फिजिकल हेल्थ- अपेंडिसाइटिस क्या है?:क्या अपेंडिक्स हो सकता है जानलेवा, क्या है इसका इलाज, सर्जरी कब जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर
हाल ही में फिल्ममेकर किरण राव की अपेंडिक्स की सर्जरी हुई। उनका अपेंडिक्स बढ़कर 12mm का हो गया था। इसके लिए सर्जरी जरूरी थी। सर्जरी के बाद अब वह रिकवर कर रही हैं। इस कंडीशन को अपेंडिसाइटिस कहते हैं। समय पर इसका डायग्नोसिस और इलाज बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इलाज में देर होने पर यह खतरनाक हो सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनाटॉमी रेडियोलॉजी एंड सर्जरी (IJARS) में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, आमतौर पर यह समस्या 10 से 30 साल की उम्र में होती है। इसके ज्यादातर मामलों में इंमरजेंसी सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम अपेंडिक्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- अपेंडिक्स क्या है? जवाब- अपेंडिक्स एक छोटी उंगली के आकार का ट्यूब जैसा अंग होता है। यह बड़ी आंत के सिरे से जुड़ा होता है, जो पेट के नीचे की तरफ दाईं ओर होता है। पहले माना जाता था कि ये अंग किसी काम का नहीं है। अब कई नई रिसर्च में पता चला है कि- सवाल- अपेंडिक्स का हमारे शरीर में क्या काम है? जवाब- अपेंडिक्स डाइजेस्टिव सिस्टम का मुख्य अंग नहीं है। इसके बावजूद यह आंतों में मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया को सुरक्षित रखने में मदद करता है। डायरिया या किसी भी इन्फेक्शन के बाद यह हेल्दी गट बैक्टीरिया को फिर से बढ़ाने में मदद करता है। अपेंडिक्स इम्यूनिटी भी मजबूत करता है। सवाल- अपेंडिक्स क्यों बढ़ जाता है? क्या इसे ही अपेंडिसाइटिस कहते हैं? जवाब- अपेंडिक्स बढ़ने का मतलब है कि इसमें इंफ्लेमेशन हो गया है। इंफ्लेमेशन आमतौर पर ब्लॉकेज की वजह से होता है। यह ब्लॉकेज मल, म्यूकस या किसी संक्रमण से हो सकता है। ब्लॉकेज होने पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। सवाल- अपेंडिसाइटिस के लक्षण क्या हैं? जवाब- इसका मुख्य लक्षण पेट में दर्द है, जो नाभि के आसपास शुरू होता है। कुछ घंटों में यह दर्द पेट के दाईं ओर नीचे की तरफ फैलता जाता है। इसका दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है। सवाल- अपेंडिसाइटिस का इलाज क्या है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझें– सवाल- किन कंडीशंस में अपेंडिक्स की सर्जरी जरूरी होती है? जवाब- कुछ मामलों को छोड़कर डॉक्टर ज्यादातर अपेंडिसाइटिस केसेज में सर्जरी की ही सलाह देते हैं। अगर जांच में तीव्र यानी एक्यूट अपेंडिसाइटिस पता चले और पेट के नीचे की तरफ दाईं ओर दर्द लगातार बढ़ रहा हो तो सर्जरी ही सुरक्षित विकल्प है। इन सभी मामलों में सर्जरी ही बेहतर विकल्प है- सवाल- अपेंडिक्स बढ़ने पर क्या कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं? जवाब- अपेंडिक्स बढ़ने के बाद समय पर इलाज न हो तो यह फट भी सकता है। यह कंडीशन जानलेवा है। इसके सभी कॉम्प्लिकेशन ग्राफिक में देखिए- सवाल- अपेंडिसाइटिस से लाइफ थ्रेटनिंग कंडीशन क्यों बन जाती है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझें- सवाल- क्या हमारी लाइफस्टाइल से अपेंडिसाइटिस का जोखिम बढ़ता है? जवाब- हां, कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं। जैसेकि- हालांकि, अपेंडिसाइटिस के पीछे खराब लाइफस्टाइल एकमात्र वजह नहीं है। सवाल- हम लाइफस्टाइल में क्या जरूरी बदलाव करें कि अपेंडिसाइटिस न हो? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझें– सवाल- अगर कम उम्र में अपेंडिसाइटिस होता है तो क्या इसका कोई जेनेटिक कनेक्शन भी हो सकता है? जवाब- इस बारे में सभी साइंटिफिक स्टडीज एकमत नहीं हैं। हमें और रिसर्च की जरूरत है। अब तक मौजूद इंफॉर्मेशन इस प्रकार है– ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से ब्रेन जल्दी बूढ़ा होता है:‘शुगर फ्री’ से सावधान, जानें इसके हेल्थ रिस्क, बता रहे हैं डॉक्टर अब आर्टिफिशियल स्वीटनर्स हमारी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। किसी भी शुगर-फ्री प्रोसेस्ड फूड, प्रोटीन पाउडर, फ्लेवर्ड योगर्ट या डाइट सोडा काे उठाकर देखें तो उसके इंग्रीडिएंट्स में कोई-न-कोई आर्टिफिशियल स्वीटनर जरूर मिलेगा। आगे पढ़िए...
