पॉक्सो मामले में Chennai पुलिस ने कारोबारी R Veeramani के ठिकानों पर की छापेमारी
केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने नाबालिग के यौन शोषण के मामले में प्रमुख ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि और उसके सहयोगियों से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी ली तथा इस दौरान मोबाइल फोन और डिजिटल दस्तावेज जब्त किए। पुलिस ने यहां बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह मामला शहर में स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के स्वयंसेवक द्वारा 2025 में दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है।
एक अज्ञात व्यक्ति ने एक ‘पेनड्राइव’ सौंपी थी, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा एक नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न किए जाने का वीडियो था। यह घटना वीरमणि की सहयोगी शांति के आवास पर हुई थी। केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) के अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले दस्ते द्वारा की गई जांच के बाद संदिग्ध की पहचान जेम ग्रेनाइट्स के प्रमुख वीरमणि के रूप में हुई।
पुलिस ने 29 अगस्त, 2026 को बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित प्रावधानों के तहत वीरमणि (84) और उसके सहयोगियों शांति तथा महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई नाबालिग लड़कियों को उस घर में लाया गया था और वीरमणि ने कथित तौर पर उनका यौन शोषण किया। इसके बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं ने पहचान की गई पीड़िताओं के बयान भी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए। इसके बाद 22 सितंबर, 2026 को एक अन्य संदिग्ध गणेशन को गिरफ्तार किया गया, जिसने वीरमणि की कंपनी में 23 वर्षों तक काम किया था। उस पर आपत्तिजनक वीडियो को अपने पास रखने और इसकी जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नहीं देने का आरोप है।
उसे गिरफ्तार कर पुझल केंद्रीय जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान गणेशन के कबूलनामे के आधार पर सीसीबी की टीम ने 23 सितंबर को पांच ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें गोपालपुरम स्थित वीरमणि का कार्यालय और टी. नगर स्थित उसका आवास भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। जब्त सामग्री के आधार पर मामले की आगे जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि जांच अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कुछ कारोबारी संस्थाओं और वीरमणि के बीच महत्वपूर्ण धनराशि का लेन-देन तथा जमीन का हस्तांतरण हुआ था, ताकि अहम सबूतों को छिपाया जा सके और जांच को भटकाया जा सके।
वीरमणि के खिलाफ कई नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण के मामले में गिरफ्तारी के बाद तमिलनाडु में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है।
गृह मंत्रालय ने States और UTs को भेजा पत्र, BNS की धारा 111 से टूटेगा तस्करों का सिंडिकेट
गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया है कि वे मानव तस्करी से निपटने को प्राथमिकता दें। इसके लिए उन्हें तीन नए आपराधिक कानूनों वाले 'नवीन न्याय संहिता' को पूरी तरह लागू करना होगा और कानून लागू करने की कोशिशों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार की इस अहम प्राथमिकता से निपटने में राज्य के नेतृत्व और ज़िम्मेदारी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
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MHA के महिला सुरक्षा विभाग ने 28 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को एक विस्तृत पत्र भेजा। इसमें अधिकारियों से कहा गया कि वे 'भारतीय न्याय संहिता, 2023', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023' के प्रावधानों को पूरी प्रशासनिक तत्परता के साथ अधिकतम क्षमता तक लागू करें। पत्र में कहा गया है कि इन कानूनों को लागू करने का चरण पूरा हो चुका है, और अब नई आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत इन्हें लागू करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मुख्य ज़िम्मेदारी है।
नोट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भले ही केंद्र सरकार ने एक व्यापक कानूनी और डिजिटल ढांचा तैयार किया है, लेकिन इन सुधारों की सफलता राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मज़बूत नेतृत्व और उपलब्ध साधनों के सही इस्तेमाल पर निर्भर करती है। डिजिटल साधनों से समर्थित यह आधुनिक कानूनी ढांचा, आपराधिक न्याय प्रणाली में हुए बदलावों के बाद शोषण के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ज़रूरी सटीकता प्रदान करता है।
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MHA ने मानव तस्करी करने वालों पर मुक़दमा चलाने और उनके गिरोहों को खत्म करने के कानूनी प्रावधानों पर ज़ोर दिया। इसमें 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 111 का ज़िक्र किया गया, जो आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाती है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि मानव तस्करी शायद ही कभी कोई अलग-थलग अपराध हो; इसे आम तौर पर संगठित गिरोह चलाते हैं। जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नेटवर्क को खत्म करने के लिए इस धारा का इस्तेमाल करें। उन्हें सिर्फ़ छोटे-मोटे अपराधियों तक सीमित न रहकर, गिरोह की संपत्ति ज़ब्त करने और मुख्य आयोजकों व फाइनेंसरों को बेअसर करने की दिशा में भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो अक्सर वैध कारोबार की आड़ में छिपकर काम करते हैं।
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