मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री से की यूपीआई पेमेंट शुल्क से पूरी तरह छूट की मांग
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से छोटे और मध्यम मोबाइल फोन विक्रेताओं को प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) या यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मोबाइल रिटेलर्स पहले से ही बेहद सीमित मुनाफे पर कारोबार कर रहे हैं और अतिरिक्त शुल्क उनके लिए बड़ा बोझ साबित हो सकता है।
वित्त मंत्री को लिखे पत्र में एआईएमआरए ने कहा कि वह देशभर के 1.50 लाख से अधिक छोटे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करता है।
एसोसिएशन के अनुसार, यदि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाता है, तो इससे खुदरा विक्रेताओं की लागत सीधे बढ़ जाएगी। ऐसे समय में यह फैसला और अधिक दबाव पैदा करेगा, जब मोबाइल रिटेल कारोबार पहले से कमजोर बिक्री और बढ़ती परिचालन लागतों का सामना कर रहा है।
एआईएमआरए ने कहा, मुख्यधारा के मोबाइल रिटेलर्स का शुद्ध लाभ मार्जिन आमतौर पर केवल 0.75 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत के बीच होता है। यदि यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाता है, तो यह सीधे उनके अस्तित्व से जुड़े मुनाफे को कम कर देगा।
संगठन का कहना है कि यूपीआई अब खुदरा कारोबार में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क लागू होने का प्रभाव सीधे कारोबार की लाभप्रदता पर पड़ेगा।
एसोसिएशन के अनुसार, यदि कोई रिटेलर हर महीने 10 लाख रुपए से 40 लाख रुपए तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन करता है, तो 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होने पर उसे 4,000 रुपए से 16,000 रुपए तक की अतिरिक्त मासिक लागत उठानी पड़ सकती है।
एआईएमआरए ने स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। संगठन के मुताबिक, नवंबर 2025 के बाद से कंपोनेंट्स और मेमोरी की लागत बढ़ने से हैंडसेट की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
एसोसिएशन का दावा है कि वर्ष 2025 में लगभग 10,000 रुपए में उपलब्ध एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमत अब बढ़कर 17,000 रुपए के आसपास पहुंच गई है और दिसंबर 2026 तक यह 20,000 रुपए तक जा सकती है।
एआईएमआरए ने कहा कि बढ़ती कीमतों और मांग में नरमी के कारण खुदरा विक्रेताओं का कारोबार पहले ही प्रभावित हुआ है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क छोटे दुकानदारों पर और अधिक वित्तीय दबाव डाल सकता है।
रिटेलर्स संगठन ने सरकार से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहला, छोटे और मध्यम रिटेलर्स के लिए यूपीआई एमडीआर से पूर्ण छूट। दूसरा, कम लागत वाले डिजिटल भुगतान तंत्र की निरंतर उपलब्धता। तीसरा, किसी भी नए शुल्क ढांचे को लागू करने से पहले व्यापार संगठनों से परामर्श और चौथा, खुदरा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त नीतिगत समर्थन।
एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति के तहत छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से बचाना जरूरी है, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन की वृद्धि और खुदरा व्यापार दोनों को समान रूप से समर्थन मिल सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
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आईजीएनसीए ने यमुना की सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने के लिए की 7वें नदी उत्सव की घोषणा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने आज 7वें नदी उत्सव की घोषणा के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. यह उत्सव 24 से 26 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा और इस साल का उत्सव यमुना और उसके गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और सभ्यतागत महत्व को समर्पित है.तीन दिवसीय इस उत्सव का उद्घाटन दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू करेंगे, जिसमें स्वामी अवधेशानंद गिरि जी और श्रीमती शोवना नारायण सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगे.
सच्चिदानंद जोशी ने बताई उत्सव की रूपरेखा
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आईजीएनसीए (IGNCA)के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने उत्सव की रूपरेखा बताई और नदियों को केवल भौतिक और पारिस्थितिक आयामों से परे, यादों, संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक अनुभवों के जीवंत भंडार के रूप में देखने के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला.
