रूस-चीन वीजा-मुक्त नीति द्विपक्षीय संबंधों के विकास में स्थायी प्रेरक शक्ति है : रूसी प्रवक्ता
बीजिंग, 16 जनवरी (आईएएनएस)। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने 15 जनवरी को कहा कि रूस और चीन के बीच वीजा-मुक्त नीति दोनों देशों के बीच सीमा पार पर्यटन को बढ़ावा देती है, रूसी और चीनी लोगों के बीच आदान-प्रदान को और बढ़ाने में मदद करती है और द्विपक्षीय संबंधों के विकास में स्थायी प्रेरित शक्ति का संचार करती है।
उस दिन आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जखारोवा ने चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के संवाददाता के प्रश्नोत्तर में कहा कि वीजा-मुक्त नीति लागू होने के बाद से, रूस और चीन के बीच सीमा पार पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रूस चीन और अन्य देशों के पर्यटकों का स्वागत करता है। रूस में व्यापक पर्यटक स्वागत सुविधाएं उपलब्ध हैं और वह विदेशी पर्यटकों के लिए एक आरामदायक पर्यटन वातावरण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिसमें नए पर्यटन मार्गों का विकास, संबंधित उद्योगों का विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है।
जखारोवा ने आगे कहा कि रूस और चीन के पास प्रचुर सांस्कृतिक और पर्यटन संसाधन हैं। यात्रा दोनों देशों के लोगों के बीच एक-दूसरे की संस्कृतियों और परंपराओं की समझ को गहरा कर सकती है, आपसी आदान-प्रदान को और बढ़ावा दे सकती है और पारंपरिक मित्रता को मजबूत कर सकती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकारी स्तर पर सहमत आधिकारिक आदान-प्रदान के अलावा, रूसी और चीनी लोगों के बीच सहज सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी फला-फूला है, जो रूस-चीन संबंधों की मानविकी नींव को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन गया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 114 राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम के तहत डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (डीपीबी) ने शुक्रवार को फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट से 114 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, अब इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली अगली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
सूत्रों ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है।
पिछले साल, भारतीय वायु सेना ने रक्षा मंत्रालय को 114 और राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा था।
सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस अगले महीने ही 114 लड़ाकू जेट के अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
पिछले साल अप्रैल में, भारत ने भारतीय नौसेना को और अधिक ताकत देने के लिए फ्रांस के साथ 26 राफेल-मरीन लड़ाकू जेट खरीदने के लिए 63,000 करोड़ रुपए का एक ऐतिहासिक समझौता किया था।
यह खरीद अंतर-सरकारी समझौते के तहत की जाएगी, जिससे बिना किसी मध्यस्थ के सीधे विमानों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। 22 सिंगल-सीटर जेट और चार टू-सीटर प्रशिक्षण विमानों के लिए समझौता किया गया है, जिनकी आपूर्ति 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है।
जून में, डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान के धड़ के निर्माण के लिए चार उत्पादन हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो देश की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पहले धड़ के हिस्से वित्त वर्ष 2028 में असेंबली लाइन से निकलने की उम्मीद है, और संयंत्र से प्रति माह दो पूर्ण धड़ तक की आपूर्ति की उम्मीद है।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स हैदराबाद में राफेल के प्रमुख संरचनात्मक भागों, जिनमें पिछले धड़ के पार्श्व आवरण, पूरा पिछला भाग, केंद्रीय धड़ और अगला भाग शामिल हैं, के निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र स्थापित करेगा।
--आईएएनएस
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