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रिलेशनशिप एडवाइज- मेरे होने वाले पति डिवोर्सी हैं:उन्होंने अपनी एक्स वाइफ को भी हमारी शादी में इनवाइट किया है, क्या ये नॉर्मल है?

सवाल- मेरी उम्र 43 साल है और जल्दी ही मैं शादी करने वाली हूं। जिनसे शादी हो रही है, वो डिवोर्सी हैं। मुझे यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि हमारी शादी का इनविटेशन उन्होंने अपनी पूर्व पत्नी को भी भेजा है। उनके बीच अभी भी बात होती है। मैं समझती हूं कि उनका एक बेटा है और वो साथ मिलकर को-पेरेंटिंग कर रहे हैं। लेकिन वो एक-दूसरे से कुछ ज्यादा ही गर्मजोशी से मिलते हैं। मानो उनके बीच कोई झगड़ा ही न हो। अगर सबकुछ इतना अच्छा था तो फिर डिवोर्स ही क्यों हुआ? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो दोनों अब भी साथ हैं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा आपकी चिंता समझ में आती है। शादी से ठीक पहले अगर होने वाला पार्टनर अपनी पूर्व पत्नी के साथ काफी सहज और गर्मजोशी से मिलता-जुलता दिखे, तो मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन अभी सिर्फ इस आधार पर यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि दोनों फिर से साथ हैं। डिवोर्स का मतलब यह नहीं होता कि दो लोग हमेशा एक-दूसरे से नफरत करें। खासकर तब, जब उनका एक बच्चा है और दोनों साथ मिलकर को–पेरेंटिंग कर रहे हैं। इसलिए बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य, छुट्टियों और दूसरी जरूरतों के लिए दोनों को संपर्क में रहना पड़ सकता है। इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि वे आपस में बात क्यों करते हैं। असली सवाल ये है कि वे किस तरह की बात करते हैं और उनके रिश्ते की सीमाएं क्या हैं। ये सिर्फ आपका शक है, फैक्ट नहीं सबसे पहले आपको दोनों चीजों के फर्क को समझने की जरूरत है। आपने देखा कि दोनों गर्मजोशी से मिलते हैं। यह एक तथ्य है। लेकिन “शायद वे अब भी साथ हैं” यह सिर्फ एक आशंका है। दोनों के बीच अंतर करना बहुत जरूरी है। जब हमें रिश्ते को लेकर डर होता है, तो दिमाग अधूरी जानकारी को अपने डर के हिसाब से जोड़ने लगता है। इसलिए आप खुद से पूछें- इसलिए सिर्फ मुस्कुराकर बात करना, अपनी शादी में इनवाइट करना या बच्चे से जुड़े कार्यक्रमों में साथ दिखना अपने आप में भावनात्मक रिश्ते का प्रमाण नहीं है। शादी से पहले एक जरूरी बातचीत करें हालांकि आपके मन में जो सवाल उठ रहे हैं, उसे दबाकर रखना ठीक नहीं है। इसलिए अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। लेकिन सिर्फ बात करें, कोई आरोप न लगाएं। आप कह सकती हैं— “मैं बच्चे के साथ तुम्हारे रिश्ते का सम्मान करती हूं। मुझे तुम्हारा को-पेरेंटिंग करना भी समझ में आता है। लेकिन अपनी पूर्व पत्नी के साथ तुम्हारा रिश्ता देखकर मेरे मन में कुछ सवाल हैं। मैं शादी से पहले