Diplomatic Meet: UNGA में अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और जयशंकर की मुलाकात, जानें किन मुद्दों पर हुई बात?
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से इतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले हुई है; वे फ्लोरिडा में G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं, जहाँ पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक भी तय है। दोनों देश व्यापार वार्ता सहित अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डॉ. जयशंकर के आने वाले दिनों में UNGA को संबोधित करने की भी उम्मीद है।
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पीएम मोदी के आगामी विदेशी दौरों की पृष्ठभूमि तैयार
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में भाग लेने पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा बेहद व्यस्त दौर से गुजर रहा है। न्यूयॉर्क पहुंचते ही कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने वैश्विक नेताओं के साथ बैक-टू-बैक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताएं शुरू कर दीं। जयशंकर ने फ्रांस, इक्वाडोर, स्लोवाकिया, हंगरी, यूक्रेन, मोल्दोवा और स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ अहम बैठकें कीं। इसके अलावा उन्होंने नाउरू के राष्ट्रपति से शिष्टाचार भेंट की, P4M बैठक में हिस्सा लिया और यूरोपीय संघ (EU) के मंत्रियों के साथ चर्चा की। मध्य यूरोपीय देशों पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेकिया के समूह 'इंडिया-विसेग्राद' बैठक में भी उन्होंने शिरकत की। मंगलवार को उन्होंने 33 सदस्यीय लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के संगठन (CELAC) के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू किया।
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पीएम मोदी के दिसंबर दौरों की जमीन तैयार करने पर जोर
यूरोपीय नेताओं के साथ चल रही चर्चाओं और इस हफ्ते अमेरिका तथा कनाडा के विदेश मंत्रियों के साथ प्रस्तावित बैठकों को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि ये बैठकें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में ब्रसेल्स, मियामी और ओटावा के आगामी दौरों की रूपरेखा और एजेंडा तैयार करने के मकसद से की जा रही हैं।
शनिवार को महासभा को करेंगे संबोधित
अधिकारियों के मुताबिक, विदेश मंत्री शनिवार 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। तब तक उनका शेड्यूल विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मुद्दों के चलते इसी तरह व्यस्त रहने वाला है।
UNSC में जगह बनाने की कोशिश
भारत अब तक आठ बार UNSC के लिए चुना जा चुका है और ज़्यादातर मौकों पर एशिया-पैसिफ़िक ग्रुप की तरफ़ से उसका नाम ही आगे बढ़ाया गया है। हालाँकि, इस बार ताजिकिस्तान ने भी इस सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की है। अगर नई दिल्ली कोई समझौता नहीं कर पाती है यानी भविष्य के किसी चुनाव में समर्थन के बदले ताजिक सरकार को पीछे हटने के लिए नहीं मना पाती है। तो यह एशियाई सीट के लिए एक मुक़ाबला बन जाएगा। नतीजतन, सबकी नज़रें मिस्टर जयशंकर और ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन के बीच होने वाली किसी भी बैठक पर टिकी होंगी। इसके अलावा, मिस्टर जयशंकर की मध्य एशियाई देशों और 'ग्लोबल साउथ' के अन्य हिस्सों के मंत्रियों के साथ होने वाली मुलाकातों पर भी नज़र रहेगी, ताकि यह देखा जा सके कि क्या भारत की उम्मीदवारी के समर्थन में कोई घोषणा होती है या नहीं।
दिल्ली के क्रिकेटर Vansh Bedi ने Match Fixing आरोपों को नकारा, CSK विवाद पर दी सफाई
दिल्ली के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज वंश बेदी ने भारतीय क्रिकेट से जुड़े कथित मैच फिक्सिंग विवाद में अपना नाम सामने आने के बाद सफाई दी है। वंश बेदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उनका नाम पूर्व रणजी ट्रॉफी क्रिकेटर रचित भाटिया के कथित स्टिंग अभियान में बताए गए चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाड़ी से जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने इस तरह के दावों को झूठा और मानहानि करने वाला बताया है।
वंश बेदी ने अपने बयान में साफ कहा है कि वह उस खिलाड़ी नहीं हैं, जिसका कथित तौर पर रचित भाटिया ने जिक्र किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कथित मैच फिक्सिंग या उससे जुड़ी किसी भी गतिविधि में उनकी कोई भूमिका नहीं है। बेदी के मुताबिक, उनके नाम को इन आरोपों से जोड़ने वालों के खिलाफ उनकी कानूनी टीम उचित सिविल और आपराधिक कार्रवाई कर रही है।
गौरतलब है कि यह विवाद रचित भाटिया से जुड़े एक कथित सिक्रेट अभियान के बाद चर्चा में आया है। इस दौरान भाटिया ने कथित तौर पर दावा किया था कि उन्हें वर्ष 2025 के आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की संभावित अंतिम एकादश से जुड़ी अंदरूनी जानकारी मिलती थी। उनके अनुसार, यह जानकारी लंदन में मौजूद सट्टेबाजों तक स्नैपचैट के जरिए पहुंचाई जाती थी।
भाटिया ने कथित तौर पर यह भी दावा किया था कि उन्होंने पांच मुकाबलों में प्रत्येक से करीब 60 लाख रुपये कमाए थे। इस तरह उन्होंने कुल करीब तीन करोड़ रुपये की कमाई का दावा किया था। उनके कथित बयान में जानकारी देने वाले व्यक्ति को चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़े एक दोस्त के तौर पर बताया गया था। हालांकि, सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में उस व्यक्ति का नाम वंश बेदी के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बेदी का नाम चर्चा में आ गया। इसकी एक वजह यह रही कि वह वर्ष 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जुड़े हुए थे। बाद में उन्होंने दिल्ली प्रीमियर लीग में सेंट्रल दिल्ली किंग्स का प्रतिनिधित्व किया। आईपीएल के दौरान टखने में चोट के कारण वह आगे के सत्र से बाहर भी हो गए थे। इन अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर सोशल मीडिया पर उनके नाम को लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कथित गुप्त अभियान में सेंट्रल दिल्ली किंग्स से जुड़े एक मामले का भी जिक्र हुआ था। इसमें दिल्ली प्रीमियर लीग के एक मुकाबले से पहले संभावित टीम संयोजन की जानकारी दिए जाने की बात कही गई थी। इसी चर्चा में वंश बेदी के नाम का संदर्भ आया था। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता है कि टीम से जुड़ी जानकारी उन्होंने ही उपलब्ध कराई थी।
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ ने भी पूरे मामले को लेकर बीसीसीआई से मार्गदर्शन मांगा है। संघ की ओर से यह कहा गया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी खिलाड़ी की गलती जांच में साबित होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि दिल्ली प्रीमियर लीग के पिछले सीजन के दौरान वंश बेदी ने कथित तौर पर खुद भ्रष्ट गतिविधि से जुड़े एक प्रस्ताव की जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारियों को दी थी। ऐसे में अब उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों और उनके द्वारा किए गए इस खंडन को लेकर जांच के तथ्यों का महत्व और बढ़ गया है।
बता दें कि फिलहाल बीसीसीआई की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसमें वंश बेदी को कथित गतिविधियों में शामिल बताया गया हो। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और किसी आधिकारिक जांच में सामने आए निष्कर्ष के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
फिलहाल वंश बेदी की सफाई के बाद मामला इस सवाल पर टिक गया है कि उनके नाम को कथित विवाद से जोड़ने का ठोस आधार क्या है। जांच एजेंसियों या क्रिकेट अधिकारियों की ओर से आगे जो तथ्य सामने आते हैं, वही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि कथित आरोपों में उनकी कोई भूमिका है या नहीं है।
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