Gaya Pind Daan 2026: गयाजी में क्यों किया जाता है पिंडदान? जानें धार्मिक महत्व, विधि और जरूरी जानकारी
Gaya Pind Daan 2026: पिंडदान को सनातन धर्म में पितरों के निमित्त किए जाने वाला प्रमुख श्राद्ध कर्मों में से एक माना जाता है. इसके लिए बिहार के गया जी में हर वर्ष भारी संख्या में लोग पितृपक्ष के दौरान पहुंचते हैं. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं. गया जी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट समेत कई पवित्र स्थलों पर पिंडदान और तर्पण किया जाता है. गया जी में पिंडदान से जुड़े 48 प्रमुख पवित्र स्थल मौजूद हैं. साल 2026 में पितृपक्ष मेला 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला है. ऐसे में अगर आप भी यहां पिंडदान के लिए जाना चाहते है इन बातों के बारे में जान लीजिए.
गया जी पितृ पक्ष 2026 की तिथियां
- पितृ पक्ष प्रारंभ तिथि- 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध)
- प्रतिपदा तिथि- 27 सितंबर 2026
- पितृपक्ष समापन तिथि- 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या)
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गया जी में पिंडदान का महत्व क्यों खास है?
गया जी को पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का संबंध गयासुर की कथा से है और विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरणचिन्ह माने जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि गया जी में भगवान राम ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था. इसी वजह से गया जी में पिंडदान को पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का महत्वपूर्ण कर्म होता है. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-दक्षिणा जैसे कर्म-कांड किए जाते हैं.
गया जी पहुंचकर क्या करें?
गया जी में पिंडदान करने के लिए आपको सबसे पहले गया जी पहुंचना है. इसके बाद गया जी में किसी वेदी पर जाकर कर्मकांड शुरू करने के बजाय पारिवारिक परंपरा के अनुसार किसी पंडा या पुरोहित से संपर्क करें. पंडा परिवारों की परंपरागत जानकारी में साधक के परिवार, गोत्र और पूर्व में किए गए कर्मकांड से संबोधित विवरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसके बाद पुरोहित बताते हैं कि किस क्रम में कौन सा कर्म करना होता है. पिंडदान की पूरी प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती है. श्रद्धालु कितने पितरों के लिए कर्म कर रहे हैं, कितने दिन का अनुष्ठान करना है और परिवार की परंपरा क्या है, इन सभी बातों के आधार पर ही पिंडदान किया जाता है.
गया जी में श्राद्ध करने का महत्व
देशभर में श्राद्ध कर्म और पिंडदान करने के लिए कई वेदियां हैं. यह बिहार का सर्वोपरि स्थान है. गया में श्राद्ध कर्म, तर्पण विधि और पिंडदान करने के बाद कुछ शेष नहीं रह जाता है. यहां से व्यक्ति को पितृऋण से मुक्त मिलती है. रामायण के अनुसार, राम-सीता ने भी यहीं श्राद्ध किया था और महाभारत काल में पांडवों ने भी इसी स्थान पर श्राद्ध किया था.
ग्रंथों में भी है गया जी का जिक्र
धार्मिक हिंदू ग्रंथों में भी गया जी का विस्तृत जिक्र है. वायु पुराण, गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में गया शहर का विवरण है. इस तीर्थस्थल पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए गया को मोक्ष की भूमि उर्फ मोक्ष स्थली भी कहा जाता है. हर साल पितृपक्ष में यहां पितृपक्ष मेला लगता है. बोधगया को भगवान बुद्ध की भूमि भी कहते हैं. इस स्थान पर बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने अपनी शैली में कई मंदिरों का निर्माण करवा रहे हैं.
गया जी की पौराणिक कथा क्या है?
गयासुर नामक एक असुर था, जिसने कड़ी तपस्या की थी और ब्रह्माजी से वरदान मांगा था. गयासुर ने ब्रह्माजी से वरदान मांगा था, जिससे उसका शरीर पवित्र हो जाए और लोग उसके दर्शन कर पापों से मुक्त हो जाएं. इस वरदान के बाद लोगों में भय खत्म हो चुका था और पाप करने लगे थे. पाप करने के बाद वह गयासुर के दर्शन करते और पाप रहित हो जाते. ऐसा होने से स्वर्ग और नरक का संतुलन बिगड़ने लगा था. बड़े बड़े पापों के चलते हुए भी लोग स्वर्ग पहुंचने लगे थे.
