अफसरों ने मदरसा बताकर बिल्डिंग पर बुलडोजर चलाया:बैतूल के अब्दुल बोले- सपना टूटा, अब कभी स्कूल नहीं खोलूंगा; ये बच्चों का भविष्य था
मुझे अब स्कूल नहीं खोलना। मैंने यह नहीं सोचा था कि मेरी स्कूल खोलने की छोटी सी बात को लेकर इतना बड़ा बवाल हो जाएगा। मैं तो बस कुछ बेहतर करना चाहता था। अब अगर सभी सहमत भी हों, तो भी मैं स्कूल नहीं खोलना चाहता क्योंकि मैं बेवजह की बातों में नहीं उलझना चाहता। भास्कर से बात करते हुए बैतूल के रहने वाले अब्दुल नईम की आंखें दो बार भर आईं। डबडबाई आंखों से आगे कहा, 'अब इस बारे में मैं कोई बात नहीं करना चाहता।' नईम की आवाज में एक सपना टूटने की हताशा और बेवजह के विवाद में घसीटे जाने की तकलीफ साफ सुनाई दी। दरअसल, बैतूल जिले के धाबा ग्राम पंचायत के रहने वाले अब्दुल नईम ने अपने गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अपनी जमा-पूंजी और उधार के पैसों से एक स्कूल की बिल्डिंग बनाई थी। प्रशासन ने उनके सपनों के इस स्कूल पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के पीछे यह तर्क दिया गया कि वहां स्कूल नहीं, बल्कि एक मदरसे का अवैध निर्माण किया जा रहा था। इस कार्रवाई के बाद ये मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया। कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कार्रवाई का विरोध किया। वहीं प्रशासन अब मामले में सफाई दे रहा है कि कार्रवाई पंचायत की तरफ से की गई थी। क्या सच में वहां मदरसा बन रहा था? इतनी जल्दबाजी में बुलडोजर कार्रवाई क्यों की गई? और इस पूरी घटना पर गांव वाले क्या सोचते हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए भास्कर की टीम पहुंची धाबा ग्राम पंचायत। पढ़िए रिपोर्ट... कमरों के बाहर क्लास रूम नंबर, भीतर फर्नीचर बैतूल जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर, महाराष्ट्र की सीमा के पास स्थित धाबा गांव में दाखिल होने पर माहौल सामान्य लगता है, लेकिन सड़कों पर एक खामोशी पसरी है। लोगों से जब उस स्कूल के बारे में पूछा गया जिस पर बुलडोजर चला, तो एक ग्रामीण हमें उस जगह तक ले गए। खेतों के बीच, लगभग 10 से 12 कमरों की एक नई बिल्डिंग खड़ी है, लेकिन बिल्डिंग के सामने के तीन छज्जे टूटकर जमीन पर पड़े हैं। बिल्डिंग का एक किनारा भी बुरी तरह टूटा है। हर कमरे के बाहर के.जी. से लेकर आठवीं कक्षा तक के बोर्ड लगे हुए हैं, जो इस बात का साफ संकेत देते हैं कि यह एक स्कूल के रूप में ही तैयार किया जा रहा था। कमरों पर ताले लगे थे, लेकिन टूटी खिड़कियों से झांकने पर अंदर का नजारा साफ दिखाई देता है। हर कमरे में बच्चों के बैठने के लिए टेबल-कुर्सियां करीने से रखी हुई हैं और दीवारों पर पढ़ाई में काम आने वाले रंग-बिरंगे चार्ट टंगे हैं। भवन के सामने एक बड़ा सा मैदान है, जिसे खेल के मैदान के रूप में विकसित किया जा रहा था। दो तरफ फेंसिंग लगी है और फेंसिंग में इस्तेमाल होने वाली जाली का एक बंडल अब भी वहीं जमीन पर पड़ा है। साथ ही, निर्माण कार्य से जुड़ा अन्य सामान भी बिखरा पड़ा है, मानो किसी ने एक पल में सब कुछ तहस-नहस कर दिया हो। ग्रामीण बोले- ये मदरसा नहीं, हमारे बच्चों का भविष्य था गांव