Delhi Airportपर 8.77 किलोग्राम गांजा जब्त, दो यात्री गिरफ्तार
दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने बैंकॉक से आए दो भारतीय यात्रियों के पास से 8.77 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। मामले में दोनों यात्रियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सीमा शुल्क विभाग ने एक बयान में कहा कि दोनों यात्री 14 जनवरी को हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर पहुंचे और मौके पर ही संदेह के आधार पर उन्हें रोका गया। इसके मुताबिक, ‘‘यात्रियों को टर्मिनल-3 पर पहुंचते ही उनकी एक्स-रे जांच और निजी सामान की विस्तृत छानबीन के लिए उन्हें ग्रीन चैनल से दूर ले जाया गया।’’
बयान में कहा गया कि जांच के दौरान एक गहरे नीले रंग के ट्रॉली बैग में पॉलीथीन की नौ पुड़िया मिली, जिनमें हरे रंग का मादक पदार्थ था, जिसके गांजा होने का संदेह है। पुड़िया में रखे पदार्थ का वजन 8.77 किलोग्राम था।
सीमा शुल्क विभाग ने बताया, ‘‘जब्त किए गए पदार्थ की जांच की गई, जिससे प्रथम दृष्टया उसके गांजा होने का संकेत मिला।’’ अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए मादक पदार्थ का अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 8.771 करोड़ रुपये आंकी गई है।
बयान के मुताबिक, उक्त मादक पदार्थ को जब्त कर लिया गया है और आरोपी यात्रियों को स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस)अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
Odisha govt और NIEPID के बीच समझौता, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में होगा सुधार
ओडिशा सरकार और राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) ने राज्य भर में बौद्धिक दिव्यांगजनों की शीघ्र पहचान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और सामुदायिक जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है।
राज्य के दिव्यांगजनों के सामाजिक सुरक्षा और सशक्तीकरण विभाग (एसएसईपीडी) ने शुक्रवार को इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत राज्य द्वारा संचालित विशेष स्कूलों में एनआईपीआईडी द्वारा तैयार किया गया नया पाठ्यक्रम लागू करने के लिए संगठित सहयोग स्थापित किया जाएगा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस साझेदारी का मकसद विशेषज्ञों की मदद और प्रशिक्षण तथा निरंतर निगरानी के माध्यम से बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए शिक्षा और विकास से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
समझौते के प्रावधानों के अनुसार, दोनों संस्थान प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप, विशेष शिक्षकों और देखभालकर्ताओं का प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम कार्यान्वयन, अनुसंधान, प्रलेखन और सामुदायिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे, ताकि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उनके प्रति होने वाले भेदभाव को कम किया जा सके।
इस सहयोग के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम, संसाधन सामग्री का विकास, डिजिटल शिक्षण सामग्री और विशेषज्ञ निगरानी जैसे कार्य किए जाएंगे। बयान के अनुसार, यह समझौता तीन साल की अवधि तक प्रभावी रहेगा और दोनों पक्षों की आपसी सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
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