पश्चिम बंगाल में बनेगा भव्य राम मंदिर, जानें इसकी लागत और खासियत
Ram Temple in Bengal: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर चर्चा भी तेज होती जा रही है. एक ओर मुर्शिदाबाद के बेलदांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर बयान सामने आए, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया गया. इसी बीच नदिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ की अवधारणा पर आधारित एक भव्य राम मंदिर बनाने की योजना ने राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है.
क्या है ‘बंगाली राम’ मंदिर की अवधारणा?
प्रस्तावित राम मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के तौर पर विकसित करने की योजना है. यह मंदिर 15वीं शताब्दी के महान कवि कृतिबास ओझा की परंपरा को समर्पित होगा, जिन्होंने संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ के रूप में किया था. यह ग्रंथ आज भी बंगाली समाज में श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का आधार माना जाता है. इसी विरासत को केंद्र में रखकर शांतिपुर में राम मंदिर के साथ एक हेरिटेज सेंटर बनाने की तैयारी की जा रही है.
श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका
इस परियोजना का जिम्मा श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट ने संभाला है, जो एक पंजीकृत धार्मिक और जनकल्याणकारी संस्था है. रविवार को ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए जमीन मापने का अंतिम सर्वेक्षण पूरा किया, जिसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है. ट्रस्ट वर्ष 2017 से इस योजना पर काम कर रहा है और इसके तहत 2028 तक लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
बीजेपी विधायक की अगुवाई, लेकिन राजनीति से दूरी का दावा
ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक, वर्तमान में बीजेपी नेता अरिंदम भट्टाचार्य का कहना है कि यह परियोजना पूरी तरह सांस्कृतिक है, न कि चुनावी. उनके मुताबिक, शांतिपुर भक्ति आंदोलन की ऐतिहासिक भूमि रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाल की लोकभावना से जोड़ा. उन्होंने बताया कि मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासियों लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी की ओर से दान की गई है.
शैक्षणिक और सामाजिक केंद्र की भी योजना
इस मंदिर परिसर को बहुआयामी स्वरूप देने की तैयारी है. नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इसका आधिकारिक संरक्षक बनाया गया है. परिसर में सांस्कृतिक केंद्र के साथ मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और एक शोध संस्थान स्थापित करने की भी योजना है. भूमि दानकर्ता पूजा बनर्जी के अनुसार, कई अन्य लोग भी इस परियोजना के लिए जमीन देने को इच्छुक हैं.
समर्थन और सवाल दोनों साथ
स्थानीय निवासियों का एक बड़ा वर्ग इस परियोजना को शांतिपुर की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहा है. वहीं आलोचक इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि ट्रस्ट का दावा है कि यह पहल केवल विरासत और संस्कृति के संरक्षण के लिए है. ऐतिहासिक रूप से भक्ति आंदोलन और कीर्तन परंपरा का केंद्र रहे शांतिपुर में यह ‘बंगाली राम मंदिर’ भविष्य में धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है.
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स्पेन ट्रेन हादसा: मृतकों की संख्या 35 पार, मंत्री टक्कर से 'हैरान'
मैड्रिड, 19 जनवरी (आईएएनएस)। स्पेन के परिवहन मंत्री, ऑस्कर पुएंते ने हाई-स्पीड ट्रेनों के टक्कर पर हैरानी जाहिर की है। उन्होंने इसे अजीब करार दिया। स्पेन के दक्षिणी हिस्से स्थित कॉर्डोबा शहर के पास रविवार देर रात (स्थानीय समयानुसार) एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ, जिसमें दो हाई-स्पीड ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर हो गई। अब तक 39 लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर दी गई है।
पुएंते ने मैड्रिड के अटोचा स्टेशन पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि यह सच में अजीब है कि सीधे ट्रैक पर ट्रेन बेपटरी हो गई। उन्होंने बताया कि पटरी के इस हिस्से को मई में ही ठीक किया गया था। पुएंते ने कहा कि मरने वालों और घायलों में से ज्यादातर लोग दूसरी ट्रेन के पहले दो डिब्बों में थे।
मंत्री के मुताबिक मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, मरने वालों की संख्या पहले ही 39 तक पहुंच गई है और यह फाइनल नहीं है। मैं बहुत मुश्किल हालात में पूरी रात रेस्क्यू टीमों के शानदार काम के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूं।
इस बीच मलागा से यात्रा ऑपरेट करने वाली प्राइवेट रेल कंपनी इर्यो ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर कहा है कि उसे गंभीर रेलवे दुर्घटना पर बहुत दुख है। कंपनी ने बताया कि रविवार रात मैड्रिड की यात्रा शुरू होने पर ट्रेन में कुल 289 यात्री, 4 क्रू मेंबर, और 1 ड्राइवर थे।
द गार्डियन ने सरकारी प्रसारक आरएनई के एक पत्रकार (जो ट्रेन में यात्रा कर रहे थे) के हवाले से भयानक मंजर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि टक्कर का झटका भूकंप जैसा लगा। डिब्बों की खिड़कियां तोड़ने और बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी हथौड़ों का इस्तेमाल किया गया।
वहीं, कारमेन नाम की एक महिला ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि वह मालागा से मैड्रिड जाने वाली ट्रेन में थी। उन्होंने कहा, कोर्डोबा से निकलने के दस मिनट बाद, ट्रेन बहुत ज्यादा हिलने लगी, और हमारे पीछे छठे कोच से पटरी से उतर गई। अंधेरा छा गया था।
--आईएएनएस
केआर/
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