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गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी पर क्यों लिया ये बड़ा फैसला? संजू, गिल, रोहित और विराट को लेकर भी खुले कई राज

Gautam Gambhir : भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर अक्सर चर्चाओं में बने रहते हैं. गंभीर कभी टीम इंडिया को मिलने वाली लगातार हार के लिए सुर्खियों में आ जाते हैं, तो कभी वो प्लेइंग-11 में किए जाने वाले हैरतअंगेज बदलावों के लिए चर्चाओं में शामिल रहते हैं. गौतम गंभीर को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मुंह की खानी पड़ी थी. इसके बाद उनकी जमकर आलोचना हुई थी. आईपीएल 2026 के बाद वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया था. 

वैभव उन दिनों शानदार फॉर्म में थे और उनके टीम इंडिया के लिए खेलने की उम्मीद सभी आयरलैंड दौरे पर लगाए बैठे थे, लेकिन गौतम गंभीर ने आयरलैंड के खिलाफ 2 मैचों में उन्हें मौका नहीं दिया. इग्लैंड के खिलाफ भी पहले वनडे में उन्हें प्लेइंग-11 में स्थान नहीं मिला. फिर भारी दवाब के बाद उन्हें दूसरे टी20 मैचों में डेब्यू करने का मौका मिला. इस 15 साल के बल्लेबाज ने वीवीएस लक्ष्मण की कोचिंग में जिम्बाब्वे सीरीज में धमाल मचाया और प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता था. 

जिम्बाब्वे सीरीज से संजू सैमसन बाहर थे. अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की घरेलू टी20 सीरीज में जैसे गौतम गंभीर वापस आए उन्होंने पिछली सीरीज से सबसे बेस्ट बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को बाहर कर दिया और अफगानिस्तान के खिलाफ संजू सैमसन को मौका दिया. संजू शुरुआती दो मैचों में फेल हुए फिर तीसरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया. तब से वैभव टीम की प्लेइंग-11 से बाहर हैं. वैभव के फैंस उनके खेलने की उम्मीद कर रहे हैं.

अब गौतम गंभीर ने जियोस्टार के साथ बात करते हुए वैभव और संजू के इस फैसले की वजह बताई है. वहीं उन्होंने भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली सीरीज से पहले कप्तान शुभमन गिल के बारे में भी खुलकर बात की है. इसके साथ ही उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली के बारे में भी बड़ी बात बोली है. 

वैभव सूर्यवंशी को लेकर गौतम गंभीर का बड़ा खुलासा

गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को हटाकर वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड सीरीज में खिलाने के फैसले पर कहा कि, 'मेरे दो साल के सफर में ये इकलौती रात थी जब मैं सो नहीं पाया. मैंने ये बात संजू को भी बताई थी'. गंभीर ने आगे कहा कि, 'वैभव शानदार फॉर्म में थे और भारत को सीरीज जीतनी थी. इसी वजह से सैमसन की जगह वैभव को खिलाने का फैसला लिया गया. मैंने संजू से बहुत ईमानदारी से बात की थी. मैंने उनसे कहा था कि, वैभव शानदार फॉर्म में हैं. हमें टॉप ऑर्डर में रन बनाने वाला खिलाड़ी चाहिए. संजू ने इस फैसले को समझा और इसे अच्छे तरीके से लिया था. यह बातचीत सिर्फ मेरे और संजू के बीच हुई थी'.

गौतम गंभीर ने शुभमन गिल को लेकर बोली बड़ी बात 

गौतम गंभीर ने कहा कि, 'वनडे क्रिकेट में शुभमन गिल बहुत खुशकिस्मत हैं कि उन्हें मैदान पर और मैदान के बाहर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी मदद करते हैं. इंडियन क्रिकेट में किसी को भी प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना हमेशा मुश्किल होता है, लेकिन जब आपको एक युवा कप्तान के तौर पर ऐसा करना पड़ता है, तो शायद किसी भी कोच और कप्तान के लिए यह सबसे मुश्किल काम होता है. अब तक उन्होंने ऐसा किया है. वो असल में सभी उम्मीदों पर खरा उतरे है'.

