शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 151 अंक चढ़ा; निफ्टी 23,091 पर खुला
भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में हल्की मजबूती के साथ खुला. सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 151 अंक या 0.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,725 और निफ्टी 26 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,091 पर था.
शुरुआती कारोबार में सूचकांकों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था. निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो टॉप गेनर्स थे. इसके अलावा, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी मीडिया भी हरे निशान में थे. दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में थे.
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हल्की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 10 अंक की मजबूती के साथ 61,001 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 5 अंक की मामूली तेजी के साथ 19,688 पर था.
सेंसेक्स पैक में एलएंडटी, एक्सिस बैंक, एमएंडएम, पावर ग्रिड, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक और टाइटन गेनर्स थे. इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचयूएल, इटरनल, एनटीपीसी, टाटा स्टील, सन फार्मा, ट्रेंट और आईटीसी लूजर्स थे.
वैश्विक बाजार में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो और बैंकॉक हरे निशान में थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया और जकार्ता लाल निशान में थे. अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.
जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें फिर से बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है. इससे बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिससे बाजार में बड़ी तेजी आने की संभावना कम हो गई है. अब बाजार में तेजी तभी आ सकती है जब कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आए. इसलिए, कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखें. लंबे समय के लिए निवेश करने वाले निवेशक बाजार की मौजूदा कमजोरी का फायदा उठाकर अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों—खासकर लार्जकैप शेयरों—को धीरे-धीरे खरीद सकते हैं, जो अभी आकर्षक कीमतों पर मिल रहे हैं.
INPUT: IANS
होर्मुज खोलना, परमाणु कार्यक्रम... मिडिल ईस्ट संघर्ष खत्म करने के लिए ईरान ने अमेरिका में पेश किया 7 दिवसीय प्रस्ताव
Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर हालात सामान्य होते दिख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के तमाम दावों के बाद अब ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने शांति समझौते की बात करनी शुरू कर दी है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहले ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने शांति समझौता करने की इच्छा जताई. इसके बाद अब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास ने संघर्ष रोकने के लिए 7 दिन का प्लान बनाया है.
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां सत्र चल रहा है. इसके ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री भी अमेरिका पहुंचे हैं. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए 7 दिन की योजना का प्रस्ताव दिया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश की जाएगी. इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है.
Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi and his accompanying delegation attend the opening address of the 81st session of the United Nations General Assembly, delivered by UN Secretary-General António Guterres. pic.twitter.com/JYyr72qvei
— Alireza Akbari (@itsalireza_akb) September 22, 2026
जून में हुए MOU का किया जिक्र
अरगची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से कहा कि यह प्रस्ताव इसी साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) की तर्ज पर तैयार किया गया है. योजना का मकसद संघर्ष को खत्म करना और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को दोबारा शुरू करना है.
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सातवें दिन क्या होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने कहा कि हमने मध्यस्थों के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका के समक्ष एक योजना प्रस्तुत की है कि यदि कुछ शर्तें पूरी होती हैं, तो सातवें दिन के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य खुल जाएगा और वार्ता फिर से शुरू हो जाएगी. बेहतर होगा यदि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले कोई समझौता हो जाए.
जर्मनी के साथ बैठक में बताई थीं शर्तें
इससे पहले जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ बैठक में विदेश मंत्री अरगची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अपनी शर्तें और जरूरतें साफ तौर पर बता दी हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य और आक्रामक कार्रवाइयों को रोकना जरूरी है.
परमाणु कार्यक्रम पर क्या बोले विदेश मंत्री?
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि वार्ता में ईरान की ईमानदार कोशिशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. साथ ही, बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को भी ध्यान में रखना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षा के लिए केवल ईरान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है.
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