Rishikesh Ganga Aarti controversy | ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती जारी रहेगी, उच्च न्यायालय ने शर्तों के साथ दी अनुमति
ऋषिकेश, जिसे 'विश्व की योग राजधानी' कहा जाता है, अपनी आध्यात्मिकता और शांति के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ के त्रिवेणी घाट पर होने वाली गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो आत्मा को शांति और दिव्यता से भर देता है। लेकिन इसे लेकर कुछ विवाद हुआ। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। अदालत ने जनहित और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए आरती को कुछ शर्तों के साथ जारी रखने की अनुमति दे दी है।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की अवकाशकालीन पीठ ने जनहित और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। मामले के अनुसार, ऋषिकेश नगर निगम ने एक आदेश जारी कर श्री गंगा सभा को गंगा आरती करने से इस आधार पर रोक दिया था कि उसका पंजीकरण समाप्त हो चुका है और इसलिए उसे आरती करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
नगर निगम ने श्री गंगा सभा पर व्यावसायिक शोषण और गंदगी फैलाने के आरोप भी लगाए थे। नगर निगम के इस आदेश को चुनौती देते हुए श्री गंगा सभा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने गंगा आरती के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का हिस्सा है और इसे अचानक रोकना उचित नहीं है। न्यायालय ने कहा कि वर्षों से जारी परंपरा को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक समाप्त करना जनहित में नहीं है और इससे तीर्थयात्रियों तथा पर्यटकों को गंभीर असुविधा हो सकती है।
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हालांकि न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि श्री गंगा सभा का पंजीकरण समाप्त हो चुका है और उसके पास कोई स्थायी अधिकार नहीं है, लेकिन अस्थायी व्यवस्था के रूप में गंगा आरती जारी रखने की अनुमति देना आवश्यक बताया। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की है और तब तक श्री गंगा सभा को आरती करने से रोकने के नगर निगम के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि श्री गंगा सभा आरती में भाग लेने के लिए किसी भी श्रद्धालु से कोई प्रवेश शुल्क या धन नहीं लेगी।
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नगर निगम की अनुमति के बिना फूल, दीये और अन्य पूजा सामग्री बेचने वाले स्थानीय दुकानदारों से कोई कमीशन या किराया भी नहीं लिया जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि घाट पर गंदगी न फैले, यह सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी श्री गंगा सभा की होगी। आरती के बाद फूल, कपूर, तेल आदि के अवशेषों का उचित निपटान अनिवार्य रूप से किया जाएगा ताकि गंगा नदी प्रदूषित न हो।
आध्यात्मिक महत्व
त्रिवेणी घाट ऋषिकेश का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र घाट है। माना जाता है कि यहाँ तीन पवित्र नदियों— गंगा, यमुना और सरस्वती—का अदृश्य संगम होता है। श्रद्धालु यहाँ पितृ तर्पण और पवित्र स्नान के लिए आते हैं, लेकिन शाम होते ही यहाँ का नजारा पूरी तरह बदल जाता है।
त्रिवेणी घाट की आरती का आयोजन अक्सर गीता भवन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। यहाँ की विशेषता यह है कि यह अन्य घाटों की तुलना में अधिक शांत और सामुदायिक अहसास कराती है। यहाँ बैठकर भक्त गंगा मैया के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिन्हें जीवन देने वाली देवी माना जाता है।
ओडिशा के बालासोर में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या के मामले में तीन लोग गिरफ्तार
ओडिशा पुलिस ने राज्य में मवेशियों की तस्करी में शामिल होने के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या में कथित रूप से शामिल तीन लोगों को बालासोर जिले से गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस घटना पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और राज्य की भाजपा सरकार को धार्मिक असहिष्णुता के मामले बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। बालासोर सदर क्षेत्र के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) शुभ्रांशु शेखर नायक ने कहा कि घटना बुधवार को हुई।
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उन्होंने बताया कि पहले सड़क दुर्घटना की शिकायत दर्ज कराई गई और बाद में पीड़ित के भाई ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि अस्तिया गांव के एसके मकंदर मोहम्मद (35) की भीड़ के हमले में मौत हो गई। उन्होंने बताया कि बालासोर सदर थाने में दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। एसडीपीओ ने पीटीआई को बताया, हमने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है जिन्हें बृहस्पतिवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने हमले में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार करने के लिए अभियान शुरू किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(2) (भीड़ द्वारा हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
राज्य के दो दिवसीय दौरे पर आए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादवने इस घटना पर कहा, भाजपा का एजेंडा सांप्रदायिक है। जब भी वह अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों को पूरा करने में कमजोर पड़ती है या विफल होती है तो सांप्रदायिक रास्ता अपनाती है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने एक पोस्ट में कहा, बालासोर में मवेशी को ले जाने को लेकर गौ रक्षकों द्वारा 35 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या करना ओडिशा में कानून व्यवस्था का घोर पतन है। किसी भी आरोप से भीड़ के शासन या स्वघोषित न्याय को वैधता नहीं दी जा सकती।
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संदेह के नाम पर किसी की जान लेना अपराध है, न्याय नहीं। सरकार को कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए और कानून के शासन को तत्काल मजबूत करना चाहिए। इस घटना पर भाजपा नेताओं की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस के मुताबिक, मवेशियों की तस्करी के शक में 35 वर्षीय एक व्यक्ति पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। उसने बताया कि बाद में बालासोर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उस व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक के परिजनों द्वारा दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, मृतक मकंदर मोहम्मद एक ‘पिक-अप वैन’ में सहायक के रूप में काम करता था।
14 जनवरी को जब वाहन सदर थाना क्षेत्र के सहादा गांव के पास जा रहा था तभी धारदार हथियारों से लैस कुछ लोगों ने मवेशियों से भरी वैन को रोककर चालक और सहायक पर हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि हमले में चालक और सहायक दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और मोहम्मद की उसी दिन अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस ने मवेशियों को बचाया और उन्हें मां भारती गौशाला में छोड़ दिया।
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