“नदी केवल एक भौगोलिक इकाई या पानी का स्रोत नहीं है; यह हमारी सभ्यतागत यादों का जीवंत भंडार है. यमुना सदियों से हमारी सांस्कृतिक कल्पना, परंपराओं, कला, साहित्य और सामूहिक चेतना का अभिन्न अंग रही है. नदी उत्सव के माध्यम से, हम नदी के इन विविध आयामों को सार्वजनिक चर्चा में लाना चाहते हैं और जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में नदियों के साथ हमारे संबंधों की गहरी समझ विकसित करना चाहते हैं. यह उत्सव लोगों को यमुना के सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व से फिर से जोड़ने और इसकी पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत दोनों को संरक्षित करने के बारे में हमारी सामूहिक बातचीत को नया रूप देने का एक प्रयास है.” डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सेक्रेटरी मेंबर, आईजीएनसीए (IGNCA)
फिल्म फेस्टिवल के तहत दिखाई जाएंगी 17 चुनिंदा फिल्में
तीन दिवसीय इस उत्सव में सेमिनार, व्याख्यान श्रृंखला, प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, फिल्म फेस्टिवल और प्रस्तुतियां शामिल होंगी. इसमें देश भर के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, कलाकार, सांस्कृतिक क्षेत्र के लोग और प्रतिभागी यमुना के विभिन्न आयामों को जानने-समझने के लिए एक साथ आएंगे.फिल्म फेस्टिवल के तहत 17 चुनिंदा फिल्में दिखाई जाएंगी, जिनमें से कुछ फिल्में पहली बार दिखाई जा रही हैं. पिछले कुछ सालों में, 'नदी उत्सव' ने शौकिया और उभरते हुए फिल्म निर्माताओं को भी बहुत मदद और एक मंच दिया है, जिससे नदियों पर उनके नज़रिए और रचनात्मक काम को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने में मदद मिली है. 24 सितंबर को सुबह 7 बजे वासुदेव घाट पर एक पेंटिंग वर्कशॉप भी होगी, जिसमें हिस्सा लेने वालों को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के ज़रिए यमुना से जुड़ने का मौका मिलेगा.
नदी ने पीढ़ियों को कैसे प्रेरित और प्रभावित किया
इस बार का उत्सव खास तौर पर इस बात पर ध्यान देगा कि यमुना ने इस इलाके की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान बनाने में क्या भूमिका निभाई है. परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति से लेकर कहानियों, यादों और सामुदायिक रीति-रिवाजों तक, यह उत्सव इस बात को समझेगा कि नदी ने पीढ़ियों को कैसे प्रेरित और प्रभावित किया है. यह उत्सव नदियों, पर्यावरण और संस्कृति के आपसी जुड़ाव पर बातचीत को भी बढ़ावा देगा, ताकि नदियों को सिर्फ़ भौगोलिक चीज़ों के बजाय जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के तौर पर बेहतर ढंग से समझा जा सके.
7वां 'नदी उत्सव' 24 से 26 सितंबर तक नई दिल्ली में किया जाएगा आयोजित
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजीएनसीए (IGNCA) के 'जनपद संपदा' विभाग के प्रमुख प्रो. के. अनिल कुमार, 'नदी उत्सव' के संयोजक श्री अभय मिश्रा और आईजीएनसीए (IGNCA) के मीडिया सेंटर के कंट्रोलर श्री अनुराग पुनेठा भी मौजूद थे. उन्होंने उत्सव के कार्यक्रम और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी.तीन दिनों तक चलने वाले 'नदी उत्सव' में दर्शकों को कई सांस्कृतिक रूपों के ज़रिए यमुना का अनुभव करने का मौका मिलेगा. साथ ही, वे इस इलाके के लोगों, परंपराओं और सामूहिक यादों के लिए यमुना के सदाबहार महत्व पर भी विचार कर सकेंगे.
'नदी उत्सव' के ज़रिए IGNCA भारत की नदियों और देश की सभ्यतागत विरासत के साथ उनके गहरे रिश्ते पर बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है. साथ ही, यह उत्सव नदियों के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने और उन्हें बचाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर देगा.'इस बार यमुना' थीम वाला 7वां 'नदी उत्सव' 24 से 26 सितंबर, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा.
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