कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, खारिज हुई याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के मामले में दी गई 10 साल की सजा को निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया है. इस फैसले के साथ ही सेंगर को जेल में ही रहना होगा और उन्हें फिलहाल किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी.
क्या है मामला?
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को पुलिस ने अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उनकी हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. बाद में जांच में यह सामने आया कि पीड़िता के पिता के साथ पुलिस कस्टडी में मारपीट हुई थी. इस मामले में कुलदीप सेंगर पर साजिश रचने और प्रभाव का इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे.
निचली अदालत ने सुनवाई के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी. सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा निलंबन की याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने गंभीरता को देखते हुए उसे खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामला अत्यंत संवेदनशील और गंभीर है, जिसमें कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल उठते हैं. ऐसे में सजा को सस्पेंड करना उचित नहीं है. अदालत के इस फैसले को पीड़िता और उसके परिवार के लिए बड़ी न्यायिक राहत माना जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में बनेगा भव्य राम मंदिर, जानें इसकी लागत और खासियत
Ram Temple in Bengal: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर चर्चा भी तेज होती जा रही है. एक ओर मुर्शिदाबाद के बेलदांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर बयान सामने आए, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया गया. इसी बीच नदिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ की अवधारणा पर आधारित एक भव्य राम मंदिर बनाने की योजना ने राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है.
क्या है ‘बंगाली राम’ मंदिर की अवधारणा?
प्रस्तावित राम मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के तौर पर विकसित करने की योजना है. यह मंदिर 15वीं शताब्दी के महान कवि कृतिबास ओझा की परंपरा को समर्पित होगा, जिन्होंने संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ के रूप में किया था. यह ग्रंथ आज भी बंगाली समाज में श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का आधार माना जाता है. इसी विरासत को केंद्र में रखकर शांतिपुर में राम मंदिर के साथ एक हेरिटेज सेंटर बनाने की तैयारी की जा रही है.
श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका
इस परियोजना का जिम्मा श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट ने संभाला है, जो एक पंजीकृत धार्मिक और जनकल्याणकारी संस्था है. रविवार को ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए जमीन मापने का अंतिम सर्वेक्षण पूरा किया, जिसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है. ट्रस्ट वर्ष 2017 से इस योजना पर काम कर रहा है और इसके तहत 2028 तक लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
बीजेपी विधायक की अगुवाई, लेकिन राजनीति से दूरी का दावा
ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक, वर्तमान में बीजेपी नेता अरिंदम भट्टाचार्य का कहना है कि यह परियोजना पूरी तरह सांस्कृतिक है, न कि चुनावी. उनके मुताबिक, शांतिपुर भक्ति आंदोलन की ऐतिहासिक भूमि रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाल की लोकभावना से जोड़ा. उन्होंने बताया कि मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासियों लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी की ओर से दान की गई है.
शैक्षणिक और सामाजिक केंद्र की भी योजना
इस मंदिर परिसर को बहुआयामी स्वरूप देने की तैयारी है. नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इसका आधिकारिक संरक्षक बनाया गया है. परिसर में सांस्कृतिक केंद्र के साथ मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और एक शोध संस्थान स्थापित करने की भी योजना है. भूमि दानकर्ता पूजा बनर्जी के अनुसार, कई अन्य लोग भी इस परियोजना के लिए जमीन देने को इच्छुक हैं.
समर्थन और सवाल दोनों साथ
स्थानीय निवासियों का एक बड़ा वर्ग इस परियोजना को शांतिपुर की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहा है. वहीं आलोचक इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि ट्रस्ट का दावा है कि यह पहल केवल विरासत और संस्कृति के संरक्षण के लिए है. ऐतिहासिक रूप से भक्ति आंदोलन और कीर्तन परंपरा का केंद्र रहे शांतिपुर में यह ‘बंगाली राम मंदिर’ भविष्य में धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है.
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