रूस 47 देशों के नागरिकों का युद्ध में कर रहा इस्तेमाल, भारत का नाम लेकर UN में जेलेंस्की ने क्या बोला?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने बुधवार को रूस पर आरोप लगाया कि वह यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने भारत, नेपाल, घाना और कई अन्य देशों का ज़िक्र किया। न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए, ज़ेलेंस्की ने उन देशों की सरकारों से अपील की जिनके नागरिक इस युद्ध में शामिल हो गए हैं, कि वे रूस को और लोगों को इस संघर्ष में शामिल करने से रोकें। ज़ेलेंस्की ने कहा कि हम जानते हैं कि रूस अपनी जंग में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल करता है। उन्होंने घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, भारत, यमन, केन्या, ज़िम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों का ज़िक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी नागरिक धोखे से रूस पहुँच गए और संबंधित देशों से इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की।
ज़ेलेंस्की ने UN में मौजूद प्रतिनिधियों से कहा कि पुतिन को आपको इस जंग में घसीटने न दें।
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उत्तर कोरियाई सैनिक और नए गठबंधन
ज़ेलेंस्की ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य संबंधों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि यूक्रेन ने उत्तर कोरिया के दो युद्ध-बंदियों को पकड़ा था, जिन्हें बाद में दक्षिण कोरिया भेज दिया गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इस उदाहरण का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कैसे रूस इस संघर्ष में विदेशी कर्मियों पर ज़्यादा निर्भर होता जा रहा है। उन्होंने दूसरे देशों के साथ यूक्रेन के बढ़ते रक्षा सहयोग, खासकर ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में का भी ज़िक्र किया। ज़ेलेंस्की ने कहा कि कीव ने फ़िनलैंड के साथ ड्रोन समझौता और ऑस्ट्रेलिया के साथ सुरक्षा समझौता किया है, जिसमें ड्रोन भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन कनाडा के साथ एक अलग ड्रोन डील की तैयारी कर रहा है।
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कठिन सर्दियों की चेतावनी
ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी कि यूक्रेन, सर्दियों के दौरान रूस की हीटिंग और एनर्जी सुविधाओं पर हमला करके, अपने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर रूसी हमलों का जवाब दे सकता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लोग समझते हैं कि आने वाली सर्दियाँ मुश्किल हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि यूक्रेन पर हमलों के जवाब में कीव रूस को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब वॉशिंगटन, रूस और यूक्रेन के बीच एक ऐसी समझ बनाने की कोशिश कर रहा है जिससे वे एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोक सकें। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन का मकसद रूस की ईंधन सप्लाई को खत्म करने के बजाय युद्ध के लिए फंड जुटाने की उसकी क्षमता को कम करना है।
इधर जिनपिंग ने अमेरिका में किया लैंड, उधर सैटेलाइट इमेज ने कर दिया चीन के परमाणु वारहेड पर बड़ा खुलासा!
चीन देश भर में कई जगहों पर अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है। परमाणु रिसर्च, हथियार बनाने और टेस्टिंग से जुड़ी सुविधाओं में नए निर्माण और अपग्रेड की खबरें हैं। द टेलीग्राफ ने सैटेलाइट तस्वीरों और परमाणु विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट दी है कि सात जगहों पर गतिविधियां देखी गई हैं: पिंगटोंग, ज़िटोंग, लोप नूर, जिउक्वान, मियानयांग, जिंटा और गुआंगयुआन। यह निर्माण कार्य चीन के परमाणु हथियार इंफ्रास्ट्रक्चर के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सरकारी दौरे पर वाशिंगटन में हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करने वाले हैं। अमेरिका पहुंचने के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को "प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार" होना चाहिए। उन्होंने सहयोग, संतुलित प्रतिस्पर्धा और मतभेदों को संभालने लायक रखने पर आधारित स्थिर रिश्ते की वकालत की।
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सैटेलाइट तस्वीरों से क्या पता चलता है?
रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सात अलग-अलग जगहों पर निर्माण और अपग्रेड का काम दिखाई दे रहा है। मध्य चीन के पिंगटोंग में अखबार द्वारा बताए गए विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण प्लूटोनियम पिट्स (परमाणु हथियारों के मुख्य हिस्से) बनाने वाली सुविधाओं से जुड़ा है। सिचुआन प्रांत के ही ज़िटोंग में भी नए बंकर और दूसरी संरचनाएं बनाए जाने की खबर है। लोप नूर और जिउक्वान की साइटें चीन के न्यूक्लियर टेस्टिंग और मिलिट्री प्रोग्राम से जुड़ी हैं, जबकि मियानयांग में न्यूक्लियर रिसर्च की बड़ी सुविधाएं मौजूद हैं। खबरों के मुताबिक जिंटा और गुआंगयुआन में भी निर्माण कार्य देखा गया है। सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित पिछली रिसर्च में सिचुआन में चीन की न्यूक्लियर सुविधाओं के काफी विस्तार का भी पता चला है। फरवरी में छपी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच रिपोर्ट में ज़िटोंग और पिंगटोंग में नए निर्माण और मियानयांग में एक बड़ी लेज़र सुविधा के विस्तार के बारे में बताया गया था।
चीन का न्यूक्लियर जखीरा कितना बड़ा है?
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) का अनुमान है कि चीन के पास अभी लगभग 620 न्यूक्लियर वॉरहेड हैं, जिससे उसका जखीरा न्यूक्लियर हथियार रखने वाले नौ देशों में तीसरा सबसे बड़ा बन गया है। FAS ने कहा कि भविष्य के डिलीवरी सिस्टम के लिए और वॉरहेड बनाए जा रहे हैं। इस अनुमान का मतलब यह नहीं है कि सभी 620 वॉरहेड तैनात हैं और तुरंत इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। FAS का कहना है कि माना जाता है कि चीन के लगभग सभी न्यूक्लियर वॉरहेड उनके डिलीवरी सिस्टम से अलग रखे गए हैं, जो अमेरिका और रूस की ऑपरेशनल रूप से तैनात सेनाओं के सिस्टम से अलग है।
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क्या चीन और ज़्यादा परमाणु मिसाइलें बना रहा है?
2026 FAS न्यूक्लियर नोटबुक के अनुसार, चीन अपनी ज़मीन-आधारित परमाणु ताक़त को लगातार बढ़ा रहा है। देश सॉलिड-फ्यूल वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) के लिए साइलो (मिसाइल रखने के भूमिगत ठिकाने) के तीन बड़े नए क्षेत्रों पर काम कर रहा है, साथ ही अपनी लिक्विड-फ्यूल वाली DF-5 ICBMs के लिए भी अतिरिक्त साइलो बना रहा है। FAS का कहना है कि चीन नए ICBM वेरिएंट और अन्य एडवांस्ड स्ट्रैटेजिक डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहा है, और साथ ही अपनी दोहरी क्षमता वाली DF-26 इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल फ़ोर्स का भी विस्तार कर रहा है। इसलिए, चीन के परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में सिर्फ़ मिसाइलों की संख्या बढ़ाना ही शामिल नहीं है। इसमें एक व्यापक और अधिक विविध परमाणु ताक़त को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी सुविधाएं, रिसर्च और प्रोडक्शन क्षमताएं भी शामिल हैं।
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