Central Motor Vehicles Act संशोधन पर विवाद जारी, Delhi में वकीलों ने न्यायिक काम से बनाई दूरी
दिल्ली बार एसोसिएशन (DBA) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के विरोध में न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। DBA 14 सितंबर के नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग कर रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा NCT दिल्ली में सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के नोटिफिकेशन को लागू करने पर रोक लगाने के बाद, दिल्ली के अन्य बार एसोसिएशन के वकीलों ने काम फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, दिल्ली बार एसोसिएशन (DBA) ने गुरुवार को भी न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। कहा जा रहा है कि यह संशोधन केंद्र सरकार ने पेश किया है। इसलिए, केंद्र सरकार को इसे पूरे देश से वापस लेना चाहिए। वकील विकास गोयल ने कहा कि हमने सिर्फ़ आज के लिए न्यायिक कामकाज से दूरी बनाई है। हम अपने आंदोलन को पूरे देश के स्तर पर ले जाएंगे।
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अदालती कामकाज जारी रहना चाहिए। हम दूसरे बार (वकीलों के संघ) के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। DBA के अध्यक्ष वकील डीके शर्मा ने बुधवार को कहा था कि वे दिल्ली राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट हैं। सरकार ने नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। वकील शर्मा ने आगे कहा, "इसे वापस लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा केंद्र सरकार ही कर सकती है, क्योंकि केंद्र ही पूरे देश के लिए कानून में संशोधन करता है। हमारा विरोध केंद्र सरकार के खिलाफ होगा।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया। उन पर नगीना के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में कथित टिप्पणी करने के लिए SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि भारती के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध प्रथम दृष्टया बनते हैं और ऐसी स्थितियों में अग्रिम ज़मानत देने पर कानूनी रोक है। एक्ट की धारा 3(1)(r) सार्वजनिक रूप से SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित या डराने-धमकाने से संबंधित है, जबकि धारा 3(1)(s) SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को जातिसूचक नाम से गाली देने से संबंधित है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब वह नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में भारती के खिलाफ दर्ज मामले में उनकी गिरफ्तारी से पहले ज़मानत (एंटीसिपेटरी बेल) की अर्ज़ी पर विचार कर रहा था। कोर्ट ने आरोपों और उसके सामने पेश किए गए सबूतों की जांच करते हुए पाया कि दो प्रावधानों के तहत अपराध के तत्व प्रथम दृष्टया (prima facie) मौजूद थे, जिससे गिरफ्तारी से पहले ज़मानत पर कानूनी रोक लागू होती है।
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7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी से पहले ज़मानत की अर्ज़ी खारिज किए जाने के बाद भारती हाई कोर्ट पहुंचे थे। ट्रायल कोर्ट ने भी पाया था कि उसके सामने मौजूद सबूत प्रथम दृष्टया SC/ST एक्ट के तहत अपराध का संकेत देते हैं और माना कि कानूनी रोक लागू होती है। FIR 23 अगस्त को आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली राज्य अध्यक्ष बालकराम बौद्ध की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो भारती के सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किए गए एक वीडियो से संबंधित थी। शिकायत के अनुसार, भारती ने कथित तौर पर चंद्रशेखर आज़ाद और बीआर अंबेडकर के बारे में जाति-संबंधी और अपमानजनक टिप्पणियां कीं, साथ ही अन्य कथित आपत्तिजनक बयान भी दिए।
भारती ने इन आरोपों को गलत बताया है। सुनवाई के दौरान, उनके वकील ने दलील दी कि SC/ST एक्ट के तहत अपराध के लिए ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं होती हैं और कथित टिप्पणियों को उनके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि भारती जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ हैं और उन्होंने आरक्षण पर अपने विचार रखे हैं। यह तर्क दिया गया कि कथित टिप्पणियां उनकी मां और बहन के खिलाफ कथित तौर पर दिए गए बयानों के संदर्भ में की गई थीं।
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