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‘संगीत में सांप्रदायिकता नहीं होती’, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा के बाद सिंगर शान का एआर रहमान को जवाब

एआर. रहमान के 'कम्युनल' बयान पर शान, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा ने संगीत में भेदभाव से इनकार किया. शान ने कहा, 'लोगों की अपनी-अपनी राय होती है और वे हमेशा बंटे रहेंगे. यह कोई नियम नहीं है कि सबकी राय एक जैसी हो. लेकिन हमें इसे जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए.

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मारिया मचाडो से पहले इन लोगों ने बेच दिया था अपना नोबेल पुरस्कार, लिस्ट में शामिल हैं इतने नाम

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारियो कोरीना मचाडो को पिछले महीने शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन उन्होंने अपना नोबेल पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट में दे दिया. उन्होंने ट्रंप को तब अपना नोबेल पदक भेंट किया है जब उसे लेकर नियम है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति अपने नोबेल पदक को किसी के साथ शेयर नहीं कर सकता और ना ही उसे ट्रांसफर किया जा सकता है. हैरानी की बात ये है कि इसे बेचा जा सकता है. मारिया मचाडो से पहले पांच लोग अपने नोबेल पुरस्कार को बेच चुके हैं.

ट्रंप को नोबेल पदक भेंट कर क्या बोलीं मचाडो?

बता दें कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस के बंद कमरे में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की और अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल उन्हें भेंट कर दिया. मचाडो ने ट्रंप को नोबेल भेट करने को दोनों देशों की आजादी की साझा लड़ाई का ऐतिहासिक प्रतीक करार दिया. मचाडो ने कहा कि दो सदी पहले फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफिएट ने वेनेजुएला के स्वतंत्रता नेता सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला एक मेडल गिफ्त किया था. अब 200 साल बाद बोलिवर के लोग वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को यह पदक वापस कर रहे हैं. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी नोबेल पदक को अपने लिए सम्मान बताया.

ये विजेता बेच चुके हैं अपना नोबेल पुरस्कार

दिमित्री मुरातोव

मारिया मचाडो से पहले साल 2022 में रूस के पत्रकार मुरातोव ने अपना नोबेल शांति पदक नीलाम कर दिया था. उन्होंने इस पदक को यूक्रेन युद्ध से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए नीलाम किया था. जून 2022 में न्यूयॉर्क में हुई इस नीलामी में एक अज्ञात खरीदार ने इसे रिकॉर्ड 103.5 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था. मुरातोव ने अपने नोबल पुरस्कार की नीलामी से मिली पूरी रकम को यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों की मदद के लिए यूनिसेफ को दान कर दिया था.

जेम्स वॉटसन

उससे पहले साल 2014 में जेम्स वॉटसन ने भी अपना नोबेल पुरस्कार बेच दिया था. बता दें कि जेम्स वॉटसन को डीएनए संरचना की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वह जीवित रहते हुए अपना नोबेल पदक बेचने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने अपने नोबेल पदक को कुल 4.76 मिलियन डॉलर में बेच दिया था. जिसे रूस के अरबपति अलीशेर उस्मानोव ने खरीदा था. हालांकि विवाद के बाद उस्मानोव ने वॉटसन के सम्मान के रूप में उस पदक को उन्हें भेंट कर दिया था.

फ्रांसिस क्रिक

वॉटसन से ठीक एक साल पहले यानी 2013 में डीएनए की खोज में योगदान के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक को मिले नोबेल पुरस्कार को उनके परिवार ने उनकी मौत के बाद नीलाम कर दिया था. बता दें कि फ्रांसिस क्रिक को भी वॉटसन के साथ ही नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके नोबल पुरस्कार को चीन की एक बायोमेडिकल कंपनी के सीईओ जैक वांग ने 2.27 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था. वहीं इस नीलामी से मिली रकम को विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिक खोजों के लिए दान कर दिया गया था.

जॉन नैश

साल 2019 में जॉन नैश को मिले नोबेल पुरस्कार को नीलाम किया गया था. नैश को अर्थशास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार मिला था. गणितज्ञ जॉन नैश 'ए ब्यूटीफुल माइंड' फिल्म से मशहूर हुए थे. उनके इस नोबेल पुरस्कार को क्रिस्टी की नीलामी के जरिए 7.35 लाख डॉलर में बेच दिया था. उनके निधन के बाद उनके परिवार ने विरासत को संभालने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इसे बेचने का निर्णय लिया था.

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नील्स बोहर

साल 1940 में महान फिजिसिस्ट नील्स बोहर को परमाणु संरचना पर अनूठे काम के लिए नोबेल मिला था. लेकिन उन्होंने अपने नोबेल पदक को नीलाम कर दिया. नीलामी में मिली रकम को उन्होंने फिनलैंड युद्ध राहत के लिए दान दे दिया था. इस नोबेल पुरस्कार को एक अज्ञात खरीदार ने खरीदा लेकिन बाद में उसने डेनमार्क के एक म्यूजियम को इसे सौंप दिया. जो आज भी वहां रखा हुआ है.

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