Uttar Pradesh: बम की सूचना पर विमान को आपात स्थिति में उतारा गया, निरीक्षण में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
दिल्ली से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा जा रही इंडिगो विमानन कंपनी की एक उड़ान में बम होने की सूचना मिलने के बाद विमान को रविवार सुबह लखनऊ हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, हवाई यातायात नियंत्रक (एटीसी) को सुबह लगभग 8.46 बजे इंडिगो की उड़ान 6ई-6650 में बम होने की सूचना मिली। अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलते ही निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विमान का मार्ग परिवर्तित किया गया और उसे सुबह 9.17 बजे आपात स्थिति में लखनऊ हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया। उन्होंने बताया कि विमान के हवाई अड्डे पर उतरने के तुरंत बाद विमान को एक अलग स्थान पर खड़ा किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद विमान का सघन निरीक्षण किया गया और इस दौरान कोई भी विस्फोटक या अन्य संदिग्ध चीज नहीं मिली, जिसके बाद सभी यात्री विमान में फिर से सवार हुए और अनिवार्य सुरक्षा जांच व निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद विमान शाम चार बजकर 40 मिनट पर अपने गंतव्य के लिये रवाना हो गया।
लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान एक टीशू पेपर पर हाथ से लिखा एक नोट मिला, जिस पर ‘प्लेन में बम’ है, लिखा था। पुलिस ने बताया कि विमान में आठ शिशुओं सहित 222 यात्री, दो पायलट और चालक दल के पांच सदस्य सवार थे।
पुलिस के मुताबिक, बम निरोधक दस्ते, सुरक्षा एजेंसियां और हवाई अड्डा अधिकारी विमान की गहन सुरक्षा जांच की। इंडिगो के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा गया, “18 जनवरी 2026 को दिल्ली से बागडोगरा जा रही इंडिगो की उड़ान 6ई 6650 में सुरक्षा संबंधी खतरा महसूस किया गया, जिसकी वजह से विमान की लखनऊ में आपात लैंडिंग करायी गयी।
विवेक ज्ञान से भिन्न होता है: Chief Justice
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि विवेक ज्ञान से भिन्न होता है और उनका मानना है कि विवेक का आशय इस बात को जानने से है कि कानून के अक्षरशः पालन पर कब जोर देना है और कब उस उद्देश्य को समझना है जिसकी पूर्ति के लिए वह कानून बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ज्ञान पुस्तकों, संभवत: कक्षा और प्रशिक्षण से शीघ्रता से प्राप्त किया जा सकता है लेकिन उसके बाद जो कुछ भी होता है वह अनुभव, त्रुटि और निरंतर चिंतन के माध्यम से कहीं अधिक धीरे-धीरे, अक्सर अपूर्ण रूप से आकार लेता है। प्रधान न्यायाधीश इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘विवेक का अर्थ यह जानना है कि कब बोलना है और कब मौन रहना अधिक महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने चार साल के अंतराल के बाद आयोजित दीक्षांत समारोह में कहा, ‘‘यह जानना जरूरी है कि कानून के अक्षरशः पालन पर कब जोर दिया जाए और इसके पीछे के उद्देश्य को समझा जाए।’’
स्नातक और स्नातकोत्तर उत्तीर्ण छात्रों को दीक्षांत समारोह में उनकी डिग्री प्रदान की गई, जिसमें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जे. बागची तथा कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल उपस्थित थे।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां तुरंत राय बन जाती है और बिना इंतजार किए प्रतिक्रिया की उम्मीद की जाती है।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया में विवेकशीलता दुर्लभ हो गई है और इसलिए यह ‘‘अत्यंत मूल्यवान’’ है।
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