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बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, पेट्रोल के पैसे मांगने पर हुए झगड़े के बाद कार ने कुचला

ढाका, 17 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अपनी चरमसीमा पर पहुंच गई है। ताजा मामले में बांग्लादेश के राजबारी जिले के सदर उपजिला में एक हिंदू व्यक्ति को जानबूझकर गाड़ी से कुचलकर मार दिया गया।

पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की जो तस्वीरें आ रही हैं, वह काफी परेशान करने वाली है। मरने वाले की पहचान 30 साल के रिपन साहा के तौर पर हुई है। रिपन राजबाड़ी में गोलंदा मोड़ के पास करीम फिलिंग स्टेशन पर काम करता था। बता दें, जिस शख्स ने इस घटना को अंजाम दिया है, उसका बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ गहरा कनेक्शन है।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने पुलिस और स्थानीय चश्मदीदों के हवाले से बताया कि यह घटना शुक्रवार को हुई जब तेल के पैसे मांगने पर ड्राइवर ने साहा को कुचल दिया। घटना के बाद रिपन की मौके पर ही मौत हो गई।

राजबाड़ी सदर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज खोंडकर जियाउर रहमान ने घटना की पुष्टि की और बताया कि पुलिस ने बाद में गाड़ी जब्त कर ली और उसके मालिक, बीएनपी की राजबाड़ी डिस्ट्रिक्ट यूनिट के पूर्व ट्रेजरर, अबुल हशेम को शुक्रवार दोपहर सदर उपजिला में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने आगे कहा कि ड्राइवर, कमल हुसैन को भी बनिभाह निजपारा गांव से हिरासत में लिया गया। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 ने रहमान के हवाले से कहा, यह कोई एक्सीडेंट नहीं है। हम हत्या की शिकायत दर्ज कराएंगे। फ्यूल के पैसे देने से मना करने पर वर्कर कार के सामने खड़ा हो गया, और ये लोग उसे कुचलकर भाग गए।

करीम फिलिंग स्टेशन के कर्मचारियों ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि एक काली लैंड क्रूजर ने शुक्रवार सुबह फिलिंग स्टेशन से 5,000 बांग्लादेशी टका का फ्यूल लिया। जब रिपन साहा ने बिना पैसे दिए गाड़ी को जाने से रोकने की कोशिश की, तो ड्राइवर ने उसे कुचल दिया और मौके से भाग गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

बता दें, यह एक महीने में दसवीं हत्या है जो पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा में बढ़ोतरी को दिखाती है। इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक और हिंदू आदमी की चाकू मारकर हत्या कर दी थी।

27 साल के ऑटो-रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव में एक फसल के खेत से मिली। इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर बार-बार हो रहे हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता जताई थी।

भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में हालात पर नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा के ऐसे कामों से सख्ती से निपटा जाएगा। बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। इस स्थिति पर दुनिया भर के लोगों और कई मानवाधिकार संस्थाओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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एलन मस्क ने धोखाधड़ी के आरोप में ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट से की 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। टेस्ला के सीईओ और एआई कंपनी एक्सएआई के फाउंडर एलन मस्क ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है। मस्क ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने गैर-लाभकारी उद्देश्य को छोड़ दिया और माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी करके उनके साथ धोखा किया।

एलन मस्क ने इस मामले में 79 अरब डॉलर से लेकर 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की है।

मस्क के वकील ने शुक्रवार को अदालत में दाखिल दस्तावेज में इस हर्जाने की जानकारी दी। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब एक संघीय न्यायाधीश ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें वे अप्रैल के अंत में होने वाले जूरी ट्रायल से बचना चाहते थे। यह मुकदमा अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के ऑकलैंड शहर में चलेगा।

अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, मस्क ने साल 2015 में ओपनएआई की स्थापना में मदद की थी और उस समय 38 लाख डॉलर की शुरुआती राशि दी थी। मस्क का कहना है कि आज ओपनएआई की कीमत करीब 500 अरब डॉलर हो चुकी है और उन्हें इस मूल्य का हिस्सा मिलना चाहिए।

मस्क के वकील स्टीवन मोलो ने कहा कि जैसे किसी स्टार्टअप में शुरुआती निवेश करने वाला व्यक्ति बाद में बहुत बड़ा मुनाफा कमा सकता है, उसी तरह ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने जो गलत फायदा कमाया है, उस पर अब एलन मस्क का भी हक बनता है।

एलन मस्क ने साल 2018 में ओपनएआई के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी शुरू की। साल 2024 में उन्होंने ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की।

मस्क का आरोप है कि सैम ऑल्टमैन ने ओपनएआई को गैर-लाभकारी संस्था से मुनाफे वाली कंपनी में बदलने की योजना बनाई, जो गलत है। हालांकि, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने एलन मस्क के सभी आरोपों को गलत बताया है।

ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि एलन मस्क का मुकदमा बेबुनियाद है और यह सिर्फ कंपनी को परेशान करने की कोशिश है। कंपनी ने कहा कि वह अदालत में सच साबित करने के लिए तैयार है।

ओपनएआई ने निवेशकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, एलन मस्क इस तरह के चौंकाने वाले दावे करते रहेंगे। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने अक्टूबर में अपनी कंपनी की संरचना में बदलाव की घोषणा की थी। इसके तहत माइक्रोसॉफ्ट को कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई, लेकिन गैर-लाभकारी संस्था का नियंत्रण अभी भी बना रहेगा।

सैम ऑल्टमैन ने एलन मस्क के मुकदमे को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया और कहा कि इसका मकसद सिर्फ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी की रफ्तार को धीमा करना है।

अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई ने गलत तरीके से 65.50 अरब से 109.43 अरब डॉलर तक का फायदा कमाया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट को 13.30 अरब से 25.06 अरब डॉलर तक का लाभ हुआ।

एलन मस्क ने यह भी कहा है कि वे सिर्फ नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त जुर्माने की मांग भी करेंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी/एएस

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छपरा के प्रशांत सिंह रणजी ट्रॉफी में चयनित, चौकों-छक्कों के साथ 140 की स्पीड में बरसाते हैं गेंद

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