रोहित शर्मा के साथ रिश्ते पर गंभीर का बड़ा बयान

गौतम गंभीर ने कहा कि, 'रोहित और मेरा रिश्ता सिर्फ कैप्टन और कोच का नहीं था, जब रोहित टीम में आए मैं उस समय सीनियर प्लेयर था, इसलिए रोहित और मेरा रिश्ता तब से है. रोहित मुझे तब से जानते हैं, इसलिए अक्सर जब आप साथ खेलते हैं, तो चीजें बहुत आसान हो जाती हैं और असल में वो मेरी सोच जानते हैं. मैं उनकी सोच जानता हूं क्योंकि कल मेरी कुछ और सोच हो सकती है, कैप्टन की कुछ और सोच हो सकती है, लेकिन आखिर में, जो भी टीम के सबसे अच्छे हित में हो वही आखिरी फैसला है. तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता और इसीलिए मैंने कहा कि जिन चार कैप्टन के साथ मैंने काम किया है, उनके साथ मेरा यही अनुभव रहा है कि सबका फोकस इंडियन क्रिकेट रहा है'.

इंडियन क्रिकेट को लेकर गौतम गंभीर ने बोली बड़ी बात 

गौतम गंभीर ने कहा कि, 'मेरा मानना ​​है कि एक मजबूत टेस्ट क्रिकेट वाला देश एक मजबूत क्रिकेट वाला देश होता है. इसका उल्टा नहीं होता. मैंने कभी नहीं माना कि एक मजबूत टी20 क्रिकेट वाला देश एक मजबूत क्रिकेट वाला देश होता है. इसलिए रेड बॉल अभी भी हमारी प्रायोरिटी है'.

गौतम गंभीर ने आगे कहा कि, 'इन लोगों को दूसरा टी20 वर्ल्ड कप जीतने में 17 साल नहीं लगे. इन लोगों को तीसरा टी20 वर्ल्ड कप जीतने में सिर्फ 17 महीने लगे. अचानक एक खराब सीरीज या यहां-वहां तीन खराब गेम उन्हें बुरा खिलाड़ी नहीं बनाते या हमें बुरी टीम नहीं बनाते हैं. इसलिए हमारे लिए यह कंटिन्यूटी बनाए रखना बहुत जरूरी था'.

भारतीय क्रिकेट टीम 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज अपने घर पर खेलने वाली है. इस सीरीज में हेड कोच गौमत गंभीर के साथ शुभमन गिल कप्तानी करेंगे. वहीं टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ी भी खेलते हुए दिखाई देंगे. 28 सितंबर से टीम इंडिया एशियन गेम्स में हिस्सा लेगी, जहां श्रेयस अय्यर कप्तान होंगे और वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन भी इस टीम का हिस्सा होंगे. 

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Gaya Pind Daan 2026: गयाजी में क्यों किया जाता है पिंडदान? जानें धार्मिक महत्व, विधि और जरूरी जानकारी

Gaya Pind Daan 2026: पिंडदान को सनातन धर्म में पितरों के निमित्त किए जाने वाला प्रमुख श्राद्ध कर्मों में से एक माना जाता है. इसके लिए बिहार के गया जी में हर वर्ष भारी संख्या में लोग पितृपक्ष के दौरान पहुंचते हैं. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं. गया जी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट समेत कई पवित्र स्थलों पर पिंडदान और तर्पण किया जाता है. गया जी में पिंडदान से जुड़े 48 प्रमुख पवित्र स्थल मौजूद हैं. साल 2026 में पितृपक्ष मेला 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला है. ऐसे में अगर आप भी यहां पिंडदान के लिए जाना चाहते है इन बातों के बारे में जान लीजिए.

गया जी पितृ पक्ष 2026 की तिथियां

  • पितृ पक्ष प्रारंभ तिथि- 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध)
  • प्रतिपदा तिथि- 27 सितंबर 2026
  • पितृपक्ष समापन तिथि- 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या)

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गया जी में पिंडदान का महत्व क्यों खास है?