के लोगों से बात करने पर प्रशासन के दावों के ठीक विपरीत एक तस्वीर उभरती है। गांव की सरपंच रामरति कंगाले के पति मदन कंगाले बताते हैं, ‘एक दिन अचानक एसडीएम और तहसीलदार साहब गांव आए और हमसे कहने लगे कि तुम्हारे गांव में मदरसा बन रहा है, चलो उसे देखकर आते हैं। वह हमें इसी स्कूल के सामने लेकर आए और पूछने लगे कि इसे तुम लोगों ने एनओसी दी है क्या? हमने कहा कि कोई एनओसी नहीं दी है, तो उन्होंने कहा कि इसे नोटिस क्यों नहीं दिया? नोटिस दो। मदन कंगाले आगे कहते हैं, अधिकारी इसे मदरसा बता रहे थे, लेकिन जब हम मौके पर पहुंचे तो वहां कोई मदरसा नहीं था। वह नईम भाई की निजी जमीन थी और वह अपना भवन बना रहे थे, इसलिए हमने पहले ध्यान नहीं दिया। मौके पर स्कूल का ही काम चल रहा था। कलेक्टर ने हमसे कहा- तुम खुद स्कूल तोड़ लो गांव के उपसरपंच संदीप उईके कहते हैं, शनिवार, 10 जनवरी को एसडीएम और तहसीलदार अचानक गांव आए और मदरसे वाली बात कही। उन्होंने काम बंद करने का आदेश दिया। रविवार शाम 7:30 बजे पंचायत सचिव ने अब्दुल नईम को नोटिस थमाया कि सोमवार दोपहर 3 बजे तक भवन खुद गिरा लें, वर्ना बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद 12 जनवरी को नईम ने पंचायत से भवन निर्माण की अनुमति मांगी, जिस पर सरपंच ने हस्ताक्षर भी कर दिए। संदीप उईके उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, ‘13 जनवरी को मैं, अब्दुल नईम और गांव के कई लोग कलेक्टर की जनसुनवाई के लिए जा रहे थे, ताकि हम स्कूल को टूटने से बचाने की गुहार लगा सकें। रास्ते में हमें पंचायत सचिव पवन तिवारी ने कई बार फोन करके रोकने की कोशिश की। जब हम नहीं माने, तो खेड़ी पुलिस स्टेशन पर हमारी गाड़ियों को रोक लिया गया। हमें ठीक 12:30 बजे छोड़ा गया, जब जनसुनवाई का समय खत्म हो चुका था। इसके बाद भी हम कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। गांव के बच्चे पढ़ने बाहर नहीं जाते उपसरपंच का दर्द उनकी बातों में साफ झलकता है। हम तो शुरू से ही इस पक्ष में थे कि यहां स्कूल बने। गरीब लोग जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, उन्हें बाहर नहीं भेजना पड़ेगा। उनका किराया बचेगा, उतने में तो फीस जमा हो जाएगी। हम आज भी चाहते हैं कि नईम जी को एनओसी दी जाए और स्कूल फिर से शुरू हो। गांव के ही एक अन्य निवासी, दिनेश कुमार उईके कहते हैं, यह तो हमारे गांव की सुविधा के लिए स्कूल खुल रहा था। हम सब खुश थे कि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा गांव में ही मिलेगी। बाहर भेजने का डर और पैसों की समस्या, दोनों कम होगी। गांव का हर व्यक्ति चाहता था कि यह स्कूल बने। पता नहीं किसने और क्यों यह अफवाह फैलाई कि यहां मदरसा बन रहा है। अब्दुल बोले- बच्चों के लिए सोचा था, अब सब खत्म कैमरे पर बात करने से हिचकते हुए अब्दुल नईम ने टूटे मन से अपनी कहानी बताई- मेरे तीन बच्चे हैं। गांव में अच्छी पढ़ाई की सुविधा न होने के कारण मेरी पत्नी और बच्चे 25 किलोमीटर दूर रहते हैं। मैं रोज उनसे मिलने भी नहीं जा पाता, तभी मुझे ख्याल आया कि क्यों न गांव में ही एक स्कूल खोला जाए। मेरे बच्चों के साथ-साथ गांव के अन्य बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिल सके। उन्होंने बताया, मैंने 2023 में अपने भाई से जमीन खरीदी, उसका डायवर्शन कराया और स्कूल बनाने लगा। इसी साल दिसंबर में मैंने आठवीं तक की मान्यता के लिए एमपी बोर्ड में आवेदन भी कर दिया था। