भारतीय जलक्षेत्र में पकड़ी गई टूना मछली खाने के लिए सुरक्षित : सीएमएफआरआई
कोच्चि, 22 सितंबर (आईएएनएस)। आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय तट पर पकड़ी गई टूना मछली खाने के लिए सुरक्षित है।
यह स्पष्टीकरण तब आया है, जब ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर में पकड़ी गई स्किपजैक टूना मछली में पैरासाइट (परजीवी) मिलने की खबरों ने टूना और दूसरी मछलियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सीएमएफआरआई ने कहा कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में मिली जानकारी को भारतीय जलक्षेत्र में पकड़ी गई टूना मछली से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
सीएमएफआरआई के डायरेक्टर डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा, सिर्फ इसलिए कि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मछली में पैरासाइट पाए गए हैं, ग्राहकों को टूना या बाजार में मिलने वाली दूसरी मछलियां खाना बंद करने की जरूरत नहीं है।
सीएमएफआरआई के वैज्ञानिक नियमित रूप से अलग-अलग तरह की मछलियों की जांच करते हैं ताकि उनमें किसी तरह की गड़बड़ी या पैरासाइट का पता लगाया जा सके।
मछली की बायोलॉजी से जुड़ी स्टडी के तहत स्किपजैक टूना की भी जांच की जाती है। जॉर्ज ने कहा कि सीएमएफआरआई द्वारा जांची गई मछलियों में नुकसानदायक पैरासाइट के संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं दिखे हैं।
उन्होंने कहा कि पैरासाइट की मौजूदगी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि यह कई इकोलॉजिकल (पारिस्थितिक) कारकों पर निर्भर करता है। कोपेपोड जैसे इंटरमीडिएट या सेकेंडरी होस्ट (मध्यवर्ती या गौण पोषक) की मौजूदगी भी पैरासाइट के स्तर को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अलग-अलग क्षेत्रों में मछली के स्टॉक और आबादी की पहचान करने और उनमें अंतर करने के लिए भी पैरासाइट का इस्तेमाल करते हैं।
सीएमएफआरआई ने कहा कि ब्राजील की टूना मछली में मिली जानकारी का इस्तेमाल भारतीय तट पर पकड़ी गई टूना मछली की सुरक्षा का आकलन करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
हालांकि, संस्थान ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे खाने की सुरक्षा से जुड़े सही तरीकों का पालन करें। प्रोसेसिंग के दौरान आंत और शरीर के दूसरे अंदरूनी अंगों को तुरंत हटाना जरूरी है। इसके बाद पकाने से पहले मछली को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। अच्छी तरह से पकाना सुरक्षा का एक और अहम उपाय है। तेज तापमान पर सही ढंग से पकाने से पैरासाइट मर जाते हैं और खाने से जुड़े सुरक्षा जोखिम काफी कम हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उन देशों में ज्यादा अहम है, जहां कच्चा या हल्का पका समुद्री भोजन आम तौर पर खाया जाता है। ऐसे मामलों में जोखिम ज्यादा हो सकते हैं, अगर स्थानीय रूप से पकड़ी गई मछलियों में पैरासाइट की मौजूदगी ज्यादा हो।
भारत में सीफूड को आम तौर पर तेज तापमान पर पकाया जाता है। सीएमएफआरआई ने कहा कि इससे सुरक्षा का एक अतिरिक्त उपाय मिलता है।
--आईएएनएस
डीके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मेघालय में पुनर्वास केंद्र खुला, राज्य की सुविधाओं के लिए 'एसओपी' लागू की गईं
गुवाहाटी, 22 सितंबर (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने मंगलवार को पश्चिम गारो हिल्स के तुरा में बल्लोंगरे-गाम्बेग्रे में सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने के राज्य के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
सांगमा ने मेघालय भर के पुनर्वास केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का भी शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य इन सुविधाओं के संचालन में अधिक एकरूपता और जवाबदेही लाना है।
यह पुनर्वास केंद्र ड्रग रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन (ड्रीम) के तहत स्थापित किया गया है, जो राज्य सरकार की एक पहल है। इसका उद्देश्य मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम करना और प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को उपचार, पुनर्वास और सहायता प्रदान करना है।
मेघालय सरकार ने 2023 में ड्रीम को एक मिशन-मोड कार्यक्रम के रूप में मंजूरी दी थी, जिसका व्यापक उद्देश्य नशामुक्त राज्य की दिशा में काम करना है।
संगमा ने कहा कि इस पहल में पुलिस, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग, जिला प्रशासन और युवा संगठनों सहित कई सरकारी विभाग और स्थानीय हितधारक, साथ ही समुदाय भी शामिल हैं, ताकि समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटा जा सके।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह नया पुनर्वास केंद्र मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से प्रभावित लोगों के लिए सहायता, देखभाल और पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और अधिक सहायक मेघालय बनाने की दिशा में काम करना जारी रखेगी, साथ ही सरकारी कार्यक्रमों के केंद्र में नागरिकों और उनके योगदान को रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की शुरुआत राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष जनवरी में मेघालय भर में संचालित पुनर्वास केंद्रों के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए गठित एक समिति के बाद हुई है।
राज्य सरकार ड्रीम कार्यक्रम के तहत प्रवर्तन और जागरूकता पहलों के साथ-साथ पुनर्वास, परामर्श और सामुदायिक भागीदारी पर अधिक जोर दे रही है।
समाज कल्याण विभाग इस मिशन के अंतर्गत नशामुक्ति केंद्रों के उपचार, पुनर्वास और प्रबंधन में भी शामिल रहा है।
तुरा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष (सीएमएसडीएफ) के तहत युवा समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्यमियों और महिला संगठनों को स्वीकृतियां भी सौंपीं।
सांगमा ने गारो हिल्स क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से आए आम लोगों से भी बातचीत की।
राज्य सरकार की नवीनतम पहलों का उद्देश्य नशा मुक्ति के लिए संस्थागत सहायता को मजबूत करना और नशा मुक्ति चाहने वाले लोगों को उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता और निरंतरता में सुधार करना है।
--आईएएनएस
एमएस/
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