कैटरीना कैफ की मां क्यों तमिलनाडु के गांव में काट रहीं अपनी लाइफ? बगैर बिजली-इंटरनेट के कैसे हो रहा गुजारा
Suzanne Turquotte Lives in Village: बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ (Kaitrina Kaif) इन दिनों फिल्मों से दूर एक बच्चे की मां बनने का सुख ले रही हैं. कैटरीना ने अपने करियर में 'नमस्ते लंदन', 'पार्टनर' और 'एक था टाइगर' जैसी कई बड़ी फिल्मों में लीड रोल निभाया है. हालांकि, वह इन दिनों लाइमलाइट से दूर हैं और अपने परिवार को टाइम दे रही हैं. लेकिन इस बारे में कम ही लोग जानते हैं कि 74 साल की कैटरीना की मां सुजैन टरकोट (Suzanne Turquotte) कई सालों से तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में रही हैं. बताया जाता है कि यहां पर बिजली और इंटरनेट की सुविधा में भी बेहतर नहीं है. लेकिन वह किसी मजबूरी में यहां नहीं रह रही है. उन्होंने अपने काम और कंफर्ट की वजह से लग्जरी लाइफ को छोड़कर गांव में रहना चुना.
कैटरीना कैफ की मां क्यों तमिलनाडु के गांव में काट रहीं अपनी लाइफ
कैटरीना कैफ की मां सुजैन टरकोट तमिलनाडु के मदुरै जिले के एक गांव में अपने जीवन का गुजारा कर रही हैं. बताया जाता है कि यहां पर बिजली और इंटरनेट जैसी बेसिक सुविधाएं बहुत कम है. कैटरीना कैफ ने खुद एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि उनकी मां लंदन की आलीशान लाइफ को छोड़कर सालों से उस पिछड़े गांव में रह रही हैं, ताकि वे वहां के गरीब बच्चों को ट्यूशन दे सकें. साथ ही अपना समाजसेवा का काम भी कर सकें. आपको बता दें कि इस इलाके में बिजली की भारी किल्लत रहती है और दिन में केवल 12 घंटे ही बिजली आती है. बिजली की इस कटौती और इंटरनेट नेटवर्क कम फैसिलिटी की वजह से कैटरीना अक्सर अपनी मां सेवीडियो कॉल पर भी बात नहीं कर पाती हैं और इसके लिए उन्हें नॉर्मल कॉल करना पड़ता है. इसके बावजूद, समाज सेवा और बच्चों के फ्यसर को संवारने के लिए उनकी मां इस सिचुएशन में भी सादा जिंदगी को खुशी-खुशी जी रही हैं.
बच्चों को पढ़ाने की शुरूआत कैसे हुई
दरअसल, इसकी शुरुआत साल 2008 हुई थी. जब लंदन में रह रहीं कटरीना कैफ की मां तमिलनाडु आईं थीं. उन्हें यहां आकर एक NGO के बारे में पता चला जो गांवों में रह रहे गरीब और वंचित बच्चों को बेहतर फ्यूचर के लिए काम कर रहा था. शुरुआत में उन्होंने सरकारी स्कूलों में फ्री ट्यूशन पढ़ाने और एक छोटा सा नेटवर्क बनाने से की थी. इसके बाद धीरे-धीरे यह एक सामुदायिक विकास संगठन में बदल गया. बाद में कैटरीना की मां ने इस NGO के जरिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए काम किया और फिर साल 2015 में उन्होंने माउंटेन व्यू नाम का स्कूल शुरू किया.
माउंटेन व्यू नाम का स्कूल किया शुरू
साल 2015 में सुजैन ने 'Mountain View School' नाम से स्कूल खोला. जब उन्होंने यह स्कूल शुरू किया था तब यहां पर सिर्फ कुछ छोटे बच्चों को पढ़ाया जाता था. जिसके बाद धीरे-धीरे उनका स्कूल एक मान्यता प्राप्त प्राइमरी स्कूल में बदल गया. जिसमें आर्थिक रूप से पिछड़े गांवों के 30 से कम बच्चों को पढ़ाया जाने लगा. इसी तरह वक्त के साथ के स्कूल के बच्चों की संख्या 300 से अधिक हो गई. इसके अलावा तमिलनाडु में एक एनजीओ रिलीफ प्रोजेक्ट्स इंडिया की भी स्थापना की थी.
आठ बच्चों की मां है सुजैन टरकोट
बता दें कि सुजैन टरकोट 8 बच्चों की मां हैं और पेशे से वकील और समाजसेवी हैं. कैटरीना कैफ के पिता मोहम्मद कैफ कश्मीरी मूल के बिजनेसमैन हैं. जब कैटरीना बहुत छोटी थीं, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया था. इसके बाद सुजैन ने अकेले ही अपने सभी बच्चों को पाला-पोसा. कैटरीना की तीन बड़ी बहनें, तीन छोटी बहनें और एक बड़ा भाई है.
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जीएसटी 2.0 ने ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ाई, सस्ती कीमतों ने बढ़ाई मांग: इंडस्ट्री
नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। फाडा यानी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (एफएडीए) के अध्यक्ष साई गिरिधर ने मंगलवार को कहा कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल क्षेत्र की वृद्धि दर चार गुना तक बढ़ गई है और वाहन खरीदने की बढ़ी हुई क्षमता (अफोर्डेबिलिटी) मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक बनकर उभरी है।
जीएसटी 2.0 की पहली वर्षगांठ पर उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देश में 3 करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसके मुकाबले एक वर्ष पहले समान अवधि में वृद्धि दर 5 प्रतिशत से भी कम थी।
गिरिधर ने कहा कि जीएसटी 2.0 ने छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों जैसे भारत के बड़े उपभोक्ता वर्ग द्वारा खरीदे जाने वाले वाहनों की ऑन-रोड लागत को स्थायी रूप से कम किया। इससे केवल मांग पहले से आगे नहीं आई, बल्कि बाजार का वास्तविक विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा, इस तेज वृद्धि का सबसे बड़ा आधार एक शब्द है - किफायती कीमत। उन्होंने कहा कि इस सुधार के बाद पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों और लंबे समय से खरीद टाल रहे उपभोक्ताओं की शोरूम में वापसी हुई है।
फाडा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले त्योहारी सीजन में जो मजबूत मांग देखने को मिली थी, वह केवल मौसमी नहीं थी, बल्कि अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति (न्यू नॉर्मल) बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 का प्रभाव मौसमी नहीं बल्कि संरचनात्मक रहा है। इसी वजह से वर्ष के दौरान ऑटो उद्योग ने विभिन्न श्रेणियों में अपने सबसे मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया।
गिरिधर ने बताया कि दोपहिया वाहन, जिन्हें व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है, उन्होंने 2018 के बाद का सर्वोच्च स्तर फिर हासिल कर लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यात्री वाहनों के क्षेत्र में पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही कई श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी भारत से अधिक तेज रही है।
गिरिधर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को श्रेय देते हुए कहा कि नीतियों के केंद्र में किफायती वाहन उपलब्ध कराने की सोच रखने से ऑटो क्षेत्र में खपत और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वाहन निर्माता अभी भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबावों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, पिछले एक वर्ष का सबसे बड़ा सबक यही है कि मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे शक्तिशाली साधन है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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