ट्रंप की ग्रीनलैंड मुद्दे पर धमकी: यूरोपीय संघ ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी तेज की
ब्रुसेल्स, 18 जनवरी (आईएएनएस)। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने यूरोपीय आयोग से मांग की है कि वह यूरोपीय संघ के एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करे। यह मांग उस समय सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप के कई देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बर्न्ड लांगे ने लिंक्डइन पर लिखा कि अब समय आ गया है कि एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट लागू किया जाए और यूरोपीय संघ की ओर से साफ और ठोस जवाब दिया जाए। उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग को बिना देर किए इस प्रक्रिया की शुरुआत करनी चाहिए।
ट्रंप ने शनिवार को कहा कि एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर दस प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि यह कदम ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद के कारण उठाया जा रहा है।
बर्न्ड लांगे ने इस धमकी को अविश्वसनीय बताया और कहा कि यह शुल्क को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का एक नया और खतरनाक तरीका है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी स्थिति में यूरोपीय संघ पहले की तरह सामान्य कामकाज जारी नहीं रख सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का यह कदम जुलाई 2025 में स्कॉटलैंड में हुए यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार और शुल्क समझौते का उल्लंघन है। लांगे के अनुसार, अगले सप्ताह यूरोपीय संसद इस मुद्दे पर फिर से विभिन्न राजनीतिक समूहों के साथ चर्चा करेगी।
लांगे ने कहा कि मौजूदा हालात में सामान्य तरीके से आगे बढ़ना संभव नहीं है और संभावना है कि आगे का काम रोक दिया जाएगा। उन्होंने कहा, मैं कल्पना नहीं कर सकता कि हम सामान्य रूप से काम जारी रख सकते हैं, और मुझे लगता है कि हम अपना आगे का काम रोक देंगे।
ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत एक स्वशासित क्षेत्र है। रक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसले कोपेनहेगन सरकार के हाथ में हैं। अमेरिका का वहां एक सैन्य अड्डा भी मौजूद है।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड में रुचि दिखाते रहे हैं। अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में उन्होंने ग्रीनलैंड को खरीदने की बात कही थी। अब वह इसे अपने कब्जे में लेने के लिए कई विकल्पों की बात कर रहे हैं, जिनमें अमेरिकी सेना के इस्तेमाल का जिक्र भी शामिल है। हाल के दिनों में ट्रंप की इस कोशिश के तेज होने से ग्रीनलैंड से जुड़ा संकट और गहरा गया है।
--आईएएनएस
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गाजा निगरानी नीति बना विवाद की वजह, इजराइल ने अमेरिका के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति; जानिए पूरा मामला
गाजा को लेकर अमेरिका द्वारा बनाई गई नई निगरानी नीति पर इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है. इजरायल का कहना है कि यह नीति उसकी रणनीति और नीतियों के खिलाफ है. खास तौर पर गाजा में आगे की कार्रवाई की निगरानी के लिए बनाई गई कार्यकारी समिति को लेकर इजरायल असंतुष्ट है.
इजरायल की नाराजगी का कारण
इजरायल सरकार ने कहा कि गाजा कार्यकारी समिति के गठन से पहले उससे कोई बातचीत या समन्वय नहीं किया गया. इजरायल, अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद इस फैसले में उसे नजरअंदाज किया गया. शनिवार (17 जनवरी) को जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्रालय को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस मुद्दे पर बात करने के निर्देश दिए हैं.
The Prime Minister's Office:
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) January 17, 2026
The announcement regarding the composition of the Gaza Executive Board, which is subordinate to the Board of Peace, was not coordinated with Israel and runs contrary to its policy.
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को जिस समिति की घोषणा की, उसमें कोई भी इजरायली सरकारी अधिकारी शामिल नहीं है. हालांकि, इजरायल के एक कारोबारी को समिति में जगह दी गई है. समिति के अन्य सदस्यों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो करीबी सहयोगी, ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक अमेरिकी जनरल और पश्चिम एशिया के कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.
Israel objects to White House selection of candidates for Gaza 'Board of Peace'
— ANI Digital (@ani_digital) January 18, 2026
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गाजा को लेकर ट्रंप प्रशासन की योजना
ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि गाजा को लेकर अमेरिका की युद्धविराम योजना अब अपने दूसरे और ज्यादा चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है. इस योजना के तहत गाजा में कुछ इलाकों में अमेरिकी निगरानी रहेगी, जबकि वहां का प्रशासन एक फिलिस्तीनी समिति संभालेगी. इस फिलिस्तीनी समिति की कमान अली शात को सौंपी गई है, जो पेशे से इंजीनियर हैं और फिलिस्तीनी प्राधिकरण में पहले अधिकारी रह चुके हैं. योजना के अनुसार, समिति की निगरानी ट्रंप के नेतृत्व वाले “बोर्ड ऑफ पीस” द्वारा की जाएगी.
अमेरिका की पहल पर गठित फिलिस्तीनी समिति की पहली बैठक शुक्रवार (16 जनवरी) को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई. बैठक में अली शात ने हालात सुधारने के लिए तेजी से काम करने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि गाजा के पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापन में करीब तीन साल का समय लग सकता है.
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