जरूरत की खबर- न्यूट्रिशन का खजाना हल्दी-दूध:जानें 13 जादुई हेल्थ बेनिफिट्स, बनाने का सही तरीका, किन्हें नहीं पीना चाहिए
पीढ़ियों से हमारी दादी-नानी हल्दी-दूध को सेहत का खजाना बताती आई हैं। सर्दी-खांसी हो, शरीर में दर्द हो, थकान महसूस हो या नींद ठीक से न आती हो तो रात में एक कप गुनगुना हल्दी-दूध राहत देता है। ये एक ऐसा ट्रेडिशनल ड्रिंक है, जो 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। न्यूट्रिशन साइंस भी हल्दी-दूध के हेल्थ बेनिफिट्स को सपोर्ट करता है। साल 2022 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, हल्दी में 'करक्यूमिन' नामक एक पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट होता है। यह शरीर की कोशिकाओं को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। साथ ही बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी देता है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम हल्दी-दूध के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- हल्दी–दूध में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- हल्दी में मुख्य रूप से करक्यूमिन पाया जाता है, जो एक पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी तत्व है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैंगनीज, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन C और विटामिन B6 भी थोड़ी मात्रा होता है। ये न्यूट्रिएंट्स इम्यूनिटी मजबूत बनाने और शरीर में इंफ्लेमेशन कम करने में मदद करते हैं। वहीं दूध न्यूट्रिशन का रिच सोर्स है। इसमें हाई प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D, विटामिन B12, फॉस्फोरस और पोटेशियम होता है। ये न्यूट्रिएंट्स हड्डियों को मजबूत बनाने, मसल्स और नर्व सिस्टम के लिए जरूरी होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से हल्दी-दूध की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- हल्दी-दूध के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- हल्दी और दूध दोनों ही अपने-अपने गुणों के कारण सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। हल्दी शरीर में इंफ्लेमेशन कम करने, इम्यूनिटी मजबूत करने और इन्फेक्शन से लड़ने में सपोर्ट करती है। वहीं दूध जोड़ों के दर्द और मसल रिकवरी में सहायक होता है। सर्दी-खांसी में राहत देता है और नींद की क्वालिटी सुधारने में मदद करता है। साथ ही यह पाचन को सपोर्ट करता है और शरीर को अंदर से हील करने में मदद करता है। हल्दी-दूध में दालचीनी, अदरक या कालीमिर्च मिलाने से इनके पोषक तत्व और बढ़ जाते हैं। इसे नियमित पीना सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझिए- सवाल- क्या डायबिटिक लोग हल्दी-दूध पी सकते हैं? जवाब- डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (लखनऊ) की सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि डायबिटिक लोग हल्दी-दूध पी सकते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन ब्लड शुगर कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद कर सकता है। लेकिन ध्यान रखें, इसमें चीनी बिल्कुल न मिलाएं। लो-फैट या स्किम्ड दूध ही इस्तेमाल करें। दरअसल, दूध में नेचुरल शुगर (लैक्टोज) होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लें। साथ ही ब्लड शुगर की नियमित जांच जरूर कराएं। इसे अपनी डेली डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सवाल- क्या बच्चों को हल्दी-दूध देना चाहिए? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि बच्चों को हल्दी-दूध दिया जा सकता है। यह इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है। सर्दी-खांसी में राहत देता है और बोन हेल्थ को सपोर्ट करता है। हालांकि बच्चों को सीमित मात्रा में ही दें। 1 साल से छोटे बच्चों को न दें। एलर्जी या कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सवाल- हल्दी-दूध पीने का सही समय क्या है? जवाब- इसे रात में पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह मांसपेशियों को आराम देता है। दर्द और सूजन में राहत देता है। नींद की क्वालिटी बेहतर बनाता है। सोने से आधे-एक घंटे पहले पिएं। खाली पेट लेने से बचें। सवाल- हल्दी-दूध बनाने का सही तरीका क्या है? जवाब- हल्दी-दूध को ‘गोल्डन मिल्क’ कहा जाता है। इसे बनाने का तरीका बहुत आसान है। इसके लिए सही मात्रा और तरीके का ध्यान रखना जरूरी है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए- सवाल- एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में कितना हल्दी-दूध पीना चाहिए? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में 1 कप हल्दी-दूध पर्याप्त है। हल्दी की मात्रा आधे चम्मच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा हल्दी से पेट में जलन हो सकती है। सवाल- क्या हल्दी-दूध पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं? जवाब- हां, कुछ मामलों में हल्दी-दूध के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। यह आमतौर पर ज्यादा मात्रा में लेने पर होते हैं। जैसेकि- सवाल- किन लोगों काे हल्दी-दूध नहीं लेना चाहिए? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि कुछ लोगों को हल्दी-दूध लेने से बचना चाहिए। जैसेकि- .......................... जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- इंस्टाग्राम पर दावा, अंडे से होता कैंसर: रील्स देखकर राय न बनाएं, न्यूट्रिशनिस्ट से जानें अंडे के हेल्थ बेनिफिट्स अंडे को लेकर समय-समय पर कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि बाजार में बिकने वाले अंडों में कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाए जा रहे हैं। ऐसे दावों ने आम लोगों के मन में भ्रम पैदा कर दिया। पूरी खबर पढ़िए...
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