जमशेदपुर में मरीन ड्राइव पर भीषण सड़क हादसा, मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी समेत 4 की दर्दनाक मौत
Jamshedpur Car Accident: झारखंड के जमशेदपुर में देर रात एक ऐसा भयानक सड़क हादसा हुआ जिसने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है. जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर रात के सन्नाटे में एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकरा गई. यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया. इस दर्दनाक दुर्घटना में झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी त्रिशा सिंह समेत चार लोगों की असमय मौत हो गई. हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास से गुजर रहे लोग सहम गए. जब लोग मौके पर पहुंचे तो कार की हालत देखकर दंग रह गए.
खराब खड़े ट्रेलर में जा घुसी तेज रफ्तार कार
घटना देर रात करीब दो से ढाई बजे के बीच की बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक एक स्विफ्ट कार मरीन ड्राइव से गुजर रही थी. उसी दौरान सड़क किनारे पहले से एक खराब ट्रेलर खड़ा हुआ था. रात का समय होने और कार की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक समय रहते वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका. देखते ही देखते कार सीधे खड़े ट्रेलर के पिछले हिस्से में जा समाई. टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चारों लोग अंदर ही बुरी तरह फंस गए. कार के पुर्जे सड़क पर दूर-दूर तक बिखर गए.
गैस कटर से काटकर निकाले गए शव
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची. गाड़ी की हालत इतनी खराब थी कि उसमें फंसे लोगों को सामान्य तरीके से बाहर निकालना नामुमकिन था. पुलिस और राहत दल ने बिना देर किए गैस कटर का इंतजाम किया. इसके बाद काफी मशक्कत करके कार की बॉडी को काटा गया और तब जाकर एक-एक करके चारों शवों को बाहर निकाला जा सका. कार के भीतर का दृश्य बेहद हृदय विदारक था. पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भिजवाया.
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21 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों से चलाता था अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज मामले में पिछले 21 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी सुरेश कुमार पद्मिनी बिनी उर्फ बिनी एसपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी वर्ष 2005 में मामला दर्ज होने के बाद से ही जांच और कानूनी कार्रवाई से बचता आ रहा था. CBI के मुताबिक, यह मामला 31 जनवरी 2005 को दर्ज किया गया था. जांच में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2004-05 के दौरान आरोपी ने खुद को के. सुनील बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेलीफोन और इंटरनेट कनेक्शन हासिल किए थे.
आरोपी ने कोच्चि के एसआरएम रोड स्थित किराए के परिसर से एक अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज संचालित किया. आरोप है कि इस अवैध एक्सचेंज के जरिए आने वाली ISD कॉल को इंटरनेट के माध्यम से अनधिकृत तरीके से रूट किया जाता था.
सरकार को 12.69 लाख रुपये का नुकसान
CBI के अनुसार, अवैध तरीके से ISD कॉल रूट किए जाने के कारण भारत सरकार को करीब 12.69 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ. जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि इस अवैध टेलीकॉम हब के जरिए रूट की जाने वाली कॉल की निगरानी देश की सुरक्षा एजेंसियां नहीं कर सकती थीं. इससे सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी गंभीर जोखिम पैदा हुआ.
2008 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
मामले की जांच पूरी करने के बाद CBI ने 25 मार्च 2008 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, आरोपी लगातार फरार रहा और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से बचता रहा. CBI की ओर से आरोपी की तलाश जारी रखी गई. जांच एजेंसी के मुताबिक, लगातार प्रयासों और उसके ठिकाने के संबंध में की गई कार्रवाई के बाद आरोपी का पता लगाया गया.
तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तारी, 14 दिन की न्यायिक हिरासत
CBI ने 23 सितंबर 2026 को आरोपी को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) के आधार पर की गई. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को 23 सितंबर 2026 को ही सक्षम अदालत, एर्नाकुलम के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. CBI की यह कार्रवाई ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां आरोपी लंबे समय तक फरार रहकर जांच और न्यायिक प्रक्रिया से बचते रहे हों.
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