आईजीएनसीए ने यमुना की सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने के लिए की 7वें नदी उत्सव की घोषणा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने आज 7वें नदी उत्सव की घोषणा के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. यह उत्सव 24 से 26 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा और इस साल का उत्सव यमुना और उसके गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और सभ्यतागत महत्व को समर्पित है.तीन दिवसीय इस उत्सव का उद्घाटन दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू करेंगे, जिसमें स्वामी अवधेशानंद गिरि जी और श्रीमती शोवना नारायण सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगे.
सच्चिदानंद जोशी ने बताई उत्सव की रूपरेखा
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आईजीएनसीए (IGNCA)के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने उत्सव की रूपरेखा बताई और नदियों को केवल भौतिक और पारिस्थितिक आयामों से परे, यादों, संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक अनुभवों के जीवंत भंडार के रूप में देखने के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला.
“नदी केवल एक भौगोलिक इकाई या पानी का स्रोत नहीं है; यह हमारी सभ्यतागत यादों का जीवंत भंडार है. यमुना सदियों से हमारी सांस्कृतिक कल्पना, परंपराओं, कला, साहित्य और सामूहिक चेतना का अभिन्न अंग रही है. नदी उत्सव के माध्यम से, हम नदी के इन विविध आयामों को सार्वजनिक चर्चा में लाना चाहते हैं और जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में नदियों के साथ हमारे संबंधों की गहरी समझ विकसित करना चाहते हैं. यह उत्सव लोगों को यमुना के सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व से फिर से जोड़ने और इसकी पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत दोनों को संरक्षित करने के बारे में हमारी सामूहिक बातचीत को नया रूप देने का एक प्रयास है.” डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सेक्रेटरी मेंबर, आईजीएनसीए (IGNCA)
फिल्म फेस्टिवल के तहत दिखाई जाएंगी 17 चुनिंदा फिल्में
तीन दिवसीय इस उत्सव में सेमिनार, व्याख्यान श्रृंखला, प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, फिल्म फेस्टिवल और प्रस्तुतियां शामिल होंगी. इसमें देश भर के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, कलाकार, सांस्कृतिक क्षेत्र के लोग और प्रतिभागी यमुना के विभिन्न आयामों को जानने-समझने के लिए एक साथ आएंगे.फिल्म फेस्टिवल के तहत 17 चुनिंदा फिल्में दिखाई जाएंगी, जिनमें से कुछ फिल्में पहली बार दिखाई जा रही हैं. पिछले कुछ सालों में, 'नदी उत्सव' ने शौकिया और उभरते हुए फिल्म निर्माताओं को भी बहुत मदद और एक मंच दिया है, जिससे नदियों पर उनके नज़रिए और रचनात्मक काम को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने में मदद मिली है. 24 सितंबर को सुबह 7 बजे वासुदेव घाट पर एक पेंटिंग वर्कशॉप भी होगी, जिसमें हिस्सा लेने वालों को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के ज़रिए यमुना से जुड़ने का मौका मिलेगा.
नदी ने पीढ़ियों को कैसे प्रेरित और प्रभावित किया
इस बार का उत्सव खास तौर पर इस बात पर ध्यान देगा कि यमुना ने इस इलाके की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान बनाने में क्या भूमिका निभाई है. परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति से लेकर कहानियों, यादों और सामुदायिक रीति-रिवाजों तक, यह उत्सव इस बात को समझेगा कि नदी ने पीढ़ियों को कैसे प्रेरित और प्रभावित किया है. यह उत्सव नदियों, पर्यावरण और संस्कृति के आपसी जुड़ाव पर बातचीत को भी बढ़ावा देगा, ताकि नदियों को सिर्फ़ भौगोलिक चीज़ों के बजाय जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के तौर पर बेहतर ढंग से समझा जा सके.
7वां 'नदी उत्सव' 24 से 26 सितंबर तक नई दिल्ली में किया जाएगा आयोजित
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजीएनसीए (IGNCA) के 'जनपद संपदा' विभाग के प्रमुख प्रो. के. अनिल कुमार, 'नदी उत्सव' के संयोजक श्री अभय मिश्रा और आईजीएनसीए (IGNCA) के मीडिया सेंटर के कंट्रोलर श्री अनुराग पुनेठा भी मौजूद थे. उन्होंने उत्सव के कार्यक्रम और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी.तीन दिनों तक चलने वाले 'नदी उत्सव' में दर्शकों को कई सांस्कृतिक रूपों के ज़रिए यमुना का अनुभव करने का मौका मिलेगा. साथ ही, वे इस इलाके के लोगों, परंपराओं और सामूहिक यादों के लिए यमुना के सदाबहार महत्व पर भी विचार कर सकेंगे.
'नदी उत्सव' के ज़रिए IGNCA भारत की नदियों और देश की सभ्यतागत विरासत के साथ उनके गहरे रिश्ते पर बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है. साथ ही, यह उत्सव नदियों के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने और उन्हें बचाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर देगा.'इस बार यमुना' थीम वाला 7वां 'नदी उत्सव' 24 से 26 सितंबर, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा.
14 साल पुराने रेप मर्डर केस में फिर जांच होगी:सुप्रीम कोर्ट बोला-जिस तरह जांच हुई उसने अंतरात्मा को झकझोर दिया, 3 महीने में रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के धर्मस्थला में 17 साल की छात्रा के रेप-मर्डर केस की दोबारा जांच का आदेश दिया। मामला 2012 का है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कर्नाटक सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने और तीन महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले जिस तरह जांच हुई उसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। मां की याचिका पर आया आदेश सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़ित छात्रा की मां की याचिका पर दिया। 17 साल की छात्रा 9 अक्टूबर 2012 को कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थी। वह धर्मस्थला के पास उजिरे में पढ़ती थी। अगले दिन उसका शव मिला। जांच में यौन हमले और हत्या के सबूत मिले थे। इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी। इसके बाद कर्नाटक CID और फिर CBI ने जांच की। CBI की स्पेशल कोर्ट ने जून 2023 में मामले में आरोपी बनाए गए एकमात्र व्यक्ति संतोष राव को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था। SIT में पुराने जांच अधिकारियों को जगह नहीं पीड़ित को न्याय दिलाना समाज का कर्तव्य सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से आरोपी बनाए गए व्यक्ति के साथ हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है। लेकिन बेरहमी से रेप और मर्डर की शिकार नाबालिग के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता। अगर समाज ऐसे जघन्य अपराध में सही जांच और असली अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय नहीं देता, तो वह अपना कर्तव्य निभाने में असफल होगा। -------------------------
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