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह बात इतनी बढ़ जाएगी। मेरे बहुत पैसे खर्च हो गए। मैंने दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार लेकर यह काम शुरू किया था। लेकिन अब मैं यह स्कूल नहीं खोलूंगा। कलेक्टर बोले- हमने नहीं पंचायत ने चलाया बुलडोजर इस पूरे मामले पर जब बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने कहा, यह मामला मेरे संज्ञान में 13 तारीख को आया, जब अब्दुल नईम कुछ लोगों के साथ कलेक्ट्रेट आए थे। मैं इस मामले की जांच कर रहा हूं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, बताए जाएंगे। बुलडोजर कार्रवाई पर उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा, बुलडोजर कार्रवाई मेरे या एसडीएम की तरफ से नहीं की गई है। यह कार्रवाई तो ग्राम पंचायत ने की थी, जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस और एसडीएम कार्यालय को दी थी। मैं या एसडीएम मौके पर मौजूद नहीं थे। बुलडोजर कार्रवाई के वक्त एसडीएम खुद मौके पर मौजूद कलेक्टर का यह बयान कई गंभीर सवाल खड़े करता है। पहला, अगर पंचायत ने कार्रवाई की, तो पंचायत के प्रतिनिधि (सरपंच, उपसरपंच) उसी समय कलेक्टर के पास कार्रवाई रुकवाने की मांग क्यों कर रहे थे? दूसरा, भास्कर के पास मौजूद वीडियो फुटेज में एसडीएम अजीत मरावी मौके पर साफ दिखाई दे रहे हैं, जहां सरपंच रामरति कंगाले उनसे कार्रवाई रोकने के लिए कह रही हैं। वीडियो में सरपंच कह रही हैं कि "हम नोटिस निरस्त कर देंगे," लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। इस वीडियो और कलेक्टर के बयान के विरोधाभास पर जब कलेक्टर और एसडीएम दोनों से दोबारा उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। ग्राम पंचायत सचिव पवन तिवारी से भी संपर्क नहीं हो सका। 'बुलडोजर न्याय' पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तत्कालीन चीफ जस्टिस बी आर गवई ने इस तरह की कार्रवाइयों पर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि अब्दुल के मामले में क्या हुआ... ये खबर भी पढ़ें... बैतूल में स्कूल गिराने पर उठे सवाल:कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और ओवैसी ने सरकार को घेरा, संचालक ने दिखाई थी NOC बैतूल जिले के भैंसदेही तहसील के ग्राम ढाबा में बिना अनुमति बनाए गए एक स्कूल को प्रशासन द्वारा तोड़े जाने की कार्रवाई के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी प्रतिक्रिया दी है। पढ़ें पूरी खबर...
पाकिस्तान ने बमबारी कर 40 मस्जिदें उड़ाईं, कुरान जलाईं: इस्लाम के नाम पर बने मुल्क की करतूतें बलूच नेता ने दुनिया को बताईं
बलोच नेता मीर यार ने पाकिस्तान सरकार और उसकी फौज पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उसने खुद बलूचिस्तान में 40 से ज्यादा मस्जिदें तबाह की हैं।
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