Budget 2026: EPFO पेंशनधारकों को मिल सकती है बड़ी राहत; बजट में न्यूनतम पेंशन बढ़ने की उम्मीद, 11 साल से अटकी मांग पर सरकार गंभीर
Budget 2026: महंगाई के इस दौर में रिटायर्ड कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े पेंशनधारकों की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर केंद्र सरकार अब गंभीरता से विचार कर रही है. उम्मीद की जा रही है कि यूनियन बजट 2026 में या उसके तुरंत बाद इस दिशा में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
11 साल से नहीं बढ़ी न्यूनतम पेंशन
फिलहाल EPFO पेंशनधारकों को न्यूनतम 1,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है. हैरानी की बात यह है कि पिछले 11 वर्षों से इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. इस दौरान महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है. दवाइयों, इलाज, किराया, बिजली-पानी और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए 1,000 रुपये की पेंशन नाकाफी साबित हो रही है.
कर्मचारी संगठनों का बढ़ता दबाव
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इतनी कम पेंशन में बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल है. इसी वजह से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग तेज हो गई है. 6 जनवरी को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया. मंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए विचार का भरोसा दिलाया है.
अन्य संगठनों और पेंशनर्स फोरम्स ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,000 से 10,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है. उनका मानना है कि इससे बुजुर्ग पेंशनधारकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा मामला
आपको बता दें कि न्यूनतम पेंशन से जुड़ा यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. इससे सरकार पर कानूनी और नैतिक दबाव बना हुआ है. जानकारों के मुताबिक, अदालत की टिप्पणियों और संगठनों के दबाव के चलते सरकार जल्द कोई फैसला ले सकती है.
EPFO की नई पहल
पेंशनधारकों की सुविधा के लिए EPFO ‘सुविधा सहायक’ तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है. ये सहायक पेंशन, पीएफ क्लेम, केवाईसी और अकाउंट से जुड़ी प्रक्रियाओं में मदद करेंगे. यह पहल खासकर बुजुर्ग पेंशनधारकों के लिए राहत लेकर आ सकती है. बजट 2026 में EPFO पेंशनधारकों को बड़ी खुशखबरी मिलने की उम्मीद है.
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सिडनी में गोलीबारी, एक व्यक्ति की हालत गंभीर
सिडनी, 18 जनवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) राज्य की पुलिस ने रविवार को एक बयान में बताया कि सिडनी के पश्चिमी इलाके लालोर पार्क में शनिवार रात को एक घर पर गोलीबारी हुई, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने पुलिस के हवाले से बताया कि शनिवार रात करीब 11.35 बजे (स्थानीय समयानुसार) गोलीबारी की खबर मिलने के बाद इमरजेंसी सेवाओं को बुलाया गया।
अधिकारियों को बताया गया कि कुछ अज्ञात लोगों ने एक घर में कई गोलियां चलाईं, जिससे एक शख्स घायल हो गया और फिर वे एक गाड़ी में बैठकर मौके से फरार हो गए।
46 साल के घायल व्यक्ति का एनएसडब्ल्यू एम्बुलेंस के पैरामेडिक्स ने प्रारंभिक उपचार किया और फिर उसे स्थिर हालत में अस्पताल ले जाया गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया है और जांच जारी है, साथ ही आसपास के लोगों से सीसीटीवी फुटेज या जानकारी मांगी गई है।
पिछले साल बोंडी बीच आंतकी हमले के बाद सिडनी काफी चर्चा में है। हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने गुरुवार को यहूदी-विरोध और सामाजिक एकता पर एक रॉयल कमीशन का गठन किया।
अल्बानीज ने कैनबरा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि उनकी सरकार एक रॉयल कमीशन का गठन करेगी, जो ऑस्ट्रेलिया में जांच का सबसे बड़ा रूप है, जिसका नेतृत्व पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस वर्जीनिया बेल करेंगी, जो दिसंबर के मध्य तक एक रिपोर्ट सौंपेंगी।
उन्होंने कहा, मैंने सोचने-समझने के लिए समय लिया है, यहूदी समुदाय के नेताओं से मुलाकात की है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं उस भयानक हमले के पीड़ितों और जीवित बचे लोगों के कई परिवारों से मिला हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जांच ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोध की प्रकृति और प्रसार की जांच करेगी, यहूदी-विरोध से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन को सिफारिशें देगी, बोंडी बीच हमले से जुड़े हालात की जांच करेगी, और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर सिफारिशें देगी।
उन्होंने कहा, मैंने बार-बार कहा है कि हमारी सरकार की प्राथमिकता समरसता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है, और ऑस्ट्रेलिया को ठीक होने, सीखने और राष्ट्रीय एकता की भावना से एक साथ आने के लिए इसी की जरूरत है।
कथित तौर पर एकमात्र जीवित बचे बंदूकधारी, 24 वर्षीय नवीद अकरम पर हमले के सिलसिले में 59 अपराधों का आरोप लगाया गया है, जिसमें 15 हत्याएं शामिल हैं। अधिकारियों का आरोप है कि यह इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित था।
पिछले साल दिसंबर में, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य की संसद ने सिडनी के बोंडी बीच पर हुई घातक सामूहिक गोलीबारी के जवाब में नए सख्त बंदूक और विरोध प्रदर्शन कानून पारित किए, जैसा कि ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) ने रिपोर्ट किया।
गोलीबारी 14 दिसंबर को हुई थी, जिसमें यहूदी त्योहार हनुक्का के पहले दिन मनाए जा रहे एक कार्यक्रम को निशाना बनाया गया था और 15 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
--आईएएनएस
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