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IFFCO Phulpur Apprentice Online Form 2026

IFFCO Phulpur Trade / Technician Apprentices Recruitment 2026 Author: Sarkari Exam Team Tag: 10th, Diploma Pass Job Short Information : India Farmers Fertilizer Cooperative Ltd. (IFFCO) has released the notification for the post of Trade / Technician Apprentices. Online applying process for IFFCO Phulpur Apprentice Recruitment 2026 has started from 15 January 2026 & the ...

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चिकन नेक के पास चीनी राजदूत को लेकर क्यों गए युनूस? भारत के साथ खतरनाक खेल खेल रहा बांग्लादेश

बांग्लादेश भारत के बीच का सबसे बड़ा विवाद जिसमें चीन की एंट्री हो रही है। एक ऐसा विवाद जो भारत के राज्य पश्चिम बंगाल को प्यासा मार सकता है। भारत बांगलादेश के बीच इन दिनों संबंध काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। इसकी कहानी आप सब जानते हैं और बाकी रही सही कसर अब एक विवाद पूरा कर रहा है। बांग्लादेश भारत के बीच के सबसे पुराने विवाद ने इस कहानी को फिर एक नई दिशा दे दी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तिस्ता प्रोजेक्ट को चीन को देने का फैसला कर लिया है। अब खबर है कि बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की सरकार ने ढाका में चीनी राजदूत को तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा कराया, जो भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक के निकट स्थित है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने स्पष्ट किया कि चीनी राजदूत याओ वेन की हालिया यात्रा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के लिए तकनीकी मूल्यांकन पर केंद्रित थी।

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यह घटनाक्रम युनुस द्वारा चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार संबंधी विवादास्पद सुझावों और भारत के पूर्वोत्तर को भूमि से घिरा हुआ बताने के बाद क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच सामने आया है। बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन, वेन के साथ रंगपुर के तेपामधुपुर तालुक शाहबाजपुर में परियोजना क्षेत्र में गईं और कहा कि चीन जल्द से जल्द तीस्ता मास्टर प्लान (टीएमपी) को लागू करना शुरू करने के लिए उत्सुक है। खबर है कि बांग्लादेश ने चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना को इस साल दिसंबर तक एक कांसेप्ट नोट और 2026 के आखिर तक इस पर रिसर्च तैयार करने को कह दिया है। द टेलीग्राफ इंडिया के मुताबिक बांग्लादेश वाटर डेवलपमेंट बोर्ड और पावर चाइना के बीच इसके लिए समझौता ज्ञापन पर साइन हो चुका है। इस समझौते के तहत पावर चाइना को इस साल के आखिर तक कांसेप्ट नोट और 2026 के आखिर तक प्रोजेक्ट पर रिसर्च तैयार करनी है। जो वोह बात में ढाका को सौंपी जाएगी। इसके लिए चीन की सरकारी कंपनी और चाइना के कर्मचारियों ने लाल मोहिन हाट रंगपुर कुरीग्राम बोगरा जयपुर हाट और और गाई मंधाना शुरू कर दिया है अब यहां यह समझना जरूरी है कि चीन ने इस रिसर्च की शुरुआत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ ऐसे वक्त पर की है, जब भारत इस प्रोजेक्ट को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ मिलकर शुरू करने वाला था।

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तीस्ता नदी परियोजना है क्या

तिस्ता नदी का प्रमुख स्रोत तसो लहामते की सीमा के पास है। यानी उत्तरी सिक्किम में तकरीबन 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से तिस्ता पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश चली जाती है। जहां आगे ब्रह्मपुत्र में यह मिलती है। तिस्ता नदी लगभग 400 किमी लंबी है। नदी का 300 किमी से ज्यादा बड़ा हिस्सा हमारे यानी भारत में है, जबकि 100 किमी से कुछ ज्यादा हिस्सा बांग्लादेश में है। तिस्ता नदी का बंटवारा भारत बांग्लादेश के बीच 1947 में ही हो गया था। तब बांग्लादेश ईस्ट पाकिस्तान हुआ करता था। वैसे तो पाकिस्तान का ईस्ट पाकिस्तान पर ध्यान कम था। इसलिए यह विवाद इतना बड़ा नहीं यह विवाद बड़ा तब बना जब बांग्लादेश अस्तित्व में आया। 1971 के बाद तिस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर जमकर विवाद होना शुरू हो गया। बांग्लादेश की सरकार की तरफ से इसे लेकर बार-बार भारत पर एक दबाव बनता रहा। भारत बांग्लादेश के बीच ये नदी विवाद की सबसे बड़ी वजह माना जाता है जो 2011 में बस खत्म ही होने वाला था कि तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने इस नदी के बंटवारे को मानने से ही इंकार कर दिया। जिसके बाद यह फिर लटक गया। फिर पिछले साल 2024 में शेख हसीना की मंजूरी के बाद यह फाइनल हो पाता उससे पहले ही उनकी सरकार गिर गई। अंतरिम सरकार आई यूनिस सरकार का काला खेल यहां फिर शुरू हो गया। यूनुस सरकार ने बिना देखे बिना समझे चीन की एंट्रीज प्रोजेक्ट में करा दी है।

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