Diabetes Routine: डायबिटीज में क्या खाएं, क्या नहीं? हेल्दी रहने के लिए इन 5 बातों का रखें खास ध्यान
Diabetes Routine: डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की खान-पान की आदतों पर भी ध्यान देने का संकेत देती है। सही समय पर सही भोजन चुनना, पोर्शन कंट्रोल रखना और मीठे व ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना ब्लड शुगर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा हो सकता है।
अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज से जूझ रहा है, तो डाइट को लेकर थोड़ी सावधानी लंबे समय में काफी मददगार हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार डाइट में बदलाव करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
इन बातों का रखें ध्यान
प्लेट में फाइबर और सब्जियों को दें जगह
डायबिटीज में खाने की प्लेट में गैर-स्टार्च वाली सब्जियों को पर्याप्त जगह देना उपयोगी हो सकता है। पालक, लौकी, तोरई, भिंडी, फूलगोभी, पत्तागोभी और अन्य हरी सब्जियां डाइट का हिस्सा बनाई जा सकती हैं। सलाद और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी भोजन को संतुलित बनाने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को डायबिटीज का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठे से रहें सावधान
चीनी से बने पेय, मिठाइयां, मीठे बिस्किट और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है। सफेद ब्रेड, मैदा और अन्य रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट भी ब्लड शुगर पर असर डाल सकते हैं। इनकी जगह साबुत अनाज और फाइबर वाले विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
फल खाएं, लेकिन जूस नहीं
डायबिटीज होने पर फल पूरी तरह बंद करने की जरूरत आमतौर पर नहीं होती। साबुत फल फाइबर समेत कई पोषक तत्व प्रदान करते हैं। वहीं फलों का जूस, खासकर बिना फाइबर वाला मीठा पेय, कम फायदेमंद विकल्प हो सकता है। फल की मात्रा और चुनाव व्यक्ति की कुल डाइट तथा ब्लड शुगर के अनुसार तय करना बेहतर है।
प्रोटीन और हेल्दी फैट को डाइट में शामिल करें
दाल, चना, राजमा, बीन्स, अंडे, मछली, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद और अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत भोजन को संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं। वहीं नट्स और बीज जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद हेल्दी फैट भी डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है क्योंकि इनमें कैलोरी अधिक हो सकती है।
खाने के साथ लाइफस्टाइल पर भी दें ध्यान
सिर्फ डाइट बदलना ही पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव को मैनेज करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना भी डायबिटीज मैनेजमेंट का हिस्सा है। भोजन की मात्रा और समय में बहुत बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि इंसुलिन या कुछ दवाएं लेने वाले लोगों में ब्लड शुगर बहुत कम होने का जोखिम हो सकता है।
क्या नहीं भूलें?
डायबिटीज में कोई एक 'परफेक्ट डाइट' सभी लोगों के लिए समान नहीं होती। उम्र, वजन, दवाएं, शारीरिक गतिविधि, अन्य स्वास्थ्य स्थितियां और व्यक्तिगत खान-पान की आदतों के आधार पर डाइट प्लान अलग हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाली किसी भी डाइट को बिना विशेषज्ञ की सलाह के अपनाने के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल सलाह को प्राथमिकता दें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
Scratched Glasses Lenses: चश्मे पर आ गए हैं हल्के स्क्रैच? इन आसान तरीकों से करें साफ, नए जैसे दिखेंगे ग्लास
Bone Health: हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करेंगी ये 5 एक्सरसाइज, रोजाना करें और देखें लाभ
कर्ज की किस्त और ब्याज से हैं परेशान, तो काम आ सकते हैं ज्योतिषाचार्य के बताए गए ये उपाय
कर्ज से परेशान लोगों के लिए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित आरके शास्त्री ने पीली सरसों की पोटली, नारियल और कुबेर पूजा से जुड़े धार्मिक उपाय बताए हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय आस्था पर आधारित हैं और इन्हें कर्ज का निश्चित समाधान नहीं माना जाना चाहिए. कर्ज चुकाने के लिए आर्थिक योजना और आमदनी-खर्च का संतुलन बनाना भी जरूरी है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
News18










