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Gold silver price: एमसीएक्स पर सोना ₹1.53 के नीचे फिसला, चांदी भी ₹900 हुई सस्ती

Gold silver price: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार 22 सिंतबर को एमसीएक्स पर सोना अक्टूबर वायदा 0.42 फीसदी गिरकर 1,52,499 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा है। जबकि चांदी 0.42 फीसदी यानी 907 रुपये गिरकर 2,38,410 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है

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तमिलनाडु में सीएम विजय ने किया ब्रेकफास्ट योजना का विस्तार, अब कक्षा 8वीं तक के बच्चों को मिलेगा मुफ्त नाश्ता

Chief Minister Breakfast Scheme: तमिलनाडु की सत्ता में बदलाव के बाद यह माना जा रहा था कि पिछली सरकार की लोकलुभावन योजनाओं पर कैंची चल सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने एक अलग ही सियासी लकीर खींच दी है. उन्होंने पिछली सरकार के कामकाज को पूरी तरह दरकिनार करने के बजाय उसमें बड़ा बदलाव करते हुए आगे बढ़ाने का मन बनाया है. इसी कड़ी में उन्होंने एमके स्टालिन सरकार की सबसे चर्चित योजना मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम को जारी रखने का बड़ा ऐलान किया है. इस फैसले के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया है कि बच्चों की भलाई से जुड़ी योजनाओं में राजनीति आड़े नहीं आएगी. हालांकि, उन्होंने इस योजना को हूबहू उसी रूप में नहीं अपनाया, बल्कि इसका नाम बदलकर इसे एक नई पहचान दे दी है.

कामराज के नाम पर नई पहचान

विजय सरकार ने इस बहुचर्चित योजना का नाम बदलकर पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम कर दिया है. कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज को तमिलनाडु में शिक्षा और बच्चों के पोषण की नींव रखने वाला नेता माना जाता है. उन्होंने अपने दौर में स्कूल मील कार्यक्रम शुरू करके गरीब बच्चों को पढ़ाई की तरफ खींचा था. ऐसे में विजय का यह कदम कामराज की विरासत को सम्मान देने के साथ ही एक गहरा सियासी दांव भी माना जा रहा है. विजय ने यह जताने की कोशिश की है कि बच्चों को खाना खिलाने का विचार किसी एक दल का नहीं, बल्कि राज्य के महान नेताओं की देन है.

बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री

योजना को नई रफ्तार देने के साथ ही मुख्यमंत्री जोसेफ विजय खुद स्कूली बच्चों के बीच पहुंचे. उनकी सादगी भरी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे स्कूली बच्चों से बातचीत करते, उन्हें दुलारते और अपने हाथों से नाश्ता कराते नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर नाश्ता भी किया. इस व्यवहार ने आम लोगों और अभिभावकों के दिलों को छू लिया है. जमीन पर बैठकर भोजन करने की उनकी इस सादगी की चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है.

योजना का दायरा और बजट बढ़ा

यह योजना केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि नई सरकार ने इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है. स्टालिन सरकार ने साल 2022 में जब इस योजना की शुरुआत की थी, तब इसे प्राथमिक स्तर के छात्रों तक रखा गया था और बाद में सहायता प्राप्त स्कूलों तक ले जाया गया था. अब विजय की सरकार ने इसमें पंद्रह हजार से ज्यादा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के करीब पंद्रह लाख और छात्रों को जोड़ दिया है. अब आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सुबह का गर्म और पौष्टिक नाश्ता मिल सकेगा. इसके लिए सरकार ने दो सौ सत्रह करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि मंजूर की है, जिससे इस पूरे कार्यक्रम पर कुल खर्च सात सौ चौबीस करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

नाम बदलने पर गरमाई राजनीति

योजना का नाम बदलते ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है. पिछली सरकार चला रही डीएमके ने विजय के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है. डीएमके के नेताओं का कहना है कि नई सरकार खुद की कोई नई सोच लेकर नहीं आ रही है, बल्कि उनकी सफल योजनाओं पर अपने पसंदीदा नाम की मुहर लगा रही है. डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने तंज कसते हुए कहा कि नई सरकार का काम सिर्फ उनके शुरू किए गए कामों का नाम बदलना रह गया है, वे अपने दम पर कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं.

पलटवार में कामराज की विरासत की याद

डीएमके के आरोपों पर विजय की पार्टी टीवीके ने भी तुरंत पलटवार किया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमेरिका नारायणन ने साफ कहा कि राज्य में बच्चों को दोपहर का खाना देने की शुरुआत सबसे पहले कामराज ने ही की थी. इसलिए इस योजना का नाम कामराज के नाम पर रखना पूरी तरह से सही और न्यायसंगत फैसला है. कुल मिलाकर, विजय ने पिछली सरकार के अच्छे काम को रोककर जनता की नाराजगी मोल लेने के बजाय, उसका नाम बदलकर और दायरा बढ़ाकर एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं.

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