इन्हें स्पष्ट करना चाहती हूं।” इसके बाद कुछ सीधे सवाल पूछें। याद रखें, ये सवाल पूछने का मकसद जासूसी करना नहीं है। आप यह समझना चाहती हैं कि जिस रिश्ते में प्रवेश करने जा रही हैं, उसमें पुराने रिश्ते की जगह क्या है। डिवोर्स की वजह जानना क्यों जरूरी? आपका ये सवाल है कि “अगर सब इतना अच्छा था तो डिवोर्स क्यों हुआ?” यह सवाल वाजिब है। लेकिन इसका जवाब हमेशा सीधा नहीं होता। कई शादियां इसलिए टूटती हैं क्योंकि पति-पत्नी की प्राथमिकताएं अलग हो जाती हैं। कहीं लंबे समय तक मतभेद होते हैं। कहीं भरोसे की समस्या होती है। कहीं दोनों समझ जाते हैं कि वे साथ रहकर खुश नहीं हैं। हर शादी हमेशा सिर्फ इसलिए नहीं टूटती कि दोनों एक–दूसरे के दुश्मन हो गए थे। कई बार लोग एक–दूसरे के लिए सही मैच नहीं होते। इसलिए भी वे आपसी रजामंदी से अपने रास्ते अलग कर लेते हैं। डिवोर्स के बाद दोनों के बीच झगड़े खत्म हो जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि शादी के समय भी रिश्ता अच्छा था। इसलिए उनसे उनके अतीत की पूरी कहानी जानने की कोशिश करें। लेकिन उनकी पूर्व पत्नी से पूछताछ करने या उसके सोशल मीडिया की निगरानी करने से बचें। असली जवाब उनके व्यवहार में मिलेगा उनकी बात सुनने के साथ उनका व्यवहार भी देखें। जैसेकि– आपको सिर्फ एक घटना नहीं देखनी है। व्यवहार का पैटर्न देखना है। इनमें से कोई एक बात अपने आप में यह साबित नहीं करती कि दोनों फिर से साथ हैं। लेकिन कई संकेत लगातार दिखाई दें, तो बातचीत जरूरी है। इन सच्चाइयों का स्वीकार जरूरी इस शादी में सिर्फ एक पुरुष और एक महिला नहीं जुड़ रहे हैं। एक बच्चा भी इस रिश्ते का हिस्सा होगा। इसका मतलब है कि पूर्व पत्नी आपके होने वाले पति की जिंदगी से पूरी तरह बाहर नहीं जाएंगी। बच्चे के कारण उनका संपर्क लंबे समय तक बना रह सकता है। इस वास्तविकता को शादी से पहले स्वीकार करना जरूरी है। अंत में सबसे जरूरी बात आपको अपने होने वाले पति की पूर्व पत्नी से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है। आपको यह भी साबित नहीं करना है कि आप उनसे बेहतर हैं। आपको सिर्फ यह समझना है कि क्या आपका पार्टनर पुराने रिश्ते की जिम्मेदारियों और अपने नए रिश्ते के बीच स्वस्थ सीमा बना पा रहा है। इसलिए स्पष्ट बातचीत करें। फैसला डर के आधार पर नहीं, स्पष्टता के आधार पर लें। ………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- क्या पार्टनर का फोन चेक करना गलत है:मुझे हसबैंड पर शक है, क्या चुपके से उनका फोन खोलकर देख लूं, क्या करूं पार्टनर के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो मन में शक पैदा होना स्वाभाविक है। ये बातें असुरक्षा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में फोन चेक करके सच जानने की इच्छा होना भी स्वाभाविक है।लेकिन मेरा सुझाव है कि शक होते ही उसे सच मान लेना ठीक नहीं। पूरी खबर पढ़ें…

