जीएसटी 2.0 ने ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ाई, सस्ती कीमतों ने बढ़ाई मांग: इंडस्ट्री
नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। फाडा यानी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (एफएडीए) के अध्यक्ष साई गिरिधर ने मंगलवार को कहा कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल क्षेत्र की वृद्धि दर चार गुना तक बढ़ गई है और वाहन खरीदने की बढ़ी हुई क्षमता (अफोर्डेबिलिटी) मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक बनकर उभरी है।
जीएसटी 2.0 की पहली वर्षगांठ पर उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देश में 3 करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसके मुकाबले एक वर्ष पहले समान अवधि में वृद्धि दर 5 प्रतिशत से भी कम थी।
गिरिधर ने कहा कि जीएसटी 2.0 ने छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों जैसे भारत के बड़े उपभोक्ता वर्ग द्वारा खरीदे जाने वाले वाहनों की ऑन-रोड लागत को स्थायी रूप से कम किया। इससे केवल मांग पहले से आगे नहीं आई, बल्कि बाजार का वास्तविक विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा, इस तेज वृद्धि का सबसे बड़ा आधार एक शब्द है - किफायती कीमत। उन्होंने कहा कि इस सुधार के बाद पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों और लंबे समय से खरीद टाल रहे उपभोक्ताओं की शोरूम में वापसी हुई है।
फाडा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले त्योहारी सीजन में जो मजबूत मांग देखने को मिली थी, वह केवल मौसमी नहीं थी, बल्कि अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति (न्यू नॉर्मल) बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 का प्रभाव मौसमी नहीं बल्कि संरचनात्मक रहा है। इसी वजह से वर्ष के दौरान ऑटो उद्योग ने विभिन्न श्रेणियों में अपने सबसे मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया।
गिरिधर ने बताया कि दोपहिया वाहन, जिन्हें व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है, उन्होंने 2018 के बाद का सर्वोच्च स्तर फिर हासिल कर लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यात्री वाहनों के क्षेत्र में पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही कई श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी भारत से अधिक तेज रही है।
गिरिधर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को श्रेय देते हुए कहा कि नीतियों के केंद्र में किफायती वाहन उपलब्ध कराने की सोच रखने से ऑटो क्षेत्र में खपत और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वाहन निर्माता अभी भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबावों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, पिछले एक वर्ष का सबसे बड़ा सबक यही है कि मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे शक्तिशाली साधन है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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आरबीआई बढ़ती महंगाई के चलते 2026 में दो बार बढ़ा सकता है ब्याज दर: रिपोर्ट
RBI Interest Rates: ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म नोमुरा के ग्लोबल मैक्रो रिसर्च प्रमुख रॉब सुब्बारमन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि महंगाई का दबाव बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाली दोनों मौद्रिक नीति बैठकों (अक्टूबर और दिसंबर) में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। नोमुरा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि आने वाले महीनों में महंगाई 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। सुब्बारमन ने कहा कि भारत के पास वैश्विक निवेश आकर्षित करने और वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
भारत के पास विभिन्न क्षेत्रों में बड़े अवसर हैं, लेकिन अगर अमेरिका और उत्तर-पूर्व एशिया में एआई निवेश की कहानी बहुत मजबूत बनी रहती है, तो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में भारत पीछे रह सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अधिक पूंजी आकर्षित कर सकता है। एफसीएनआर-बी जमा में उम्मीद से बेहतर प्रवाह देखने को मिला है और मजबूत भुगतान संतुलन अधिशेष की भी संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा बैठक पर नजर
सुब्बारमन ने बताया कि बाजारों की नजर संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों और इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक पर है। वैश्विक मौद्रिक नीति पर सुब्बारमन ने कहा कि इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो संभवतः दिसंबर में हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है तो दरों में और बढ़ोतरी का जोखिम है। उन्होंने कहा कि एफओएमसी के ताजा अनुमान व्यापक रूप से सख्त मौद्रिक नीति की दिशा की ओर संकेत करते हैं। 18 नीति निर्माताओं में से 12 ने इस साल एक और दर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, जबकि चार ने दो और बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है और केवल दो ने आगे किसी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की है।
नीतिगत ब्याज दर बढ़ोतरी
अमेरिकी फेड ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया था। सुब्बारमन ने कहा कि बाजारों को उम्मीद है कि कूटनीति वैश्विक तनाव और अमेरिका-चीन व्यापार प्रतिबंधों को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे ऊर्जा की लागत और लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब भी दबाव बनाने की क्षमता है, क्योंकि ऊंची ऊर्जा कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईंधन की ऊंची कीमतें डाउनस्ट्रीम तेल कारोबार पर दबाव डाल रही हैं। अमेरिका में गैसोलीन की कीमत करीब 4.50 डॉलर और डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर के करीब 6.50 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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