Asian Games 2026 में Naorem Roshibina Devi ने जीता रजत पदक, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बृहस्पतिवार को जापान में जारी एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली वुशु खिलाड़ी नाओरेम रोशिबिना देवी को बधाई दी और उन्हें ‘‘राज्य की खेल भावना की गौरवपूर्ण प्रतीक’’ बताया। 25 वर्षीय रोशिबिना ने बृहस्पतिवार को आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की 60 किलोग्राम सांडा वुशु स्पर्धा में रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें चीन की झांग शियाओयू के हाथों 0-2 से हार का सामना करना पड़ा।
सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ रोशिबिना लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वुशु खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि ने एक बार फिर मणिपुर और देश को गर्व और सम्मान दिलाया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘रोशिबिना मणिपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा की उज्ज्वल मिसाल और राज्य की खेल भावना की गौरवपूर्ण प्रतीक हैं।’’ यह रोशिबिना का एशियाई खेलों में तीसरा पदक है।
उन्होंने 2018 में जकार्ता एशियाई खेलों में कांस्य और 2023 में हांगझोउ एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। मणिपुर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य ए शारदा देवी ने भी वुशु खिलाड़ी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रोशिबिना का दृढ़ संकल्प, अनुशासन और संघर्ष की भावना मणिपुर तथा पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण है।
बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई मयाई लीकाई की रहने वाली रोशिबिना के पिता नाओरेम दामू सिंह किसान हैं। वह शुरु में उनके वुशु खेलने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन बाद में बेटी के खेल के प्रति जुनून को देखते हुए उन्होंने अनुमति दे दी। शुरुआती वर्षों में प्रशिक्षण और यात्रा का खर्च उठाने के लिए सीमित साधनों वाले उनके पिता को जमीन का एक टुकड़ा भी बेचना पड़ा था।
CEC Gyanesh Kumar पर चले देशद्रोह का केस, Congress MP Priyanka Gandhi ने की मांग
वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार पर 'अनुचित' चुनाव कराने के लिए 'देशद्रोह' का आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जो कोई भी चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करता है, वह देश के खिलाफ देशद्रोह करता है; साथ ही, वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक कृत्य है।
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उन्होंने कहा कि जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है। मुझे नहीं लगता कि ऐसे पद पर बैठे किसी व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करना और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना लोकतंत्र, संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक आपराधिक काम है... अगर चुनाव आयुक्त ने कोई ग़ैर-कानूनी काम किया है, तो मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें सुरक्षा क्यों मिलनी चाहिए। उन्हें पूरी तरह पता था कि यह सब उनकी नाक के नीचे हो रहा है; उनके साथियों ने इस ओर उनका ध्यान भी दिलाया था, लेकिन उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ किया और जान-बूझकर एक निष्पक्ष न होने वाले चुनाव को होने दिया। उन पर भी किसी दूसरे अपराधी की तरह ही आपराधिक मुक़दमा चलना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोई भी कोशिश संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि मेरा जवाब बिल्कुल साफ़ है। जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर गैर-कानूनी काम साबित हो जाते हैं, तो CEC को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उस पद पर बैठे किसी व्यक्ति को—यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को—तब भी कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, जब उन्होंने गैर-कानूनी काम किए हों।
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इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना और बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना... लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक काम है। प्रियंका गांधी ने आगे आरोप लगाया कि अगर CEC को गड़बड़ियों के बारे में पता था, या साथी आयुक्तों ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी और फिर भी उन्होंने इसे जारी रहने दिया, तो उन पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका गांधी का यह बयान 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद मचे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
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