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जरूरत की खबर- पेपर कप में चाय-कॉफी, सूप न पिएं:उसमें छिपे माइक्रोप्लास्टिक से 7 गंभीर हेल्थ रिस्क, कांच या स्टील का कप ही बेहतर

फर्ज करिए, आप किसी दुकान पर चाय पीने के लिए रुकते हैं और आपको गर्म चाय डिस्पोजेबल पेपर कप में दी जाती है। आपको लगता है कि पेपर कप तो सेफ और इकोफ्रेंडली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे कप में गर्म चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? पेपर कप में गर्म ड्रिंक डालने पर क्या होता है, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने रिसर्च भी की है। साल 2021 में ‘जर्नल ऑफ हेजार्डस मैटेरियल्स’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। रिसर्चर्स ने 5 अलग-अलग कंपनियों के पेपर कप लिए और उनमें खौलता पानी डाला। पानी को 15 मिनट तक कप में रखा गया। रिसर्च के मुताबिक, 100ml गर्म पानी में औसतन करीब 25,000 माइक्रोन आकार के माइक्रोप्लास्टिक कण मिले। इसके अलावा कप की अंदरूनी प्लास्टिक कोटिंग में लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसे हैवी मेटल्स भी पाए गए। स्टडी बताती है कि पेपर कप में गर्म ड्रिंक पीने से माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर बढ़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर डेली पेपर कप में गर्म चाय-कॉफी पीते हैं तो इसका सेहत पर क्या असर हो सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज पेपर कप में चाय-कॉफी पीने के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- जैसाकि नाम से जाहिर है, क्या पेपर कप कागज का बना होता है? जवाब- नहीं, डिस्पोजेबल पेपर कप पूरी तरह कागज के नहीं होते। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पेपर कप में गर्म चीजें डालने से कौन-से टॉक्सिन्स रिलीज होते हैं? जवाब- गर्म चीजें डालने पर पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक्स और कुछ केमिकल पार्टिकल्स रिलीज होते हैं, जो शरीर में पहुंचकर हार्मोन, इम्यून सिस्टम और सेल्स के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- आइए इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं- 1. माइक्रोप्लास्टिक 2. नैनोप्लास्टिक 3. प्लास्टिक एडिटिव्स 4. प्रिंटिंग इंक के केमिकल्स 5. हैवी मेटल्स सवाल- अगर ये टॉक्सिन्स शरीर के अंदर जाएं तो क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- डेली पेपर कप में गर्म चाय-काॅफी या सूप पीने से कप के टॉक्सिन्स बॉडी में जाते हैं। लंबे समय में इसके कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। सभी संभावित हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- जो लोग लंबे समय तक और दिन में कई बार पेपर कप में गर्म ड्रिंक (जैसेकि चाय, कॉफी, सूप) पीते हैं, उन्हें रिस्क ज्यादा है। इसके अलावा इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए- सवाल- क्या पेपर कप से कैंसर हो सकता है? जवाब- डॉ. अली शेर बताते हैं कि कुछ स्टडीज में पेपर कप से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक, केमिकल्स और हैवी मेटल्स के लॉन्ग टर्म एक्सपोजर को कैंसर समेत कई हेल्थ रिस्क से जोड़ा गया है। इसलिए एहतियात के तौर पर पेपर कप का कम-से-कम इस्तेमाल करना चाहिए। सवाल- क्या पेपर कप में ठंडी चीजें पीना भी रिस्की है? जवाब- डॉ. अली शेर के मुताबिक, कम तापमान पर कप की अंदरूनी प्लास्टिक कोटिंग से माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल्स निकलने का रिस्क नहीं होता है। इसके बावजूद लंबे समय तक या बार-बार डिस्पोजेबल पेपर कप यूज करने की बजाय स्टील, कांच या सिरेमिक के बर्तनों का इस्तेमाल करना बेहतर है। सवाल- पेपर कप की जगह कौन-से विकल्प बेहतर हैं? जवाब- गर्म चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक (चीनी मिट्टी) के कप सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। पेपर कप की जगह कौन-से विकल्प बेहतर हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- पेपर कप के रिस्क से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- कुछ आसान सावधानियां अपनाकर संभावित जोखिम को कम किया जा सकता है। ग्राफिक में सभी सावधानियां देखिए- सवाल- पेपर कप बनाने और इसके इस्तेमाल को लेकर फूड सेफ्टी अथॉरिटीज के नियम क्या कहते हैं? जवाब- भारत में पेपर कप बनाने और खाने-पीने की चीजों के संपर्क में आने वाली पैकेजिंग के लिए FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन, 2018 लागू किए हैं। इनके अनुसार- इन सारी चीजों को सुनिश्चित करना फूड बनाने वाले का काम है और उसकी निगरानी करना अथॉरिटी का काम। जब दोनों ही अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ न कर रहे हों तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी सेहत की परवाह करें और पेपर कप का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। ************* ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- टॉयलेट सीट से गंदा पिलो कवर, बेडशीट: हो सकते हैं 17 हजार से ज्यादा जर्म्स, जानें घरेलू कपड़ों को कितने दिन में धोएं अमेरिका के मैट्रेस ब्रांड 'अमेरिस्लीप' की रिसर्च के मुताबिक, एक हफ्ते से ज्यादा समय तक बिना धुले इस्तेमाल किए गए पिलो कवर पर प्रति वर्ग इंच 30 लाख तक बैक्टीरिया (CFUs) जमा हो जाते हैं। यह संख्या टॉयलेट सीट पर मौजूद बैक्टीरिया से करीब 17 हजार गुना ज्यादा है। पूरी खबर पढ़िए….

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Asian Games 2026 Medal Tally: मंगलवार 22 सितंबर तक किस देश ने कितने पदक एशियाई खेलों में जीते हैं? वह जान लीजिए। चीन मेडल टैली में टॉप पर बना हुआ है, जबकि भारत का हाल क्या है? ये आप इस स्टोरी में जान जाएंगे।  Wed, 23 Sep 2026 07:49:42 +0530

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