सरकार गिग वर्कर्स और घरेलू सहायकों के लिए जल्द शुरू कर सकती है नई माइक्रोक्रेडिट योजना, बिना गारंटी के मिलेगा लोन
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार गिग वर्कर्स, घरेलू सहायकों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए जल्द ही एक नई लोन स्कीम शुरू करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अप्रैल 2026 से एक माइक्रोक्रेडिट योजना शुरू कर सकती है, जिसके तहत हर साल बिना किसी गारंटी के 10,000 रुपए तक का लोन दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह योजना प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि) योजना की तर्ज पर बनाई जा रही है। इस योजना के जरिए पहले से ही रेहड़ी-पटरी वालों को छोटे कामकाजी लोन दिए जाते हैं। इस नई योजना की रूपरेखा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय तैयार कर रहा है।
पीएम-स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को पहले चरण में 10,000 रुपए का लोन मिलता है। अगर वे समय पर लोन चुका देते हैं, तो उन्हें बाद में 20,000 रुपए और फिर 50,000 रुपए तक का लोन मिल सकता है। इसके साथ ही 7 प्रतिशत ब्याज में छूट और डिजिटल भुगतान अपनाने पर अतिरिक्त फायदे भी दिए जाते हैं।
नई योजना का मकसद गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की मदद करना है। ऐसे कई कामगार होते हैं जिनका कोई बैंक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे उन्हें मोटरसाइकिल या काम से जुड़े जरूरी सामान खरीदने के लिए लोन नहीं मिल पाता। यह योजना उनकी इसी समस्या को दूर करने के लिए लाई जा रही है।
इस योजना में वही लोग पात्र होंगे, जिनकी पहचान सरकारी रिकॉर्ड में होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत कामगार, जिनके पास सरकारी पहचान पत्र और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होगा उन्हें इस योजना का लाभ मिल सकता है।
पीएम-स्वनिधि योजना में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए लाइसेंस और नगर निकाय के सर्वे में नाम होना जरूरी होता है। नई योजना में भी इसी तरह की जांच प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
नवंबर 2025 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से ज्यादा असंगठित कामगार और 5.09 लाख से ज्यादा गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स पंजीकृत हो चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन कामगारों का रिकॉर्ड सत्यापित होगा, उन्हें सबसे पहले लोन दिया जाएगा।
सरकार ने पहले ही पीएम-स्वनिधि योजना को नए रूप में आगे बढ़ाने की जानकारी दी थी। इस योजना से कुल 1 करोड़ 15 लाख लोगों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं।
अब इस योजना की लोन अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2030 तक कर दिया गया है, जिसके लिए सरकार ने कुल 7,332 करोड़ रुपए का बजट तय किया है।
नई व्यवस्था के तहत पहले और दूसरे चरण में लोन की राशि बढ़ाई गई है। इसके अलावा, जो लाभार्थी दूसरा लोन समय पर चुका देंगे, उन्हें यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाएगा।
इस योजना का दायरा अब केवल कस्बों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धीरे-धीरे जनगणना वाले कस्बों, अर्ध-शहरी क्षेत्रों आदि तक भी बढ़ाया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, पेट्रोल के पैसे मांगने पर हुए झगड़े के बाद कार ने कुचला
ढाका, 17 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अपनी चरमसीमा पर पहुंच गई है। ताजा मामले में बांग्लादेश के राजबारी जिले के सदर उपजिला में एक हिंदू व्यक्ति को जानबूझकर गाड़ी से कुचलकर मार दिया गया।
पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की जो तस्वीरें आ रही हैं, वह काफी परेशान करने वाली है। मरने वाले की पहचान 30 साल के रिपन साहा के तौर पर हुई है। रिपन राजबाड़ी में गोलंदा मोड़ के पास करीम फिलिंग स्टेशन पर काम करता था। बता दें, जिस शख्स ने इस घटना को अंजाम दिया है, उसका बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ गहरा कनेक्शन है।
बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने पुलिस और स्थानीय चश्मदीदों के हवाले से बताया कि यह घटना शुक्रवार को हुई जब तेल के पैसे मांगने पर ड्राइवर ने साहा को कुचल दिया। घटना के बाद रिपन की मौके पर ही मौत हो गई।
राजबाड़ी सदर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज खोंडकर जियाउर रहमान ने घटना की पुष्टि की और बताया कि पुलिस ने बाद में गाड़ी जब्त कर ली और उसके मालिक, बीएनपी की राजबाड़ी डिस्ट्रिक्ट यूनिट के पूर्व ट्रेजरर, अबुल हशेम को शुक्रवार दोपहर सदर उपजिला में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।
उन्होंने आगे कहा कि ड्राइवर, कमल हुसैन को भी बनिभाह निजपारा गांव से हिरासत में लिया गया। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 ने रहमान के हवाले से कहा, यह कोई एक्सीडेंट नहीं है। हम हत्या की शिकायत दर्ज कराएंगे। फ्यूल के पैसे देने से मना करने पर वर्कर कार के सामने खड़ा हो गया, और ये लोग उसे कुचलकर भाग गए।
करीम फिलिंग स्टेशन के कर्मचारियों ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि एक काली लैंड क्रूजर ने शुक्रवार सुबह फिलिंग स्टेशन से 5,000 बांग्लादेशी टका का फ्यूल लिया। जब रिपन साहा ने बिना पैसे दिए गाड़ी को जाने से रोकने की कोशिश की, तो ड्राइवर ने उसे कुचल दिया और मौके से भाग गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बता दें, यह एक महीने में दसवीं हत्या है जो पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा में बढ़ोतरी को दिखाती है। इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक और हिंदू आदमी की चाकू मारकर हत्या कर दी थी।
27 साल के ऑटो-रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव में एक फसल के खेत से मिली। इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर बार-बार हो रहे हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता जताई थी।
भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में हालात पर नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा के ऐसे कामों से सख्ती से निपटा जाएगा। बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। इस स्थिति पर दुनिया भर के लोगों और कई मानवाधिकार संस्थाओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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