ईरान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच, छात्रों और तीर्थयात्रियों सहित कई भारतीय नागरिक शुक्रवार देर रात नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। ईरान में अस्थिरता को देखते हुए भारतीय सरकार द्वारा वहां मौजूद अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दिए जाने के बाद ये आगमन हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरान से लौटे एक भारतीय नागरिक ने स्थिति को बिगड़ता हुआ बताया और भारतीय अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा कि वहां हालात खराब हैं। भारत सरकार बहुत सहयोग कर रही है और दूतावास ने हमें जल्द से जल्द ईरान छोड़ने के बारे में जानकारी दी। ‘मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है। अधिकारियों ने बताया कि ईरान से भारतीयों को लेकर आने वाली पहली उड़ान, महान एयर की तेहरान से उड़ान संख्या W5-071, दिल्ली हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतर गई। लौटने वालों के परिवार टर्मिनल पर अपने रिश्तेदारों का स्वागत करने के लिए जमा हुए, जिनमें अशांति के कारण फंसे तीर्थयात्री भी शामिल थे।
एक अन्य लौटे हुए व्यक्ति ने बताया कि प्रतिबंधों के कारण संचार मुश्किल हो गया था। यात्री ने एएनआई को बताया हम वहां एक महीने तक रहे, लेकिन हमें मुख्य रूप से आखिरी एक-दो हफ्तों में परेशानी हुई। जब हम बाहर निकलते, तो प्रदर्शनकारी गाड़ी के सामने आकर हंगामा करते। इंटरनेट बंद था, इसलिए हम अपने परिवारों को कुछ नहीं बता पाए और चिंतित थे। हम दूतावास से भी संपर्क नहीं कर पाए। जम्मू और कश्मीर के एक तीसरे भारतीय नागरिक ने कहा कि स्थिति खतरनाक हो गई थी। “मैं जम्मू और कश्मीर का निवासी हूं… वहां के प्रदर्शन खतरनाक थे। भारत सरकार ने बहुत अच्छा प्रयास किया और छात्रों को वापस ले आई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमीनी स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देने की तैयारी चल रही है, जिसमें वापस यात्रा करने के इच्छुक भारतीय नागरिकों की वापसी को सुविधाजनक बनाना भी शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि घटनाक्रम के अनुसार योजनाओं की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि ईरान के विभिन्न हिस्सों में फंसे भारतीय छात्रों का विवरण एकत्र किया जा रहा है, हालांकि कई क्षेत्रों में इंटरनेट बंद होने के कारण संचार धीमा हो गया है।
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मोहल्ले का वह शख्स जो कल तक राशन के लिए उधार मांग रहा था। आज अचानक बाउंसर्स के साथ घूम रहा है और अत्याधुनिक हथियार बेचने की दुकान खोल ली है। ये बात पाकिस्तान की हो रही है। जो देश कल तक आईएमएफ की किस्तों पर टिका हुआ था वो अब अरब जगत में एक डिफेंस पावर हाउस बनने की राह पर है। ऐसा क्या हो गया कि पाकिस्तान अपने जेएफ17 फाइटर इतनी तेजी से बेच रहा है कि अब उसे आईएमएफ के लोन की भी जरूरत नहीं है। दरअसल, दक्षिणी पूर्वी एशिया का सबसे बड़ा देश है इंडोनेशिया जो अपनी वायु सेना को अगले कई दशकों के लिए तैयार करने की योजना बना रहा है और इसके लिए वह पाकिस्तान से 40 से ज्यादा JF17 लड़ाकू विमानों की खरीद करने की भी सोच रहा है। जेएफ17 वही फाइटर जेट है जिसका मुकाबला भारत के तेजस से होता है। यानी कि तेजस और जेएफ 17 दोनों के बीच में एक तरह का कंपटीशन चलता रहता है। हालांकि यहां पर आपको ये बता दें कि तेजस का जो निर्माण है वो पूरी तरह से भारत में हो रहा है। हालांकि उसमें जो इंजन है वो अमेरिका का है लेकिन फिर भी तेजस को भारत बना रहा है। चीजें भले ही कुछ हम बाहर से खरीद रहे हो। लेकिन जो जेएफ17 है उसका निर्माण पाकिस्तान और चीन दोनों मिलकर कर रहे हैं।
ऐसी खबरें आ रही हैं कि इंडोनेशिया पाकिस्तान से जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रहा है, जिसके बाद भारत का रक्षा प्रतिष्ठान सतर्क हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब नई दिल्ली और जकार्ता ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए 45 करोड़ डॉलर के सौदे को अंतिम रूप देने के उन्नत चरण में हैं। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री शफरी शमसोद्दीन और पाकिस्तान वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस मुद्दे ने जोर पकड़ा। खबरों के अनुसार, वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने 40 जेएफ-17 बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की पेशकश की, जो सहयोगी देशों पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित विमान हैं।
भारत दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का मुकाबला करने में इंडोनेशिया को एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, ऐसे में इस्लामाबाद और बीजिंग से जुड़े प्लेटफार्मों के साथ जकार्ता की बढ़ती रक्षा भागीदारी ने नई दिल्ली में चिंता पैदा कर दी है। भारत की चिंता को और बढ़ाते हुए, ऐसी खबरें हैं कि इंडोनेशिया भी पाकिस्तानी निर्मित लड़ाकू ड्रोन खरीदने पर विचार कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के साथ तेजी से मजबूत होते रक्षा संबंधों के बीच, बांग्लादेश वायु सेना ने जेएफ-17 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए बातचीत शुरू कर दी है, जो चीन समर्थित इस विमान को बाजार में उतारने के लिए इस्लामाबाद के व्यापक क्षेत्रीय प्रयासों का संकेत है।
पाकिस्तान ने हाल ही के वर्षों में हथियार निर्यात को कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाते हुए कई बड़े सौदे किए हैं। लीबिया के साथ लगभग $4 अरब डॉलर का करार अब तक का उसका सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। जिसके तहत 16 JF7 थंडर लड़ाकू विमान और 12 सुपर मुशक ट्रेनर एयरक्राफ्ट दिए जा रहे हैं। वहीं सूडान के लिए करीब 1.5 अरब डॉलर के ड्रोन, लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणालियां सप्लाई की जा रही हैं। जिनकी फंडिंग सऊदी अरब कर रहा है। जबकि आपूर्ति पाकिस्तान की है। इसके अलावा सऊदी अरब के साथ 2 से 4 अरब डॉलर तक का संभावित सौदा सामने आया है। जिसमें जीएफ7 लड़ाकू विमानों को बिक्री के लिए पाकिस्तान के पुराने कर्ज चुकाने के लिए एक कर्ज के बदले हथियार मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
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