Mining Law में संशोधन के खिलाफ 28 सितंबर को Odisha Assembly घेरेगी BJD
ओडिशा के मुख्य विपक्षी ‘बीजू जनता दल’ (बीजद) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी संशोधित खनन कानून के विरोध में 28 सितंबर को राज्य विधानसभा के बाहर एक ‘‘विशाल रैली’’ आयोजित करेगी, जिसमें नवीन पटनायक भी हिस्सा लेंगे। पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा और अन्य बीजद नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में रैली आयोजित किए जाने का ऐलान करते हुए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम को ‘‘काला कानून’’ करार दिया। मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस अधिनियम के जरिये केंद्र सरकार ने खदानों और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों के अधिकार छीन लिये हैं, जो देश के संघीय ढांचे पर हमला है।
चूंकि देश के कुल उपलब्ध खनिज संसाधनों का 44 प्रतिशत हिस्सा ओडिशा में है, इसलिए इस संशोधित कानून से राज्य को सबसे अधिक नुकसान होगा।’’ मिश्रा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के भाजपा नेता यह तर्क दे रहे हैं कि इससे ओडिशा को नुकसान के बजाय फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को वापस लेने की मांग को लेकर बीजद 28 सितंबर को व्यापक स्तर पर विरोध सभा आयोजित करेगा। बीजद उपाध्यक्ष प्रताप जेना ने कहा, ‘‘पच्चीस जुलाई 2024 को उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि राज्य सरकारें खदानों और खनिजों पर कर और उपकर लगा सकती हैं।
इससे ओडिशा को बकाया राशि के रूप में एक लाख करोड़ रुपये और सालाना 12,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का अवसर मिला था। हालांकि, इस (संशोधन) अधिनियम के लागू होने से अब यह अवसर हाथ से निकल गया है।’’ इस अवसर पर विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा कि संशोधित खनन कानून के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। प्रमुख आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री सुदाम मरांडी ने कहा कि अधिकांश खनन क्षेत्र आदिवासी आबादी वाले इलाकों में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से केंद्र ने एकतरफा तरीके से इस कानून में संशोधन किया है, उससे निश्चित रूप से आदिवासी लोगों की जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
Maharashtra Drought: फसल नुकसान पर Devendra Fadnavis का बड़ा एलान, कल जारी होगा राहत आदेश
बारिश की कमी से राज्य के कई इलाकों में फसलों को हुए नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को घोषणा की है कि प्रभावित किसानों को तुरंत आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इसके लिए 25 सितंबर को आदेश जारी किया जाएगा। साथ ही एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति का गठन किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में यह उप-समिति पूरे राज्य में सूखे जैसे हालात की निगरानी करेगी और सरकार से तुरंत राहत उपायों को लेकर सिफारिश करेगी। वाशिम जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद अमरावती हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए फडणवीस ने स्वीकार किया कि स्थिति ‘‘अत्यंत गंभीर’’ है और कहा कि महायुति सरकार केंद्र से वित्तीय सहायता का इंतजार किए बिना, राज्य के सूखा राहत कोड के पहले चरण ( ट्रिगर 1 - शुरुआती आकलन) के तहत ही किसानों को तुरंत मदद प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, किसानों को सहायता राशि देने का आदेश कल जारी कर दिया जाएगा।
फडणवीस ने यह भी कहा कि ऐसी संभावना है कि पहले चरण के तहत कुछ इलाके छूट गए हों, ऐसे क्षेत्रों को तीसरे ट्रिगर (चरण) के तहत शामिल किया जाएगा। सूखे जैसे हालात के बीच फसलों और पानी की स्थिति का जायजा लेने के लिए वाशिम के कारंजा तालुका के म्हसाला, मंगरुलपीर तालुका के मोहगव्हाण और मालेगांव तालुका के जौल्का गांव का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से बातचीत की और सोयाबीन तथा तुअर (अरहर) की बर्बाद फसलों का निरीक्षण किया।
फडणवीस ने किसानों से चर्चा करते हुए कहा, हमने आज खेतों का निरीक्षण किया है। कल हम सूखे पर सरकारी आदेश (जीआर) जारी करेंगे और सभी किसानों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा, कहीं भी पानी नहीं है।
फसलें सूख गई हैं, खासकर सोयाबीन की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि बारिश न होने से खेती, चारे और पीने के पानी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
राहत उपायों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही कर्ज माफी शुरू कर चुकी है और इसे जल्द पूरा करेगी, जबकि बिजली के बिल भी माफ कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को कर्ज माफी मिल चुकी है, बैंकों नियमों के अनुसार उन्हें नया ऋण प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों से कहा जाएगा कि वे इस मुश्किल समय में किसानों से कर्ज की वसूली न करें।
शिवसेना (उबाठा) नेता उद्धव ठाकरे की उस मांग पर, जिसमें उन्होंने स्थिति पर चर्चा के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया था, फडणवीस ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा, जब हमारे किसान संकट में हैं, तो राजनीति क्यों होनी चाहिए? हम इस बात पर ध्यान देंगे कि किसानों की मदद कैसे की जाए।
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