8 दिसंबर सुबह सब कुछ सामान्य था। दोपहर 3:00 बजे एक फोन कॉल आया और उसके बाद 18 परिवारों की जिंदगी रुक गई। फोन पर एक महिला ने अपने पति की आवाज सुनी। उन्होंने कहा नेवी हमारा पीछा कर रही है। गोलियां चल रही है। इसके बाद फोन कट गया और फिर डेढ़ महीने तक सन्नाटा। यह कहानी है टैंकर वैलियंट रूट की और कहानी है 16 भारतीय नाविकों की जो आज भी ईरान की हिरासत में बंद है। दरअसल 8 दिसंबर 2025 को दुबई बेस्ड कंपनी ग्लोरी इंटरनेशनल एलएलसी का टैंकर वैलिंट रोड ओमान की खाड़ी में था। टैंकर पर कुल 18 लोग सवार थे। 16 भारतीय एक बांग्लादेशी और एक श्रीलंकाई। दोपहर करीब 3:00 बजे नाविकों ने अपने परिवारों को फोन पर बताया कि ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड यानी आईआरजीसी की नेवी उनके जहाज का पीछा कर रही है।
फोन पर गोलियों की आवाजें सुनाई दी। इसके बाद संपर्क टूट गया। 6 जनवरी को परिवारों से दोबारा संपर्क हुआ तब पता चला कि ईरान ने सभी 16 भारतीयों को पकड़ लिया है। 10 भारतीयों को जेल भेज दिया है। आठ लोग अब भी जहाज में कैद है। ईरान के बंदर अब्बास जेल में 10 भारतीय नाविक बंद है। उनमें शामिल है टैंकर के चीफ ऑफिसर अनिल कुमार सिंह। उनकी पत्नी गायत्री सिंह कहती हैं, पिछले 1/2 महीने से चैन की नींद नहीं सोई हूं। मेरे बेटे ने पीएमओ को 20 से 25 ईमेल किए हैं, लेकिन जवाब नहीं आया। मम्मी, मैं जल्दी घर आ रहा हूं। सरकार से ये उम्मीद है कि मेरे बच्चे को जल्दी भेज दे मेरे पास। बस। मोदी जी से भी यही हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूं मेरे बच्चे को ऐसे सही सलामत से बस और कुछ नहीं चाहिए मुझे उम्मीद करती हूं मेरा बच्चा जल्दी आ जाए।
कैप्टन विनोद परमार के भाई के मुताबिक जहाज पर गोलियां चलाई गई कुछ नाविक घायल हुए सभी 18 लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया गया सिर्फ बाथरूम जाने की इजाजत वह भी बंदूक की नोक पर मोबाइल लैपटॉप सभी सामान जब्त खाने के नाम पर सिर्फ थोड़ा सा राशन और सिर्फ पानी दिया गया। यानी साफ शब्दों में मानवाधिकारों का उल्लंघन। टैंकर पर एक और इंजीनियर थे केतन मेहता लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं। उनकी बहन शिवानी मेहता कहती हैं, हमें बस इतना पता है कि अब वह जहाज में नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया है। मेरी मां दिल की मरीज हैं और आईसीयू में है। अब ईरान का आरोप है कि टैंकर 6 मिलियन लीटर डीजल की स्मगलिंग कर रहा था।
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भारत ने राफेल फाइटर जेट को लेकर सबसे बड़ा और सबसे अहम कदम उठा लिया है। डिफेंस प्रिक्रोमेंट बोर्ड ने 114 राफेल मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट के प्रपोजल को क्लियर कर दिया है। अगर यह डील फाइनल होती है तो यह भारत के डिफेंस इतिहास की सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील होगी। लेकिन इस मेगा डील के साथ एक बड़ा विवाद भी चल रहा है। दरअसल डीपीबी क्लीयरेंस मतलब डील साइन नहीं हुई। लेकिन यह सबसे अहम पहला स्टेप होता है। इससे पहले टेक्निकल एवोल्यूशन, ऑपरेशनल जरूरत कॉस्ट एनालिसिस और लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजिक असेसमेंट इन सब पर कई सालों तक काम होता है।
डीपीबी की मंजूरी का मतलब है अगर आगे कोई बड़ी रुकावट नहीं आई तो 114 राफेल जेट्स भारत खरीदेगा। अब यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है कि भारत को 114 फाइटर जेट्स की जरूरत क्यों है? दरअसल इंडियन एयरफोर्स की जरूरत है 42 स्क्वाडन। मौजूदा ताकत है 30 से 31 स्क्वाडन की। एक स्क्वाडन में 16 से 18 फाइटर जेट होते हैं। अब समस्या यह है कि MIG-21, MG-2-27 और Jaguar यह सभी अगले कुछ सालों में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगर नई खरीद नहीं हुई तो भारत की एयरफोर्स 28 से 29 क्वार्डन पर गिर सकती है। यह स्थिति भारत के लिए रेड अलर्ट है।
खासकर तब जब पाकिस्तान और चीन दोनों फ्रंट एक्टिव हैं। अब भारत के पास विकल्प थे F15, F16, ग्रिफेन, एसयू, 57 आदि। लेकिन राफेल इसलिए चुना गया क्योंकि यह कॉम्बैट वन एयरक्राफ्ट है। भारत ने पहले भी 36 राफेल खरीदे हैं। इंडियन एयरफोर्स द्वारा पूरी तरह से टेस्टेड और ऑपरेशनल है। राफेल मल्टी रोल कैपेबिलिटी से लैस है। यह डीप स्ट्राइक, न्यूक्लियर डिलीवरी और मैरिटाइम स्ट्राइक में सबसे आगे है। यानी वन एयरक्राफ्ट मल्टीपल रोल्स और सबसे बड़ी बात नया एयरक्राफ्ट लेने में 5 से 7 साल सिर्फ टेस्टिंग में लगते हैं।
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