IIT-Kanpur के शोध छात्र ने की आत्महत्या, मानसिक तनाव से जूझ रहा था
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी)-कानपुर में 25 साल के पीएचडी के एक छात्र ने मंगलवार दोपहर परिसर की एक रिहायशी इमारत की छठी मंजिल से कथित तौर पर कूदकर आत्महत्या कर ली। यह बीते 23 दिनों के अंदर आईआईटी-कानपुर परिसर में आत्महत्या का दूसरा मामला है, जिससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नयी चिंताएं बढ़ गई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मृतक की पहचान रामस्वरूप इशराम के रूप में हुई है, जो अर्थ साइंसेज विभाग में शोध छात्र था। वह अपनी पत्नी मंजू और तीन साल की बेटी के साथ न्यू एसबीआरए भवन के एए-21 में रह रहा था।
इशराम को तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस उपायुक्त एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि सूचना मिलते ही कल्याणपुर पुलिस फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुंची और सबूत इकट्ठा किए।
पुलिस उपायुक्त ने कहा, शुरुआती जांच से पता चलता है कि छात्र लंबे समय से मानसिक तनाव से जूझ रहा था। उसने कई बार काउंसलिंग भी करवाई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस उपायुक्त ने आगे बताया कि पुलिस ने परिवार वालों को सूचित कर दिया है और जांच के तहत मृतक की पत्नी से पूछताछ कर रही है। इशराम राजस्थान के चुरू जिले के रहने वाले थे। इस घटना पर दुख जताते हुए आईआईटी-कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने पीटीआई- को बताया कि संस्थान ने एक होनहार शोध छात्र को खो दिया है।
Mamata Banerjee ने जिलाधिकारियों को SIR पर न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को जिलाधिकारियों को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा और इस बात पर जोर दिया कि लोगों को ‘‘तार्किक विसंगतियों’’ के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी
। उन्होंने बताया कि बनर्जी दोपहर के समय राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती की अध्यक्षता में जिलाधिकारियों के साथ हो रही बैठक में अप्रत्याशित रूप से शामिल हुईं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर से संबंधित सभी सुनवाई उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया कि तार्किक विसंगतियों के बहाने लोगों को असुविधा न हो।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर की सुनवाई के कारण लोगों को ‘‘तार्किक विसंगतियों’’ को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, और इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
अधिकारी ने कहा, ‘‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा वैध घोषित किए गए दस्तावेजों को सुनवाई के दौरान बिना किसी अपवाद के स्वीकार किया जाना चाहिए। जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि दस्तावेज जमा करने के बाद रसीद जारी करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।’’ बनर्जी ने कहा कि निर्धारित तिथियों पर सुनवाई में शामिल होने में असमर्थ मतदाताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
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