गया जी को पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का संबंध गयासुर की कथा से है और विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरणचिन्ह माने जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि गया जी में भगवान राम ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था. इसी वजह से गया जी में पिंडदान को पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का महत्वपूर्ण कर्म होता है. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-दक्षिणा जैसे कर्म-कांड किए जाते हैं.

गया जी पहुंचकर क्या करें?

गया जी में पिंडदान करने के लिए आपको सबसे पहले गया जी पहुंचना है. इसके बाद गया जी में किसी वेदी पर जाकर कर्मकांड शुरू करने के बजाय पारिवारिक परंपरा के अनुसार किसी पंडा या पुरोहित से संपर्क करें. पंडा परिवारों की परंपरागत जानकारी में साधक के परिवार, गोत्र और पूर्व में किए गए कर्मकांड से संबोधित विवरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसके बाद पुरोहित बताते हैं कि किस क्रम में कौन सा कर्म करना होता है. पिंडदान की पूरी प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती है. श्रद्धालु कितने पितरों के लिए कर्म कर रहे हैं, कितने दिन का अनुष्ठान करना है और परिवार की परंपरा क्या है, इन सभी बातों के आधार पर ही पिंडदान किया जाता है.

गया जी में श्राद्ध करने का महत्व

देशभर में श्राद्ध कर्म और पिंडदान करने के लिए कई वेदियां हैं. यह बिहार का सर्वोपरि स्थान है. गया में श्राद्ध कर्म, तर्पण विधि और पिंडदान करने के बाद कुछ शेष नहीं रह जाता है. यहां से व्यक्ति को पितृऋण से मुक्त मिलती है. रामायण के अनुसार, राम-सीता ने भी यहीं श्राद्ध किया था और महाभारत काल में पांडवों ने भी इसी स्थान पर श्राद्ध किया था.

ग्रंथों में भी है गया जी का जिक्र

धार्मिक हिंदू ग्रंथों में भी गया जी का विस्तृत जिक्र है. वायु पुराण, गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में गया शहर का विवरण है. इस तीर्थस्थल पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए गया को मोक्ष की भूमि उर्फ मोक्ष स्थली भी कहा जाता है. हर साल पितृपक्ष में यहां पितृपक्ष मेला लगता है. बोधगया को भगवान बुद्ध की भूमि भी कहते हैं. इस स्थान पर बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने अपनी शैली में कई मंदिरों का निर्माण करवा रहे हैं.

गया जी की पौराणिक कथा क्या है?

गयासुर नामक एक असुर था, जिसने कड़ी तपस्या की थी और ब्रह्माजी से वरदान मांगा था. गयासुर ने ब्रह्माजी से वरदान मांगा था, जिससे उसका शरीर पवित्र हो जाए और लोग उसके दर्शन कर पापों से मुक्त हो जाएं. इस वरदान के बाद लोगों में भय खत्म हो चुका था और पाप करने लगे थे. पाप करने के बाद वह गयासुर के दर्शन करते और पाप रहित हो जाते. ऐसा होने से स्वर्ग और नरक का संतुलन बिगड़ने लगा था. बड़े बड़े पापों के चलते हुए भी लोग स्वर्ग पहुंचने लगे थे.

इसके बाद इन सभी से बचने के लिए देवतागण गयासुर के पास पहुंचे और यज्ञ के लिए पवित्र स्थान की मांग की. गयासुर ने अपना शरीर ही देवताओं को यज्ञ के लिए दे दिया और कहा कि आप मेरे ऊपर ही यज्ञ करें. जब गयासुर लेटे तो उसके शरीर पांच कोस में फैल गए और यही पांच कोस आगे चलकर गया बन गए. गयासुर के पुण्य प्रभाव के चलते वह स्थान तीर्थ के रूप में जाना जाने लगा. गया में पहले विविध नामों से 360 वेदियां थी लेकिन अब सिर्फ 48 ही बची हैं. गया में भगवान विष्णु गदाधर के रूप में विराजमान हैं. गयासुर के विशुद्ध शरीर में ब्रह्मा, जनार्दन, शिव तथा प्रपितामह निवास करते हैं. इसलिए पिंडदान व श्राद्ध कर्म के लिए इस स्थान को सबसे उत्तम माना जाता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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