का सेवन हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए फायदेमंद होता है. ठंड के मौसम में अक्सर लोगों को जोड़ों में दर्द, अकड़न और ठिठुरन की समस्या होती है. ऐसे में रोज सुबह एक अलसी का लड्डू खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और ठंड का असर कम महसूस होता है.
बेबी प्लानिंग की सही उम्र क्या है? शास्त्रों में क्या कहा गया है, समझें पूरा कैलकुलेशन
सनातन संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार, रीति-रिवाज और विधि का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है. जन्म संस्कार, मुंडन, विवाह से लेकर अंतिम संस्कार तक सब कुछ शास्त्रीय नियमों पर आधारित है. इसी परंपरा में गर्भधारण यानी 'बेबी प्लानिंग' को लेकर भी शास्त्रों में आयु निर्धारित की गई है. शास्त्रों के मुताबिक मनुस्मृति के कर्माधार संस्कार में महिला के लिए गर्भधारण की उत्तम आयु 16 से 22 वर्ष बताई गई है. ज्योतिषाचार्य गिरधर झा बताते हैं कि पहले समाज में यह परंपरा प्रचलित थी. कम उम्र में विवाह और कुछ वर्षों बाद दुरागमन के बाद गृहस्थ जीवन शुरू होता था. हालांकि आधुनिक समय में यह संभव नहीं रह गया है. शिक्षा, करियर, सामाजिक बदलाव और सरकारी कानूनों के चलते विवाह और मातृत्व की उम्र बढ़ गई है. सरकार भी विवाह के लिए न्यूनतम आयु तय कर चुकी है. ऐसे में शास्त्रों की मान्यता और आज की सामाजिक व्यवस्था के बीच साफ अंतर दिखाई देता है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18




