इसके बाद इन सभी से बचने के लिए देवतागण गयासुर के पास पहुंचे और यज्ञ के लिए पवित्र स्थान की मांग की. गयासुर ने अपना शरीर ही देवताओं को यज्ञ के लिए दे दिया और कहा कि आप मेरे ऊपर ही यज्ञ करें. जब गयासुर लेटे तो उसके शरीर पांच कोस में फैल गए और यही पांच कोस आगे चलकर गया बन गए. गयासुर के पुण्य प्रभाव के चलते वह स्थान तीर्थ के रूप में जाना जाने लगा. गया में पहले विविध नामों से 360 वेदियां थी लेकिन अब सिर्फ 48 ही बची हैं. गया में भगवान विष्णु गदाधर के रूप में विराजमान हैं. गयासुर के विशुद्ध शरीर में ब्रह्मा, जनार्दन, शिव तथा प्रपितामह निवास करते हैं. इसलिए पिंडदान व श्राद्ध कर्म के लिए इस स्थान को सबसे उत्तम माना जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
जोधपुर एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर की मौत पर विरोध-प्रदर्शन; ओपीडी सेवाएं प्रभावित, जांच समिति गठित
जयपुर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। जोधपुर एम्स में एनेस्थीसिया विभाग के 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर रामनरेश यादव की मौत के बाद तनाव बना हुआ है। रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे ओपीडी सेवाएं बाधित हुई हैं और खबरों के अनुसार सर्जरी व अन्य मेडिकल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
एम्स प्रशासन ओपीडी सेवाओं में रुकावट के बारे में मरीजों को बताने के लिए कैंपस के पब्लिक-एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रखकर एक एंट्री गेट को भी ब्लॉक कर दिया।
मंगलवार को ड्यूटी के दौरान डॉ. रामनरेश यादव की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार देर रात कैंपस में कैंडल लाइट मार्च निकाला, अपने साथी को श्रद्धांजलि दी और उनकी मौत के हालात की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की।
एम्स प्रशासन ने डीन (एकेडमिक) की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच समिति बनाई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है।
रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों और चिंताओं को दूर करने के लिए एक और समिति बनाई गई है। इन उपायों के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. यादव मंगलवार को ड्यूटी के दौरान अचानक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) से चले गए। दोपहर 1 बजे वे एम्स के रेस्टरूम के बाथरूम में बेहोश पाए गए। साथी डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पुलिस को सूचना दी गई और बाद में शव को एम्स की मोर्चरी ले जाया गया। उनके परिवार को भी सूचित किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनास्थल पर एक इंजेक्शन और एक सिरिंज मिली। इससे ड्रग ओवरडोज की शुरुआती आशंका जताई जा रही है लेकिन मौत का सही कारण अभी पता नहीं चला है।
मौत के हालात का पता चल रही जांच और संबंधित मेडिकल जांच से चलेगा। डॉ. रामनरेश यादव मूल रूप से अलवर के बड़ा जोड़ इलाके के रहने वाले थे। उन्होंने एम्स जोधपुर से एमबीबीएस पूरा किया था और उसी संस्थान से एनेस्थीसिया में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे थे।
बताया जाता है कि उनके बड़े भाई एम्स दिल्ली में डॉक्टर हैं जबकि उनके पिता उनके पैतृक गांव में रहते हैं।
उनकी मौत से साथी डॉक्टरों और रेजिडेंट मेडिकल स्टाफ में दुख और गुस्सा है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने उनकी मौत के हालात की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने व्यापक जांच और किसी व्यक्ति या संस्थान की जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर मृतक डॉक्टर के परिवार के लिए 5 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग भी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर एक रेजिडेंट डॉक्टर का भावुक वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में डॉक्टर अपने साथी, रेजिडेंट्स, फैकल्टी सदस्यों और शिक्षकों से एकजुट होने और इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने की अपील कर रहे हैं। वे इस मौत पर दी गई प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हैं और रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी और काम के दबाव से जुड़ी चिंताओं को उजागर करते हैं। उनका कहना है कि कुछ डॉक्टर डर के कारण चुप रहते हैं और वे अपने साथियों से एकजुट होकर आगे आने की अपील करते हैं।
डॉक्टर यह भी मानते हैं कि हालात की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने तुरंत आवाज नहीं उठाई और चुप रहने के लिए वे खुद को भी आंशिक रूप से जिम्मेदार मानते हैं।
--आईएएनएस
एससीएच/पीएम
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