बेबी प्लानिंग की सही उम्र क्या है? शास्त्रों में क्या कहा गया है, समझें पूरा कैलकुलेशन
सनातन संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार, रीति-रिवाज और विधि का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है. जन्म संस्कार, मुंडन, विवाह से लेकर अंतिम संस्कार तक सब कुछ शास्त्रीय नियमों पर आधारित है. इसी परंपरा में गर्भधारण यानी 'बेबी प्लानिंग' को लेकर भी शास्त्रों में आयु निर्धारित की गई है. शास्त्रों के मुताबिक मनुस्मृति के कर्माधार संस्कार में महिला के लिए गर्भधारण की उत्तम आयु 16 से 22 वर्ष बताई गई है. ज्योतिषाचार्य गिरधर झा बताते हैं कि पहले समाज में यह परंपरा प्रचलित थी. कम उम्र में विवाह और कुछ वर्षों बाद दुरागमन के बाद गृहस्थ जीवन शुरू होता था. हालांकि आधुनिक समय में यह संभव नहीं रह गया है. शिक्षा, करियर, सामाजिक बदलाव और सरकारी कानूनों के चलते विवाह और मातृत्व की उम्र बढ़ गई है. सरकार भी विवाह के लिए न्यूनतम आयु तय कर चुकी है. ऐसे में शास्त्रों की मान्यता और आज की सामाजिक व्यवस्था के बीच साफ अंतर दिखाई देता है.
लिव-इन रिलेशन गंधर्व विवाह जैसा, महिलाओं को मिलना चाहिए पत्नी का दर्जा, मद्रास हाईकोर्ट ने कही बड़ी बात
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि महिलाओं को संरक्षण देने के लिए प्राचीन 'गंधर्व विवाह' की अवधारणा के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं को भी 'पत्नी' का दर्जा दिया जाना चाहिए.
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