जातिवार जनगणना के बाद UP का चार हिस्सों में हो सकता है बंटवारा: Om Prakash Rajbhar
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने राज्य के बंटवारे के लगभग दो दशक पुराने मुद्दे को फिर से उठाया है। सुभासपा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा है। राजभर ने कहा है कि जातिवार जनगणना के बाद देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है।
राजभर ने रविवार को देवरिया में सुभासपा की ओर से आयोजित ‘सामाजिक समरसता महा रैली’ को संबोधित करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जातिवार जनगणना के बाद राज्य का बंटवारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं 27 फीसदी आरक्षण के मामले में देश के प्रधानमंत्री के पास गया था। उन्होंने (मोदी) कहा कि ओम प्रकाश जी आपकी बात सही है, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
मैंने उनसे आगे का रास्ता पूछा, तो प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि वह जातिवार जनगणना कराएंगे और एक बार जातियों की गिनती हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश का बंटवारा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। हम जातिवार जनगणना के बाद बंटवारा करेंगे।” राजभर ने कहा, “अब आप ही बताइए, हमें प्रधानमंत्री पर भरोसा करना चाहिए या सपा, बसपा और कांग्रेस के लोगों की बात माननी चाहिए?” उत्तर प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजभर की इस टिप्पणी के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने न केवल उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग उठाई थी, बल्कि राज्य विधानसभा से उत्तर प्रदेश को अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम प्रदेश में बांटने का प्रस्ताव भी पारित कराया था।
पूर्वांचल में मुख्य रूप से राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों का खासा असर है। सुभासपा प्रमुख ने रैली में मौजूद लोगों से कहा कि जब पूर्वांचल राज्य बनेगा, तो राजभर बिरादरी का ही कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा। उन्होंने कहा, “आज जब कोई राजभर युवा पीला गमछा पहनकर कहीं जाता है, तो उसे दूर से ही राजभर के बेटे के तौर पर पहचाना जा सकता है।
और अगर हमें यह पहचान किसी ने दी है, तो वह ओम प्रकाश राजभर है।” राजभर ने कहा, “युवाओं, हिम्मत मत हारो। राज्य को चार हिस्सों में बांटा जाएगा। और जिस दिन पूर्वांचल राज्य बनेगा, अगर किसी जाति से मुख्यमंत्री बनना होगा, तो पूर्वांचल का मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही बनेगा।
काम करते समय यह बात ध्यान में रखना। सपा, बसपा या कांग्रेस में शामिल होने के लिए गुमराह मत होना।” अलग-अलग समय पर, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) और कांग्रेस जैसी पार्टियों के अलावा कई संगठनों ने भी उत्तर प्रदेश को बांटने की मांग उठाई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने राज्य के विभाजन की बात को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी बंटवारे के पक्ष में नहीं है।
निषाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पहले भी उत्तर प्रदेश को बांटने की मांग की जाती रही है, लेकिन अब प्रदेश सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष विकास कोष आवंटित किए गए हैं। चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं और इस तरह की बात भ्रामक हो सकती है।” सोमवार को लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश को बांटने के विचार का फिर से विरोध किया।
उन्होंने कहा, “जो लोग इस देश को बांटने की बात कर रहे हैं, वे इस प्रदेश को भी बांटने की बात कर रहे हैं। यह देश बहुत बड़ा है। हम सभी को हमारे देश को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा।” वहीं, बसपा की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख विश्वनाथ पाल ने कहा कि उनकी पार्टी ने खोखले वादे नहीं किए।
पाल ने उत्तर प्रदेश को विभाजित करने के प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसे मायावती सरकार के दौरान विधानसभा में मंजूर किया गया था। उन्होंने कहा, “मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में बड़े जिलों का विभाजन किया गया था, ताकि वे बेहतर विकास कर सकें। यही वजह है कि हमें लगता है कि इस संबंध में कोई महत्वपूर्ण कदम तभी उठाया जाएगा, जब उत्तर प्रदेश और केंद्र में बहनजी सत्ता में होंगी।
West Bengal: सांप्रदायिक तनाव की साजिश मामले में MLA Humayun Kabir बहरामपुर थाने पहुंचे
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर दो समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कथित साजिश से जुड़े एक मामले के सिलसिले में सोमवार को पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष पेश हुए। कबीर तय समय सुबह 11 बजे से पहले ही बहरामपुर पुलिस थाना पहुंच गए और कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। नवादा से विधायक कबीर ने यह आशंका भी जताई कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
यह घटनाक्रम छह अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले सामने आया है। कबीर द्वारा नवादा सीट को अपने पास रखने का फैसला करने और रेजीनगर सीट से इस्तीफा देने के कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। एजेयूपी ने इस उपचुनाव के लिए कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है।
कबीर ने कहा, तीन पुलिस अधिकारियों ने पहले मेरे ससुर को एक झूठे मामले में फंसाया था। बाद में उन्हें अदालत में आलोचना का सामना करना पड़ा था। अब उन्होंने मुझे समन भेजा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस द्वारा हाल ही में बहरामपुर में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी करने के बाद 14 सितंबर को यह मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने दावा किया कि इस बातचीत से दो समुदायों के बीच तनाव भड़काने की संभावित साजिश का संकेत मिलता है। पुलिस के अनुसार, यह बातचीत हाल ही में रिकॉर्ड की गई थी, जब रेजीनगर उपचुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी थी।
जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इस रिकॉर्डिंग में किसी आपराधिक साजिश के सबूत मौजूद हैं। इस बीच, एजेयूपी प्रमुख ने उपचुनाव से पहले अपनी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। कबीर ने कहा, पुलिस प्रशासन मेरी पार्टी के लोगों को धड़ाधड़ गिरफ्तार कर रहा है।
अगर वे चाहें तो मुझे भी गिरफ्तार कर सकते हैं। आयोग को दी गई कबीर की शिकायत के अनुसार, बहरामपुर पुलिस जिले के अधीक्षक ने अपनी तटस्थता खो दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन गिरफ्तारियों का मकसद ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के चुनाव प्रचार में बाधा डालना था।
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