Donald Trump का तेहरान को लेकर दोहरा रुख! 'पूरी तरह खत्म' करने की धमकी के बाद UN में अमेरिका-ईरान के बीच 3 घंटे की 'सार्थक' बैठक
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला है। एक तरफ जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से ईरान को 'पूरी तरह खत्म' करने की सख्त चेतावनी दी, वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच तीन घंटे लंबी बैक-चैनल (मध्यस्थों के ज़रिए) बातचीत हुई। इस बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे "बहुत अच्छी और सार्थक" चर्चा करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। लगभग सात महीने से जारी क्षेत्रीय संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेहरान के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं।
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'बहुत अच्छी' 3 घंटे की बैठक: ट्रंप
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि बैठक तीन घंटे तक चली और इसे "बहुत अच्छी बैठक" बताया। ट्रंप ने कहा, "बैठक बहुत अच्छी रही। यह एक घंटे पहले खत्म हुई। यह बैठक तीन घंटे तक चली। उनकी बैठक बहुत अच्छी और बहुत सार्थक रही - जल्द ही उनकी एक और बैठक होने वाली है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं सोच भी नहीं सकता कि वे ऐसा क्यों नहीं करना चाहेंगे... एक स्थिति में पूरी तरह विनाश है, और दूसरा विकल्प महानता की संभावना है। यह एक महान देश बन सकता है।"
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए शर्तें रखीं
बातचीत के बाद, विटकॉफ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग मध्यस्थों के माध्यम से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बातचीत की और इन चर्चाओं को रचनात्मक और आशाजनक बताया।
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उन्होंने कहा, "आज, संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग, हमने मध्यस्थों के माध्यम से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बातचीत की, जो पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच आते-जाते रहे। उन्होंने सफलतापूर्वक चर्चा का एक दौर पूरा किया, जिसके बारे में हमें उम्मीद है कि यह रचनात्मक और आशाजनक साबित होगा। मध्यस्थ अपना काम जारी रखेंगे।"
ईरानी सरकारी मीडिया ने भी पुष्टि की कि अरागची ने UN महासभा से अलग अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक की।
सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, यह बैठक विटकॉफ के अनुरोध पर हुई थी। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अरागची ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए ईरान की शर्तों को दोहराने का अनुरोध स्वीकार कर लिया। इन शर्तों में नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाना, ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को जारी करना और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करना शामिल है।
ट्रंप ने तेहरान को 'पूरी तरह खत्म' करने की धमकी दी
इससे पहले, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में धमकी दी थी कि अगर लगभग सात महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो वह इस्लामिक गणराज्य को 'पूरी तरह खत्म' कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे एक बड़ा फ़ैसला लेना है। क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे फिर से निर्माण कर सकें और पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर देश बना सकें? शायद मध्य पूर्व या दुनिया के सबसे बेहतरीन देशों में से एक। या फिर मैं इस्लामिक गणराज्य को पूरी तरह खत्म कर दूँ, और वह भी जल्दी, ताकि उन्हें दोबारा लोगों और देशों को मारने और बर्बाद करने का मौका न मिले? लेकिन मुझे विश्वास है कि चुनाव के ठीक बाद हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि उनके लिए समझौता न करने का कोई मतलब नहीं है।"
उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल ले जाने में अमेरिकी नौसेना की कोशिशों के बारे में भी बात की और कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब सबसे ज़्यादा तेल की आवाजाही हो रही है।
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Nepal Flood: अमेरिका देगा 3.1 करोड़ डॉलर की मदद, पुल निर्माण और राहत कार्य में मिलेगी सहायता
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 23 सितंबर अमेरिका ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में पुलों के निर्माण, प्रभावित समुदायों की बुनियादी नागरिक जरूरतों को पूरा करने और भविष्य में आपदा के बाद राहत एवं पुनर्बहाली प्रयासों में मदद के लिए ड्रोन की तैनाती में सहयोग के वास्ते नेपाल को 3.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। राजनीतिक मामलों की विदेश उप मंत्री एलिसन हूकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात के बाद यह घोषणा की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, हूकर ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के प्रति अमेरिका की गहरी संवेदना व्यक्त की।
इनमें करीब 70 अमेरिकी नागरिकों के परिवार भी शामिल हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। बैठक के दौरान हूकर ने कहा कि अमेरिका कांग्रेस के साथ मिलकर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। इसका इस्तेमाल स्थायी और जरूरत के अनुरूप तैयार किए गए पुलों के निर्माण के लिए किया जाएगा, जिन्हें अमेरिका एक अमेरिकी कंपनी से मंगवा रहा है।
बयान में कहा गया है कि ये पुल प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवहन बुनियादी ढांचे को बहाल करने और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में मदद करेंगे। मंत्री ने प्रभावित समुदायों को पानी, स्वच्छता एवं साफ-सफाई के साथ-साथ आश्रय, संरक्षण, आजीविका और सर्दियों के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के वास्ते 80 लाख अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने की योजना की भी घोषणा की। मंत्रालय ने भविष्य में आपदा के बाद राहत एवं पुनर्बहाली प्रयासों में बेहतर सहायता के लिए अमेरिका में निर्मित ड्रोन उपलब्ध कराने पर 1.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च करने की भी योजना बनाई है।
इस सहायता की घोषणा के साथ नेपाल में बाढ़ से निपटने और पुनर्बहाली के प्रयासों के लिए अमेरिका की कुल सहायता 3.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है। बयान में कहा गया है कि अमेरिका नेपाल सरकार के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा ताकि जहां सबसे अधिक जरूरत हो, वहां अतिरिक्त सहायता की पहचान कर उसे उपलब्ध कराया जा सके। नेपाल में तिब्बत की सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में कम से कम 1,451 लोगों की मौत हो गई और 6,000 से अधिक लोग लापता हैं।
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